अयातुल्ला अली खामनेई की मौत पर शिया मुस्लिम में रोष व्याप्त, कश्मीर में लोगों ने किया प्रदर्शन

जनप्रवाद ब्यूरो, नई दिल्ली : ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामनेई की मौत पर विश्व भर के शिया मुस्लिम में रोष व्याप्त है। सोमवार को भी कश्मीर के कुछ हिस्सों में शिया मुसलमानों ने ईरान के समर्थन में प्रदर्शन किया। रोध प्रदर्शन के कारण प्राधिकारियों ने लोगों की आवाजाही पर प्रतिबंध लगा दिया और मोबाइल इंटरनेट की गति धीमी कर दी। अधिकारियों के अनुसार शहर के बेमिना, गुंड हसीभट और जहांगीर चौक इलाकों में तथा दक्षिण कश्मीर के पुलवामा कस्बे में लोगों द्वारा विरोध प्रदर्शन किया गया। 

दरअसल, अमेरिका और इजराइल के संयुक्त हवाई हमलों में रविवार को खामेनेई की मौत हो गई जिसके विरोध में रविवार को लखनऊ, कश्मीर सहित देश के अलग- अलग हिस्सों में प्रदर्शन हुआ। यह प्रदर्शन सोमवार को भी जारी रहा। कश्मीर घाटी के इलाकों में  सैकड़ों शिया प्रदर्शनकारी जमा हुए। उन्होंने सड़कों पर मार्च किया और अमेरिका तथा इजराइल के विरोध में नारेबाजी की। कुछ क्षेत्रों में सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए हल्के बल का प्रयोग किया।

 विरोध प्रदर्शनों को देखते हुए कश्मीर के कुछ हिस्सों में लोगों की आवाजाही पर कड़ी पाबंदियां लगा दी गई हैं। अधिकारियों ने बताया कि लाल चौक स्थित प्रतिष्ठित घंटाघर को चारों ओर अवरोधक लगाकर सील कर दिया गया। प्रदर्शनकारियों के जमावड़े को रोकने के लिए शहर भर में बड़ी संख्या में पुलिस और अर्धसैनिक बल केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के कर्मियों को तैनात किया गया।

शिया बहुल क्षेत्रों में लगाया गया है प्रतिबंध 
ईरान के समर्थन में मुताहिदा मजलिस-ए-उलेमा द्वारा एक दिवसीय बंद का ऐलान किया गया। बंद में स्थिति को काबू करने के लिए पुलिस द्वारा कई तरह के प्रतिबंध लगाए गए हैं। मुताहिदा मजलिस-ए-उलेमा के अध्यक्ष मीरवाइज उमर फारूक ने कहा कि हम लोगों से आग्रह करते हैं कि वे एकता और शांति के साथ इसमें शामिल हों। विपक्षी पीपुल्स डेमोकेटिक पार्टी (पीडीपी) अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती सहित कई राजनीतिक दलों ने प्रदर्शन का समर्थन किया है।

 

पीटीआई के अनुसार महबूबा मुफ्ती ने कहा कि ईरान के सर्वोच्च नेता की शहादत पर मीरवाइज उमर फारूक द्वारा किए गए बंद के आह्वान के प्रति हम अपना पूर्ण समर्थन और एकजुटता व्यक्त करते हैं। यह शोक का दिन है जो दुनिया को याद दिलाता है कि कहीं भी होने वाला अन्याय संपूर्ण मुस्लिम समुदाय और सत्य के लिए खड़े सभी लोगों को आहत करता है। बता दें कि कश्मीर में लगभग 15 लाख शिया रहते हैं।