जनप्रवाद ब्यूरो। पीएम मोदी के दौरे से पहले इजरायल ने भारत को अब तक का सबसे बड़ा आॅफर दिया है। यह प्रस्ताव एक ऐसी मिसाइल को लेकर है जो सात तहों में छुपे दुश्मन के सैन्य ठिकानों को पलभर में मलबा बना सकती है। इसकी रेंज 2000 किलोमीटर है। इसके भारत आने के बाद दिल्ली से बटन दबाते ही किराना हिल्स मलबा जाएगा।
बदलती युद्धशैली में मिसाइल अहम
बदलती आधुनिक युद्धशैली में मिसाइल की भूमिका काफी अहम हो चुकी है। एक बटन दबाते ही दुश्मनों को तबाह किया जा सकता है। आज दुनिया के कई देशों के पास ऐसी मिसाइल्स हैं, जो सैकड़ों टन विस्फोटक लेकर हजारों किलोमीटर जाकर टार्गेट पर सटीक हमला करती हैं। भारत भी कई तरह की मिसाइल विकसित कर रहा है। ब्रह्मोस के साथ अग्नि सीरीज की मिसाइल विकसित की जा रही है। भारतीय रक्षा वैज्ञानिक इस दिशा में तेजी से काम कर रहे हैं। जिसका इस्तेमाल दुश्मनों के बंकरों को नष्ट करने में किया जाएगा। बता दें कि अधिकांश देश अपने संवेदनशील सैन्य ठिकानों और परमाणु बम बनाने वाले प्लांट को जमीन के अंदर सुरक्षित कर रहे हैं। पिछले साल अमेरिका ने बंकर बस्टर बम का इस्तेमाल कर ईरान के ऐसे ही एक परमाणु ठिकाने को तबाह करने का दावा किया था। पाकिस्तान का परमाणु ठिकाना किराना हिल्स की पहाड़ियों में ही अंडरग्राउंड स्थित है।
ब्रह्मोस से भी खतरनाक मिसाइल
अब भारत को अपने मिसाइल बेड़े में ब्रह्मोस से भी खतरनाक मिसाइल शामिल करने का आॅफर मिला है। यह मिसाइल डीप स्ट्राइक करने में सक्षम है। रेंज और स्पीड के मामले में यह मिसाइल ब्रह्मोस से दो कदम आगे है। इसका नाम एयर-लॉन्च्ड बैलिस्टिक मिसाइल है। विभिन्न रक्षा आकलनों के अनुसार इसकी मारक क्षमता 1500 से 2000 किलोमीटर तक हो सकती है। अन्य अनुमान इसकी न्यूनतम प्रभावी रेंज लगभग 1000 किलोमीटर बताते हैं, जो पारंपरिक एयर लांच हथियारों से काफी अधिक है। इसकी लंबाई लगभग आठ मीटर और वजन करीब तीन टन है। रिपोर्ट के अनुसार, यह मिसाइल लड़ाकू विमानों से लांच की जा सकती है। यह दुश्मन के अत्यधिक सुरक्षित रणनीतिक ठिकानों को भी निशाना बनाने में सक्षम है।
एशिया में बनेगा नया शक्ति संतुलन
अगर यह प्रस्ताव आगे बढ़ता है तो एशिया में शक्ति संतुलन की एक नई राह खुल जाएगी। इससे भारत की रणनीतिक शक्ति में बड़ा बदलाव आएगा। यह मिसाइल खास तौर पर गहरे और अत्यधिक सुरक्षित ठिकानों पर हमला करने के लिए डिजाइन की गई बताई जा रही है। यह मिसाइल इजरायल की सिल्वर स्पैरो टार्गेट मिसाइल पर आधारित बताई जाती है। आधुनिक समय में यह मिसाइल इसलिए महत्वपूर्ण हो जाती है क्योंकि यह लक्ष्य की ओर बढ़ते समय बैलिस्टिक मार्ग अपनाती है। लांच के बाद यह ऊंचाई पर जाकर अत्यधिक तेज गति से नीचे आती है। इसकी अंतिम चरण की गति हाइपरसोनिक स्तर यानी कम से कम 6100 किलोमीटर प्रति घंटा हो जाती है। ऐसे में एयर डिफेंस सिस्टम के लिए इसे रोक पाना नामुमकिन है। बता दें कि तेज गति से टकराने पर उत्पन्न गतिज ऊर्जा लक्ष्य की सतह को भेदने की क्षमता को काफी बढ़ा देती है। यही कारण है कि मजबूत कंक्रीट स्ट्रक्चर या भूमिगत ठिकानों के खिलाफ इस प्रकार के हथियार बेहद प्रभावी माने जाते हैं। आधुनिक सैन्य ढांचे में रणनीतिक ठिकानों को अक्सर मोटी कंक्रीट दीवारों, भूमिगत संरचनाओं और भौगोलिक सुरक्षा के जरिए सुरक्षित रखा जाता है। ऐसे लक्ष्यों को नष्ट करने के लिए उच्च सटीकता के साथ-साथ भारी प्रभाव ऊर्जा भी जरूरी होती है। रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि गोल्डन होराइजन जैसे हथियार रणनीतिक संदेश देने वाले मिशनों के लिए बेहद उपयोगी होंगे। भविष्य में यह मिसाइल भारतीय शस्त्रागार का हिस्सा बनती है, तो इससे भारत की लंबी दूरी की सटीक हमले की क्षमता में महत्वपूर्ण वृद्धि होगी। साथ ही क्षेत्रीय सुरक्षा संतुलन पर भी व्यापक प्रभाव पड़ेगा।





