जन प्रवाद, ब्यूरो।
नई दिल्ली। उत्तर भारत से शीत ऋतु की विदाई के साथ ही तापमान में उल्लेखनीय और नाटकीय परिवर्तन दर्ज किया जा रहा है। वहीं दक्षिण भारत में वर्षा का अलर्ट जारी किया गया है। पर्वतीय क्षेत्रों में हिमपात की संभावना बनी हुई है तथा उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में वर्षा की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। हिंद महासागर में सक्रिय चक्रवात ‘होरासियो’ लगभग 260 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से अग्रसर है। यद्यपि इसके भारत के किसी तटीय क्षेत्र पर लैंडफॉल की संभावना नहीं है, तथापि इसका व्यापक प्रभाव भारतीय उपमहाद्वीप पर परिलक्षित हो रहा है। मौसम विभाग ने इस तूफान को ध्यान में रखते हुए आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और केरल में चेतावनी जारी की है।

देशव्यापी मौसम की विविधता
वर्तमान समय में देशभर में मौसम के विभिन्न रूप देखने को मिल रहे हैं। पंजाब और हरियाणा में कोहरे की वापसी हो रही है, जबकि पर्वतीय इलाकों में हिमपात का दृश्य परिलक्षित है। उत्तर प्रदेश, दिल्ली और बिहार में प्रखर धूप खिली हुई है, वहीं दक्षिण भारत में वर्षा की संभावना बनी हुई है। उत्तर-पश्चिमी भारत में आगामी तीन दिनों में तापमान में पांच डिग्री तक की वृद्धि दर्ज की जा सकती है।

वर्षा संभावित क्षेत्र
मौसम विभाग के अनुसार पश्चिमी विक्षोभ तथा समुद्र में निम्न दबाव क्षेत्र के संयुक्त प्रभाव से अंडमान-निकोबार, पश्चिम बंगाल, सिक्किम और मेघालय में वर्षा की संभावना है। इसके अतिरिक्त कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और केरल में तेज हवाओं के साथ मध्यम वर्षा हो सकती है।
दिल्ली-एनसीआर का मौसम
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में तापमान सामान्य से लगभग पांच डिग्री अधिक दर्ज किया गया है। गुरुवार को न्यूनतम तापमान 12.6 डिग्री सेल्सियस रहा, जबकि शाम 5:30 बजे सापेक्ष आर्द्रता 26 प्रतिशत दर्ज की गई। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के आंकड़ों के अनुसार बुधवार शाम सात बजे वायु गुणवत्ता में सुधार हुआ और यह मध्यम श्रेणी में दर्ज की गई। वायु गुणवत्ता सूचकांक 200 रहा, जबकि पूर्व दिवस यह खराब श्रेणी में था। फिलहाल, दिल्ली में वर्षा की कोई संभावना नहीं है।
उत्तर प्रदेश का मौसम
उत्तर प्रदेश का मौसम वर्तमान में शुष्क और गर्म बना हुआ है। दिन में प्रखर धूप रहेगी, जबकि प्रात: और संध्या समय हल्की ठंडक का अनुभव होगा। आगामी दो से चार दिनों में केदारनाथ के पर्वतीय क्षेत्रों में वर्षा की संभावना है, जिससे तापमान में गिरावट दर्ज की जा सकती है।





