जनप्रवाद ब्यूरो, नई दिल्ली। पाकिस्तान के मक्का समझौते को अब उसी की भाषा में जवाब मिलेगा। इसके लिए एक ओर जहां भारत ग्रीस और साइप्रस जैसे उसके क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्वियों से सैन्य सहयोग बढ़ा रहा है। वहीं भारत-ब्राजील-दक्षिण अफ्रीका की नौसेनाएं एक साथ त्रिपक्षीय नौसैनिक अभ्यास में ताकत दिखाएंगी।
तुर्किये और पाक गठजोड़ को मिलेगा जवाब
अंतरराष्ट्रीय समुदाय में तुर्किये और पाकिस्तान के गठजोड़ को भारत का कड़ा जवाब मिलेगा। इसके लिए विशेष रोडमैप तैयार किया गया है। तुर्किये और पाकिस्तान के बीच बढ़ते रक्षा सहयोग के बीच भारत भी ग्रीस और साइप्रस जैसे उसके क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्वियों से सैन्य सहयोग बढ़ा रहा है। रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह की साइप्रस और ग्रीस की चार दिवसीय यात्रा इसी व्यापक सामरिक संदर्भ की कड़ी मानी जा रही है। समुद्री सुरक्षा और रक्षा सहयोग पर केंद्रित यह दौरा ऐसे समय हो रहा है, जब तुर्किये-पाकिस्तान सैन्य साझेदारी भारत की सुरक्षा संबंधी चिंताओं में अहम बनी हुई है। ऐसे में भारत भी भूमध्यसागर में अपनी सामरिक पहुंच मजबूत करने में भी जुटा है। भारत और तुर्किये के बीच संबंधों में पाकिस्तान का मुद्दा लंबे समय से संवेदनशील रहा है। बता दें कि आॅपरेशन सिंदूर के दौरान तुर्किये ने पाकिस्तान को उन्नत बेयराक्तार ड्रोन्स दिए, जिनका उसने सीमा पर खूब इस्तेमाल किया। मौजूदा स्थिति में ग्रीस और साइप्रस के साथ भारत के बढ़ते रक्षा संबंध क्षेत्रीय शक्ति-संतुलन के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
पाकिस्तान के गठबंधन की काट
तुर्किये और पाकिस्तान के गठबंधन की काट के लिए भारत ने पिछले कुछ महीनों में साइप्रस के साथ रक्षा सहयोग पर छह साल का विशेष रोडमैप तैयार किया है। इसके लिए ग्रीस के साथ सैन्य सहयोग योजना पर हस्ताक्षर किए। रक्षा उद्योगों के बीच तालमेल बढ़ाने के लिए एक साझा घोषणापत्र भी जारी किया गया है। ग्रीस अपनी भौगोलिक स्थिति के कारण यूरोप का पूर्वी प्रवेश द्वार है। यह भारत-मध्य पूर्व यूरोप आर्थिक गलियारे के लिए महत्वपूर्ण कड़ी भी है, जो यूरोपीय बाजारों से जोड़ती है।
भारत ग्रीस और साइप्रस से आगे की सोच
दूसरी ओर भारत ग्रीस और साइप्रस से भी आगे की सोचकर चल रहा है। इसके लिए भारतीय नौसेना का अग्रिम पंक्ति का गाइडेड मिसाइल युद्धपोत आईएनएस तरकश दक्षिण अफ्रीका की समुद्री यात्रा पर है। यह युद्धपोत यहां भारत, ब्राजील, और दक्षिण अफ्रीका की नौसेनाओं के बीच होने वाले नौवें त्रिपक्षीय समुद्री अभ्यास इब्सामार-9 में भाग लेगा। यह युद्धाभ्यास इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इस बार यहां समुद्री युद्ध का ही अभ्यास नहीं होगी बलिक समुद्री डकैती रोकने और उनको भागाने तक पर केंद्रीत होगा। इस अभ्यास का उद्देश्य तीनों देशों की नौसेनाओं के बीच तालमेल बढ़ाना है। साथ ही इसके माध्यम से समुद्री सहयोग व एक-दूसरे की संचालन क्षमताओं को बेहतर ढंग से समझा जा सकेगा। बता दें कि गौरतलब वर्ष 2008 से ही भारत, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका के बीच यह अभ्यास हर दो साल में आयोजित किया जा रहा है। समय के साथ अब यह तीनों देशों की नौसेनाओं के लिए संयुक्त प्रशिक्षण, अनुभव साझा करने और समुद्री अभियानों के बेहतर तरीकों को समझने का एक प्लेटफार्म बन गया है।
इब्सामार-9 अभ्यास शुरू
इब्सामार-9 के दौरान समुद्र में विभिन्न प्रकार के सैन्य अभियानों का अभ्यास किया जाएगा। इसमें सतह पर मौजूद युद्धपोतों के बीच युद्ध, हवाई हमलों से बचाव और पनडुब्बियों से निपटने की रणनीतियां शामिल हैं। इसके अलावा नौसैनिक विमानों के संचालन, संदिग्ध जहाजों की जांच, समुद्री डकैती रोकने, खोज एवं बचाव अभियान और युद्धपोतों में आग लगने या नुकसान होने की स्थिति से निपटने का अभ्यास भी किया जाएगा। अभ्यास के दौरान तीनों देशों के नौसैनिक कर्मियों के बीच पेशेवर संवाद भी होगा। इससे उन्हें एक-दूसरे की कार्यप्रणाली समझने और संयुक्त अभियानों के दौरान बेहतर तालमेल स्थापित करने में मदद मिलेगी। इस अभ्यास में दक्षिण अफ्रीका की नौसेना अपने युद्धपोत एसएएस अमातोला और एसएएस किंग सेखुखुने प्रथम के साथ हिस्सा लेगी। इसके अलावा एसएएस एडम कोक तृतीय और पनडुब्बी एसएएस मंथातिसी भी इसमें शामिल होंगे। वहीं, ब्राजील की नौसेना युद्धपोत बीएनएस बारोसो के साथ भाग लेगी। इस युद्धपोत पर एक लिंक्स हेलीकॉप्टर भी तैनात रहेगा। भारतीय नौसेना की ओर से आईएनएस तरकश अभ्यास में हिस्सा लेगा। इसके साथ एक चेतक हेलीकॉप्टर भी तैनात है।





