स्ट्रेट आफ होर्मुज को लेकर पूरी दुनिया में घमासान, जाने इसके बनने की पूरी कहानी

जनप्रवाद ब्यूरो, टीम। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस्लामाबाद वार्ता से पहले बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि ईरान चाहे या न चाहे होर्मुज स्ट्रेट को जल्द ही फिर से खोल दिया जाएगा।  अब जिस स्ट्रेट आफ होर्मुज को लेकर पूरी दुनिया में घमासान मचा हुआ है उसके जन्म को लेकर वैैज्ञानिकों ने चौंकाने वाली थ्योरी पेश की है। 
होर्मुज जलडमरूमध्य पर चर्चा


अमेरिका-इजरायल और ईरान की जंग के बीच आज किसी चीज की सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है, तो वह है होर्मुज जलडमरूमध्य है। दुनिया का हर देश इसको पूरी तरह खोलने के पक्ष में है। वहीं ईरान ने इस खास क्षेत्र को बंद कर रखा है। अब राष्ट्रपति ट्रंप ने इस्लामाबाद में होने वाली शांति वार्ता से पहले कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य जल्द ही फिर से खुल जाएगा। चाहे ईरान सहयोग करे या न करे। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका होर्मुज स्ट्रेट में किसी भी तरह का टोल वसूलने की अनुमति नहीं देगा। उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपनी नई नीति की ओर इशारा दिया। इन सभी के बीच होमुर्ज को लेकर वैज्ञानिकों ने चौंकाने वाली थ्योरी पेश की है। उनके अनुसार होर्मुज स्ट्रेट तब बना था धरती पर इंसान नहीं थे। पानी की यह संकरी पट्टी आज आधुनिक दुनिया पर कैसे राज करती है, इसे जानने के लिए इस पूरी स्टडी को समझना होगा।
होर्मुज दुनिया के सबसे प्रमुख ऊर्जा मार्ग


बता दें कि स्ट्रेट आफ होर्मुज दुनिया के सबसे प्रमुख ऊर्जा मार्गों में से एक है। इस संकरे समुद्री गलियारे से दुनिया का 20 फीसदी ऊर्जा व्यापार गुजरता है। फिलहाल यह जगह ईरान की ताकत और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए परेशानी की वजह बन गई है। वैज्ञानिक अध्ययनों से पता चला है कि इस जलडमरूमध्य की भूमिका लाखों साल पहले पृथ्वी की पपड़ी पर लिख दी गई थी। उस समय धरती पर पहला इंसान पैदा भी नहीं हुआ था। धरती की स्टडी से पता चलता है कि 6000 साल पहले फारस की खाड़ी का अस्तित्व ही नहीं था। उस समय न अरब था, न ईरान और उनके बीच से गुजरने वाला होर्मुज जलडमरूमध्य। आज का अरब प्रायद्वीप लाखों साल पहले गोंडवाना नामक विशाल दक्षिणी महाद्वीप में था। इसके उत्तर में टेथीस महासागर था। यह इसे यूरेशिया के तटों से अलग करता था। लगभग 180 मिलियन वर्ष पहले गोंडवाना में टूट शुरू हुई, जिससे भारतीय और अरब प्लेटें उत्तर की ओर बढ़ गई। लाखों सालों तक ये प्लेटें यूरेशियाई प्लेट की तरफ गति करती रहीं। इस दौरान उनके बीच टेथीस सागर संकरा होता गया। आगे बढ़ते-बढ़ते अरब प्रायद्वीप यूरेशिया से टकराया तो पृथ्वी की पपड़ी में मौजूद चट्टानें टक्कर के कारण मुड़ गईं। पृथ्वी में आए इस बदलाव से बड़ी-बड़ी चोटियों निकल आर्इं। यह जाग्रोस पर्वत के रूप में परिवर्तित हो गया। यह विशाल पर्वतमाला, तुर्की से ईरान और फिर फारस की खाड़ी तक फैल गई।  स्टडी से पता चलता है कि जाग्रोस पर्वत के बीच समुद्र क्षेत्र का निर्माण हुआ। यही वजह है कि यहां खाड़ी केवल 110 मीटर गहरी है। इसकी चौड़ाई 340 किलोमीटर है। दक्षिणी पूर्वी सिरे पर जहां ये पहाड़ समुद्र में मिलते हैं। यहां अरब प्रायद्वीप और ईरान का तट इतने करीब आ जाते हैं कि उनके बीच का फासला महज 40 किलोमीटर रह जाता है। इसी संकरे रास्ते को होर्मुज जलडमरूमध्य कहा जाता है। यह फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है।