जनप्रवाद ब्यूरो, नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच भारत का दूसरा एलपीजी जहाज नंदा देवीह्ण मंगलवार को वाडीनार बंदरगाह सुरक्षित पहुंच गया। एक अधिकारी ने बताया कि यह जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर 46,500 मीट्रिक टन गैस लेकर आया है। इससे पूर्व, पहला जहाज शिवालिक सोमवार को मुंद्रा बंदरगाह पहुंचा था।
नंदा देवी जहाज देवभूमि पर लदी है गैस
दीनदयाल पोर्ट प्राधिकरण के चेयरमैन सुशील कुमार सिंह ने पत्रकारों को बताया कि नंदा देवी जहाज देवभूमि द्वारका जिले के वाडीनार बंदरगाह पर पहुंच गया है। एलपीजी (लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस) को सहायक जहाज में स्थानांतरित करने की तैयारी की जा रही है। सिंह ने बताया कि वाडीनार बंदरगाह प्राधिकरण को बंदरगाह मंत्रालय के निर्देश के अनुसार इन कार्यों को अधिकतम दक्षता के साथ पूरा करना है। वर्तमान निदेर्शों के तहत आने वाले एलपीजी जहाजों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है ताकि उनके स्थानांतरण एवं उतार की प्रक्रिया जल्द से जल्द पूरी हो सके। उन्होंने कहा कि सभी परिचालन मानकों की कड़ी निगरानी की जा रही है और इस प्रक्रिया में कई एजेंसियां शामिल हैं। सिंह ने बताया, ह्यह्य हमने जहाज का दौरा किया और चालक दल से मुलाकात की। ह्यडॉटर वेसलह्ण रास्ते में है। उसके पहुंचते ही वह ह्यमदर वेसल नंदा देवी के साथ लगेगा और जहाज-से-जहाज स्थानांतरण प्रक्रिया शुरू होगी।
एलपीजी जहाजों को संभालने की जरुरत
उन्होंने कहा कि मंत्रालय ने निर्देश दिया है कि भविष्य में आने वाले सभी भी प्राथमिकता के आधार पर संभाला जाए और सभी सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन किया जाए। भारत अपनी जरूरत का लगभग 88 प्रतिशत कच्चा तेल, 50 प्रतिशत प्राकृतिक गैस और 60 प्रतिशत एलपीजी आयात करता है। इसमें से अधिकतर ईंधन होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते आता है। अमेरिका तथा इजराइल द्वारा ईरान पर हमले और तेहरान की जवाबी कार्रवाई के बाद यह मार्ग बाधित हो गया है। वर्तमान में 22 भारतीय ध्वज वाले जहाज फारस की खाड़ी के पश्चिमी हिस्से में मौजूद हैं और उनके लिए सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित करने के प्रयास जारी हैं। इन पर 611 नाविक सवार हैं।
एलपीजी खपत में मार्च में 17 प्रतिशत गिरावट
पश्चिम एशिया में युद्ध के कारण आपूर्ति बाधित होने से देश में रसोई गैस (एलपीजी) की खपत मार्च के पहले पखवाड़े में 17.7 प्रतिशत घट गई। प्रारंभिक उद्योग आंकड़ों से यह जानकारी मिली है। आंकड़ों के अनुसार, मार्च के पहले पंद्रह दिन में एलपीजी खपत घटकर 11.47 लाख टन रह गई जो पिछले वर्ष की समान अवधि के 13.87 लाख टन के मुकाबले 17.3 प्रतिशत कम है। यह फरवरी के पहले पखवाड़े की 15.57 लाख टन मांग से 26.3 प्रतिशत कम है। भारत अपनी एलपीजी आवश्यकता का लगभग 60 प्रतिशत आयात करता है जिसमें से अधिकतर होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते आता है। अमेरिका तथा इजराइल द्वारा ईरान पर हमले और तेहरान की जवाबी कार्रवाई के बाद यह मार्ग बाधित हो गया है। सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात से आपूर्ति प्रभावित होने के कारण सरकार ने घरेलू रसोई गैस की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए होटल जैसे वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों और उद्योगों को एलपीजी आपूर्ति में कटौती की है। सार्वजनिक क्षेत्र की तीन तेल विपणन कंपनियों के प्रारंभिक बिक्री आंकड़ों के अनुसार एक से 15 मार्च के दौरान एलपीजी खपत 2024 की समान अवधि की तुलना में 16 प्रतिशत और 2023 की समान अवधि की तुलना में 10.6 प्रतिशत कम रही। इंडियन आॅयल कॉपोर्रेशन लिमिटेड, हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉपोर्रेशन लिमिटेड और भारत पेट्रोलियम कॉपोर्रेशन लिमिटेड की बाजार में करीब 90 प्रतिशत हिस्सेदारी है। एलपीजी खपत में पिछले कुछ वर्ष में सालाना आधार पर तीन से चार प्रतिशत की स्थिर वृद्धि देखी गई थी, जिसका कारण सरकार द्वारा लकड़ी एवं अन्य प्रदूषणकारी ईंधनों के स्थान पर स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा देना है। युद्ध के कारण खाड़ी देशों में हवाई क्षेत्र बंद होने और उड़ानों के निलंबन से विमान ईंधन (एटीएफ) की खपत भी प्रभावित हुई है। मार्च के पहले पखवाड़े में यह चार प्रतिशत घटकर 3,27,900 टन रह गई जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में कम है। वहीं मासिक आधार पर इसमें 12.3 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इन दो युद्ध-प्रभावित ईंधनों के अलावा पेट्रोल और डीजल की मांग में अच्छी वृद्धि दर्ज की गई। पेट्रोल की बिक्री 13.2 प्रतिशत बढ़कर लगभग 15 लाख टन हो गई जबकि डीजल की खपत 8.2 प्रतिशत बढ़कर 33.84 लाख टन रही। मासिक आधार पर पेट्रोल की खपत में 11.2 प्रतिशत और डीजल की बिक्री में 7.7 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।





