दामाद के लिए ससुर का संन्यास ! मायावती ने दी अशोक को हिदायत

जन प्रवाद, ब्यूरो।
लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी में अपनी धाक जमाने की कोशिश में जुटे पूर्व राज्यसभा सांसद और पार्टी के नेशनल कोआर्डिनेटर रहे अशोक सिद्धार्थ अब अपने ही बनाए सियासी चक्रव्यूह में फंस गए हैं। दामाद आकाश आनंद के सहारे पार्टी में अपना प्रभाव बढ़ाने की उनकी कोशिश बसपा सुप्रीमो मायावती को कतई पसंद नहीं आई। परिणाम यह रहा कि सियासत में जमने से पहले ही उनके पांव उखड़ने लगे हैं। अब यदि अशोक सक्रिय राजनीति से अलग नहीं होते तो इसका सीधा असर आकाश आनंद के राजनीतिक भविष्य पर पड़ेगा। 


पार्टी सूत्रों की मानें तो अशोक और हाईकमान के बीच मनमुटाव का सिलसिला पिछले वर्ष दिल्ली विधानसभा चुनाव से शुरू हुआ था जो बदस्तूर जारी है। दक्षिण भारत, केरल समेत कुछ राज्यों की जिम्मेदारी संभाल रहे अशोक हाईकमान की मंजूरी के बिना दिल्ली में टिकट वितरण में दखल देने पहुंच गए थे। पदाधिकारियों पर कथित दबाव बनाने व चुनावी फैसलों में हस्तक्षेप से बसपा नेतृत्व नाराज हो गया। इसके बाद उनके खिलाफ कार्रवाई की जमीन तैयार होने लगी थी। कभी मायावती के करीबी माने जाने वाले अशोक को लेकर पार्टी में यह भी चर्चा है कि आकाश से उनकी बेटी की शादी के बाद उनका प्रभाव तेजी से बढ़ा और वह खुद को पार्टी में बेहद ताकतवर समझने लगे। मायावती ने ही आकाश और अशोक की बेटी का रिश्ता कराया था।


बसपा सुप्रीमो मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद की जिम्मेदारियां बहाल करने के लिए शर्त रखी है। उन्होंने कहा कि अगर आकाश के ससुर अशोक सिद्धार्थ राजनीति से संन्यास लेते हैं तभी पार्टी आकाश की जिम्मेदारियां वापस करने पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करेगी। बसपा सुप्रीमो ने बुधवार को जारी अपने बयान में कहा कि पार्टी ने अशोक को कई बार सुधरने का मौका दिया, लेकिन उन्होंने पार्टी के मिशन से अधिक निजी एवं पारिवारिक स्वार्थ और महत्वाकांक्षा को महत्व दिया। इसका खामियाजा उनके दामाद आकाश को भुगतना पड़ा है। उन्होंने अपने स्वार्थ में आकाश और पार्टी मूवमेंट की भी परवाह नहीं की। 


अशोक के विवादों का असर अब आकाश आनंद पर भी दिखने लगा है। राष्ट्रीय संयोजक पद से हटाए जाने के बाद यूपी विधानसभा चुनाव की तैयारियों के लिए हो रही जनसभाओं के पोस्टरों से उनकी तस्वीर गायब हो रही है। उनकी जगह छोटे भाई और नवनियुक्त मुख्य सेक्टर प्रभारी ईशान आनंद को प्रमुखता दी जा रही है। आजमगढ़ की हालिया जनसभा के पोस्टरों में आकाश की तस्वीरें काटे जाने से उनके समर्थक नाराज हैं। कभी बसपा के ‘पोस्टर बॉय’ रहे आकाश के लिए यह बदलाव पार्टी के भीतर बदलते समीकरणों का बड़ा संकेत माना जा रहा है।
बसपा सुप्रीमो मायावती ने कहा कि यूपी, उत्तराखंड व पंजाब में विधानसभा चुनाव नजदीक है। ये तीनों राज्य बसपा व बहुजन मूवमेंट के लिए विशेष हैं। इसे ध्यान में रखकर ही बसपा के सभी छोटे-बड़े कार्यकर्ता, पदाधिकारी, समर्थक एवं शुभचिंतक सत्ता प्राप्ति की मुहिम में डटे हैं और इसी तरह पार्टी की नीतियों को आगे बढ़ाते हुए कार्य करते रहेंगे।