भारत में एथेनॉल से चलेंगी गाड़ियां, तेल संकट से मुक्ति का नया उपाय

जनप्रवाद ब्यूरो, टीम। भारत में गाड़ियां तेल से नहीं बल्कि शराब से चलेगी। यह खबर सुनकर आप चौंकिए मत। यह सच होने जा रहा है। मजेदार बात यह है कि कार और बाइक शराब पीकर झूमते हुए चलेगी या साधारण तरह से रोड पर दौडे़गी। पूरा मामला जानने के लिए आपको पूरा वीडियो देखना होगा।
तेल का पैदा हो गया संकट 
अमेरिका, इजरायल और ईरान युद्ध से पूरी दुनिया के सामने तेल का संकट पैदा हो गया है। ताजा अपडेड के अनुसार अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान के साथ मौजूदा युद्धविराम को बढ़ाने का फैसला किया है। वहीं तेल निकासी के प्वाइंट होर्मुज की नाकेबंदी जारी रखने का ऐलान किया है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट कर यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के फील्ड मार्शल आसिम मुनीर और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की अपील पर हमले फिलहाल रोक दिए गए हैं। इससे हम ईरान की सरकार एकमत प्रस्ताव पेश कर सकेंगे। वहीं दूसरी ओर इस घोषणा पर ईरान की ओर से तीखी प्रतिक्रिया आई है। ईरान के संसद अध्यक्ष के सलाहकार महदी मोहम्मदी ने इस कदम को खारिज करते हुए कहा कि अमेरिका हमारे ऊपर हारने वाली शर्तें नहीं थोप सकता। साथ ही उन्होंने कहा कि ट्रंप द्वारा युद्धविराम बढ़ाने का ईरान के लिए कोई महत्व नहीं है। उन्होंने ईरान से अमेरिका के खिलाफ सैन्य कार्रवाई शुरू करने का आह्वान भी किया।
ट्रंप ने एक और घोषणा

ट्रंप ने एक और घोषणा की है। उन्होंने तीखे तेवरों में स्पष्ट रूप से कहा कि होर्मुज को लेकर ईरान सिर्फ इज्जत बचाने का खेल खेल रहा है। ट्रंप ने चेतावनी भरे अंदाज में इशारा किया कि जब तक ईरान और उसके नेतृत्व पर सख्त कार्रवाई नहीं होती, तब तक किसी भी तरह की डील मुमकिन नहीं। इन बातों से साफ हो जाता है कि यह युद्ध फिलहाल रुकने वाला नहीं है। ऐसे में दुनिया के सामने पैदा हुआ तेल संकट अभी जारी रहेगी। इस तेल संकट के बीच भारत ने इसकी काट निकाल ली है। भारत सरकार जल्द ई-85 फ्यूल नियम ला सकती है। इस र्इंधन में 85 प्रतिशत एथेनॉल होगा। इससे न केवल तेल आयात घटेगा बल्कि प्रदूषण भी कम होगा। सरकार के अनुसार इसके लिए कंपनियों को खास इंजन बनाना होगा। ऐसा इसलिए है क्योंकि आम गाड़ियों में यह फ्यूल इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा। सबसे पहले हम जान लेते हैं कि आखिर यह ई-85 र्इंधन क्या है। इसका जबाव है कि ई-85 एक ऐसा फ्यूल है जिसमें 85 प्रतिशत एथेनॉल और 15 प्रतिशत पेट्रोल होता है। ये पारंपरिक पेट्रोल से अलग है क्योंकि इसमें ज्यादातर हिस्सा बायो-फ्यूल का होगा। इससे ऊर्जा का नया विकल्प तैयार होता है जो पर्यावरण के लिए बेहतर माना जा रहा है।
ई-85 के लिए करने होंगे बदलाव


ई-85 में इस्तेमाल होने वाला एथेनॉल गन्ने, मक्का और अन्य अनाज से तैयार किया जाता है। इसका मतलब है कि किसानों की फसल अब सीधे ईंधन में बदल सकती है। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। बता दें कि भारत पहले ही ई-20 यानी 20 प्रतिशत एथेनॉल वाले पेट्रोल को लागू कर चुका है। ई-85 उससे कहीं बड़ा बदलाव है क्योंकि इसमें पेट्रोल की जगह ज्यादातर एथेनॉल होगा। ई-85 का इस्तेमाल केवल फ्लेक्स-फ्यूल वाहन में ही संभव होगा। सामान्य पेट्रोल इंजन इस फ्यूल को झेल नहीं पाएंगे और इससे इंजन खराब हो सकता है। ऐसे में इसके लिए नई तकनीक वाले इंजन जरूरी होंगे। वहीं इस फ्यूल को इस्तेमाल करने में कई चुनौतियां भी होेंगी। ई85 के लिए पेट्रोल पंपों पर अलग स्टोरेज और नोजल सिस्टम की जरूरत होगी। तेल कंपनियों को इसके लिए बड़ा निवेश करना होगा ताकि ये नया फ्यूल देशभर में आसानी से उपलब्ध हो सके।
देश को आर्थिक और रणनीतिक फायदा 

इसकी खासियतों के बारे में बात करें तो पेट्रोल के मुकाबले  एथेनॉल ज्यादा साफ जलता है। इससे कार्बन उत्सर्जन कम होता है। यह भारत के शहरों के लिए वातावरण के बेहद अनुकूल माना जा रहा है। इसके आने से आटो सेक्टर में नई क्रांति आएगी। बता दें कि भारत अपनी जरूरत का लगभग 90 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है। इससे आयात कम होगा तो भारत का पैसा बचेगा। इससे देश को आर्थिक और रणनीतिक दोनों तरह से फायदा मिलेगा।