जनप्रवाद ब्यूरो : फिल्म नदिया के पार में गुंजा और चंदन की प्रेम कहानी को दर्शकों का बहुत प्यार मिला था परंतु क्या आपको मालूम है कि इस प्रेम कहानी का अंत बेहद दुखद था। फिल्म के मेकर्स ने फिल्म के क्लाइमेक्स में बदलाव किया था। फिल्म नदिया के पार प्रसिद्ध उपान्यासकार केशव प्रसाद मिश्र की उपन्यास कोहबर की शर्त पर आधारित थी। फिल्म में गुंजा और चंदन की प्रेम कहानी की हैप्पी एंडिग दिखाई गई लेकिन असल जिंदगी में दोंनो का कभी मिलन नहीं हो पाता है। उपन्यास के मुताबिक गुंजा की बहन रूपा की मौत के बाद उसकी शादी ओंमकार से तय हो जाती है।

चंदन गुंजा और ओंमकार की शादी को रोक नहीं पाता और दोनों की शादी हो जाती है। गुंजा चंदन की भाभी बन कर घर आ जाती है। उसके बाद गांव में चेचक फैल जाता है और ओंमकार उसकी गिरफ्त में आ जाता है और उसकी मौत हो जाती है। ओंमकार की मौत के बाद गुंजा चंदन से शादी करने की इच्छा जाहिर करती है लेकिन वह मना कर देता है। कुछ समय बाद गुंजा की भी मौत हो जाती है और चंदन उसकी जलती हुई लाश को देखता रहता है। यहीं कहानी का अंत दिखाया गया परंतु फिल्म में चंदन और गुंजा की शादी हो जाती है।
क्लाइमेक्स को बदलने के लिए राजी नहीं हुए थे उपान्यासकार
जब फिल्म निर्माता ताराचंद बडजात्या ने फिल्म के क्लाइमेक्स में बदलाव की बात कहीं थी तो उपान्यासकार केशव प्रसाद मिश्र ने मना कर दिया था। उपान्यासकार का मानना था कि रचना लेखक के लिए संतान समान है और उसे बिना संवेदना के बदला नहीं जाना चाहिए परंतु बाद में आश्वासन मिलने पर वह इसके लिए मान गए।

घर-घर में बस गई थी गुंजा- चंदन की कहानी
गुंजा- चंदन की प्रेम कहानी को दर्शकों का अच्छा रिस्पांस मिला था। फिल्म ने अपने बजट से 30 गुना ज्यादा कमाई की थी। फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर 5.4 करोड़ रुपए की कमाई की थी। इसके बाद सूरज बडजात्या ने इसी फिल्म पर हम आपके है कौन जैसी सुपरहिट फिल्म का भी निर्माण किया।





