Supreme Court का केंद्र को आदेश, विवादित अध्याय का मसौदा बनाने वाले विशेषज्ञों से बनाएं दूरी 

जनप्रवाद ब्यूरो, नई दिल्ली:  कक्षा-8 की पुस्तक में छापे गए न्यायपालिका में भ्रष्टाचार वाले कंटेट का विवाद और गहराता जा रहा है। बुधवार को सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि केंद्र ने NCERT को सभी कक्षाओं की पाठ्यपुस्तकों की समीक्षा करने का निर्देश दिया है जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर केंद्र एनसीईआरटी को पाठ्यक्रम की समीक्षा करने के लिए कहने के बजाय इसके लिए विशेषज्ञ समिति का गठन करे तो यह बेहतर होगा। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट को आश्वासन दिया है कि संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञों का पैनल पाठ्यक्रम की समीक्षा करेगा। 

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि हमने NCERT में व्यवस्थागत बदलाव शुरू किए हैं, विषय विशेषज्ञों द्वारा जांच-पड़ताल किए बिना कुछ भी प्रकाशित नहीं किया जाएगा जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को कानून से संबंधित पाठ्यक्रम को अंतिम रूप देने के लिए संबंधित क्षेत्रों के विशेषज्ञों का पैनल एक सप्ताह के भीतर गठित करने का निर्देश दिया है। इसके अलावा कोर्ट ने केंद्र, राज्यों और विश्वविद्यालयों को निर्देश दिया है कि वे एनसीईआरटी की कक्षा आठ की पुस्तक में विवादास्पद अध्याय का मसौदा तैयार करने वाले तीन विशेषज्ञों से दूरी बनाएं। 

यह था पूरा मामला 
NCERT द्वारा कक्षा-8 की पुस्तक में न्यायपालिका में भ्रष्टाचार विषय पर कंटेट प्रकाशित किया गया था। इस कंटेट में देश के न्यायलयों में कितने केस पेडिंग है, न्यायलयों में जज की कमी, अदालतों में व्यवस्थाओं की कमी आदि के संबंध में जानकारी दी गई थी। एनसीईआरटी के इस कंटेट के बाद अधिवक्ताओं ने इस पर आपत्ति जताई। सुप्रीम कोर्ट में कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी ने सीजेआई के सामने इस मुद्दे को उठाया। उन्होंने कहा कि वे इस बात से विचलित हैं कि स्कूली छात्रों को इस तरह की सामग्री पढ़ाई जा रही है। सिब्बल ने अदालत से आग्रह किया कि इस मामले में स्वतः संज्ञान लिया जाए जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए कार्रवाई की।