संजय डहरिया और रवि राज ने अपनी कमजोरी को बनाई अपनी ताकत, मेहनत से उत्तीर्ण कर ली UPSC की परीक्षा 

जनप्रवाद ब्यूरो, नई दिल्ली : कैसे आकाश में सूराख़ नहीं हो सकता, एक पत्थर तो तबीअ'त से उछालो यारो। दुष्यंत कुमार की ये पंक्तियां छत्तीसगढ़ संजय डहरिया और बिहार के रविराज पर सटीक बैठती है। संजय और रविराज ने यूपीएससी-25 की कठिन परीक्षा को उत्तीर्ण कर यह साबित कर दिया है कि अपनी कमजोरियों को स्वंय पर हावी नहीं होने देना चाहिए अपितु उसे अपनी ताकत बनाना चाहिए। छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के निवासी संजय डहरिया (38) ने कैंसर से लड़ते हुए संघ लोकसेवा आयोग (यूपीएससी) की परीक्षा की तैयारी की और अपने तीसरे प्रयास में कामायाबी हासिल कर ली। संजय ने यूपीएससी परीक्षा 2025 में 946वीं रैंक हासिल की है। डहरिया अनुसूचित जाति वर्ग से आते हैं। उन्हें देखने में भी कुछ परेशानी का सामना करना पड़ता है। संजय के पिता लखनलाल डहरिया किसान हैं और माता रेशम डहरिया गृहणी हैं।संजय ने अपनी शुरुआती पढ़ाई अपने गांव के सरकारी स्कूल से पूरी की।

वर्ष 2012 में संजय को पता चला कि उन्हें लार ग्रंथियों में कैंसर है, तब उन्हें सपनों के टूटने का अहसास हुआ। संजय कहते हैं कि जब उन्हें जानकारी मिली कि उन्हें जानलेवा बीमारी है तब वह निराश तो हुए लेकिन उन्होंने उम्मीद नहीं छोड़ी। 2012 से 2018 के बीच मुंबई में इलाज के दौरान, उन्होंने अपने सपनों को पूरा करने के लिए कोशिश करना जारी रखा। इस दौरान, उन्होंने 2013 से 2017 तक रायपुर में आईडीबीआई बैंक में भी काम किया। बाद में, वह महासमुंद डाकघर के बैंकिंग शाखा में शामिल हो गए और 2017 से 2018 तक वहां काम किया। उन्होंने बताया कि आखिरकार यूपीएससी परीक्षा की तैयारी के लिए खुद को पूरी तरह से समर्पित करने के इरादे से उन्होंने अपनी तीसरी सरकारी नौकरी से इस्तीफा दे दिया और 2022 में यूपीएससी की परीक्षा देना शुरू किया और अपनी तीसरे प्रयास में 946वीं रैंक के साथ सफलता हासिल कर ली।

दृष्टिबाधित रवि राज ने पास की यूपीएससी की परीक्षा


बिहार के नवादा जिले के रविराज ने यूपीएससी के सिविल सेवा परीक्षा में 20वां स्थान हासिल किया है। रविराज को पांचवें अटेम्प्ट में यह कामयाबी मिली है। रविराज को तीन परीक्षाओं में लगातार निराशा हाथ लगी। यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा के पहले प्रयास में रवि राज ने सिर्फ पीटी पास किया था दूसरे और तीसरे प्रयास में पीटी भी नहीं निकल पाया लेकिन चौथे प्रयास में पीटी, मेंस और इंटरव्यू में कामयाबी हासिल कर 182वीं रैंक लेकर आए। इसके बाद भी रवि राज ने पढ़ाई नहीं छोड़ी। लिहाजा, पांचवें प्रयास में 20वीं रैंक मिली। पिता रंजन कुमार सिन्हा कहते हैं कि रवि राज की कामयाबी में उसकी मां का अहम रोल रहा है, जिन्होंने एक मां के साथ रवि राज की दोस्त और गुरु की तरह भूमिका निभाई। रविराज को उसकी मां पढ़कर सुनाती थी। रवि राज सुनता था फिर रवि राज बोलता था जिसे उसकी मां लिखती थी। रवि राज के पिता ने कहा कि ट्रेनिंग के दौरान भी रवि राज ने अपने टीचर और सहयोगी की मदद से पढ़ाई जारी रखी। इसके बाद उसे कामयाबी मिली है।