जन प्रवाद, ब्यूरो।
नई दिल्ली। चुनाव आयोग ने बड़ा बदलाव किया है। चुनाव आयोग ने स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) से जुड़ी घोषणा को ऑनलाइन फॉर्म 6 से अलग कर दिया है। जिन राज्यों में एसआईआर की प्रक्रिया जारी है, वहां भी नए मतदाताओं को ईसीआईनेट पोर्टल पर फॉर्म 6 और एसआईआर घोषणा अलग-अलग भरनी होगी। इससे पहले एसआईआर से जुड़ी घोषणा फॉर्म 6 के भीतर ही शामिल थी। साथ ही आवेदक को उसका जवाब देना भी अनिवार्य था।
चुनाव आयोग का यह फैसला ऐसे समय आया है, जब फॉर्म 6 में एसआईआर से जुड़ी घोषणा शामिल करने के फैसले पर आयोग के दो चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने आपत्ति जताई थी। दोनों ने इस बदलाव को नियमों के अनुरूप नहीं बताया था। अब आयोग ने इस व्यवस्था को बदलते हुए दोनों प्रक्रियाओं को अलग कर दिया है।

अब तक ईसीआईनेट पोर्टल पर नए मतदाताओं के रजिस्ट्रेशन के लिए उपलब्ध ऑनलाइन फॉर्म 6 में सेक्शन जे और के के बीच एसआईआर से जुड़ी एक घोषणा शामिल थी। इसमें आवेदक को तीन विकल्पों में से किसी एक का चयन करना पड़ता था।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार फॉर्म 6 में एसआईआर से जुड़ी घोषणा शामिल करने के फैसले पर चुनाव आयुक्त विवेक जोशी ने 16 मई को आपत्ति दर्ज कराई थी। उनका कहना था कि फॉर्म में इस तरह का बदलाव करने के लिए कानूनी संशोधन जरूरी है। वहीं, सुखबीर सिंह संधू ने 13 अगस्त को इस बदलाव को अनधिकृत और अवैध बताते हुए इसे तत्काल हटाने की बात कही थी। संधू ने 19 मई को भी इस मुद्दे पर अपनी सहमति जताई थी।

दोनों चुनाव आयुक्तों की आपत्ति के बावजूद जुलाई में ऑनलाइन फॉर्म 6 में यह घोषणा शामिल कर दी गई थी। द इंडियन एक्सप्रेस ने 12 जुलाई को पहली बार इस बदलाव की जानकारी दी थी। इसके बाद 23 सितंबर को प्रकाशित अपनी रिपोर्ट में अखबार ने बताया था कि दोनों आयुक्तों ने इस फैसले पर आपत्ति जताई थी। दरअसल, फॉर्म 6 का प्रारूप मतदाता पंजीकरण नियम, 1960 के तहत निर्धारित है। इसमें संशोधन करने का अधिकार केंद्र सरकार के पास है। ऐसे में चुनाव आयोग द्वारा अपने स्तर पर इसमें बदलाव किए जाने पर सवाल उठे थे।
चुनाव आयोग ने 26 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपने जवाबी हलफनामे में बताया था कि उसकी इलेक्टोरल रोल (एफ) डिवीजन ने 21 अक्टूबर को फॉर्म 6 और रकफ घोषणा को अलग करने का फैसला किया था।
आयोग ने हलफनामे में बताया कि शुरुआत में दोनों को एक ही फॉर्म में रखने का उद्देश्य आवेदकों की प्रक्रिया आसान करना था। अलग-अलग फॉर्म होने पर आवेदकों को दो बार ओटीपी और दो बार ई-सिग्नेचर की जरूरत पड़ती। वहीं, एक ही फॉर्म में दोनों प्रक्रियाएं होने से एक ओटीपी और एक ई-सिग्नेचर से काम पूरा हो जाता था।
आयोग ने माना कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर घोषणा को जिस तरह फॉर्म 6 के भीतर दिखाया गया, उससे ऐसा लग सकता था कि आयोग ने निर्धारित फॉर्म में संशोधन कर दिया है। हलफनामे में यह भी कहा गया कि फॉर्म 6 में संशोधन केवल केंद्र सरकार ही कर सकती है। इसके बाद आयोग ने दोनों प्रक्रियाओं को अलग करने का फैसला किया। यह पिछले छह हफ्तों में फॉर्म 6 को लेकर आयोग का तीसरा रुख था।





