पनामा में 6.1 तीव्रता का आया भूकंप, 10 किलोमीटर नीचे थी गहराई, शिमला के लिए भी चेतावनी

जनप्रवाद ब्यूरो, नोएडा। आज सुबह पनामा में 6.1 तीव्रता का भूकंप आया। इसकी गहराई 10 किलोमीटर नीचे थी। मुश्किल वाली बात यह है कि इससे पहले 7.7 तीव्रता के भूकंप के बाद 147 झटके महसूस किए गए। पिछले भूकंप से घरों, स्कूलों, सड़कों और सरकारी इमारतों को नुकसान पहुंचा था। पनामा सरकार ने आपातकाल घोषित कर दिया है। वहीं भारत को लेकर सामने आई रिपोर्ट ने सभी को चाँका दिया है। 
इन दिनों आफत में घिरा पनामा 

मध्य अमेरिका का सबसे दक्षिणी देश पनामा में इन दिनों आफत से घिर गया है। यहां मंगलवार यानी आज सुबह फिर भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र यानी एनसीएस के अनुसार इसकी तीव्रता 6.1 मापी गई। भारतीय समय के अनुसार सुबह 4 बजकर 50 मिनट 37 सेकंड पर यह भूकंप आया था। इसकी गहराई जमीन से 10 किलोमीटर नीचे थी। फिलहाल ताजा भूकंप से हुए नुकसान की जानकारी रिपोर्ट में सामने नहीं आई है। बता दें कि इससे पहले पनामा में 7.7 तीव्रता का भूकंप आया था। इसके बाद कई और झटके महसूस किए गए। आपातकालीन संचालन केंद्र के निदेशक रेने गार्सिया ने मीडिया चैनलों को बताया कि भूकंप के बाद 147 झटके आए थे। इनमें कुछ की तीव्रता 6.1 और 6.6 तक पहुंच गई थी। जानकारी के अनुसार केंद्र लॉस सैंटोस प्रांत में टोनोसी से करीब 39 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में था।
पनामा में सार्वजनिक सेवाएं प्रभावित 

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार पहले आए भूकंप से पनामा में सार्वजनिक परिवहन और हवाई सेवाएं प्रभावित हुई थीं। एहतियात के तौर पर देश की दो मेट्रो लाइनों पर सेवाएं रोक दी गई थीं। मुख्य अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को भी कुछ समय के लिए बंद किया गया था। हालांकि, बाद में हवाई अड्डे पर परिचालन फिर शुरू हो गया। सबसे ज्यादा नुकसान दक्षिणी तट पर स्थित कोक्ले प्रांत में सामने आया था। भूकंप को लेकर पनामा सरकार ने आपातकाल घोषित कर दिया है। जिससे भूकंप से प्रभावित लोगों की मदद की जा सके और राहत कार्यों में तेजी लाई जा सके। राष्ट्रपति कार्यालय में हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में मंत्री जुआन कार्लोस ओरिलैक ने कहा कि इस फैसले से सरकारी एजेंसियां तैयार रहेंगी और प्रभावित समुदायों की मदद के लिए जरूरी संसाधन उपलब्ध होंगे।
शिमला पर भूकंप का मंडराया खतरा

 
दूसरी ओर हिमाचल की राजधानी शिमला पर भूकंप ही नहीं भूस्खलन और फ्लैश फ्लड जैसी प्राकृतिक आपदाओं का खतरा बढ़ रहा है। नगर निगम की ओर से कराए गए मल्टी-हैजार्ड क्लाइमेट रिस्क एंड वल्नरेबिलिटी असेसमेंट यानी सीआरवीए के अध्ययन में यह खुलासा हुआ है। रिपोर्ट में कहा गया है कि शहर में भूस्खलन का एक बड़ा कारण बारिश के पानी की निकासी बाधित होना है। शहर में बढ़ते निर्माण के चलते अंग्रेजों के समय बनाए गए कई नाले बंद हो चुके हैं। बारिश के पानी की निकासी व्यवस्था बेहतर करने के लिए नगर निगम ने शहर के नालों का सर्वे करवाया है। इसके आधार पर 77 करोड़ रुपये की योजना तैयार की है। निगम ने बजट जारी करने के लिए केंद्र सरकार को इसका प्रस्ताव भेजा था, लेकिन तीन साल से इसे मंजूरी नहीं मिली है। इसी तरह आपदाओं से बचाव के लिए नगर निगम ने स्ट्रॉम वाटर मैनेजमेंट प्लानभी तैयार किया है। ऐसे में समझा जा सकता है कि निगम का खजाना भी खाली पड़ा है। ऐसे में तीन साल से 77 करोड़ रुपये का यह प्लान फाइलों से बाहर नहीं निकल पा रहा है। बता दें कि  नगर निगम शिमला ने इस साल पहली बार 75 करोड़ रुपये का जलवायु बजट पेश किया था। इसके तहत शहर में प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले संभावित नुकसान का अध्ययन करवाया है। करीब दस वर्षों के आंकड़ों और प्राकृतिक आपदाओं के विश्लेषण पर आधारित इस अध्ययन में सुझाव दिया गया है कि शिमला के लिए नई आपदा प्रबंधन नीति तैयार की जाए। इसमें जलवायु परिवर्तन से जुड़े जोखिमों को प्राथमिकता दी जाए। रिपोर्ट के अनुसार भविष्य में बादल फटना, अचानक आने वाली बाढ़  यानी फ्लैश फ्लड भूस्खलन और अनियोजित निर्माण शहर के लिए बड़ी चुनौतियां बन सकते हैं। इनसे निपटने के लिए मास्टर प्लान तैयार करना जरूरी है।