जनप्रवाद ब्यूरो, टीम। वैज्ञानिकों के एक शोध ने पूरी दुनिया में खौफ पैदा कर दिया है। शोध में कहा गया है कि पृथ्वी पर टेढी होने का खतरा मंडरा रहा है। इससे पूरी दुनिया का इको सिस्टम ही बिगड़ जाएगा। इससे सूखा, बाढ़ और बिना पानी के लोग बेहाल हो जाएंगे।
तस्वीरों ने पैदा की हलचल
नासा द्वार जारी तस्वीरों ने हलचल पैदा कर दी है। इसने पृथ्वी के विनाश को लेकर नई बहस छेड़ दी है। बता दें कि यह बात नई नहीं है। वैज्ञानिक कई साल से इस बात का अध्यन कर रहे हैं कि पृथ्वी के विनाश का क्या कारण होगा। यानी प्रलय काल को लेकर कई तरह के शोध सामने आ चुके हैं। अब नासा द्वारा जारी तस्वीरों में बताया गया है पूरी दुनिया में बेहतहाशा जल दोहन किया जा रहा है। इसमें भारत का हिस्सा सबसे ज्यादा है। उसके बाद चीन दूसरे और अमेरिका तीसरे स्थान पर है। भारी मात्रा में जल दोहन से संकट लगातार बढ़ रहा है। वैज्ञानिकों के अनुसार यह प्रक्रिया पृथ्वी के संतुलन को लगातार बिगाड़ रही है। नासा और अन्य संस्थानों के शोध के अनुसार, 1993 से 2010 के बीच भूजल निकालने के कारण पृथ्वी के ध्रुव की दिशा में बदलाव हुआ है। केवल इन 17 सालों में ही भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश और चीन में भूजल दोहन से लगभग 54 ट्रिलियन लीटर पानी निकाला गया। जिससे पृथ्वी की धुरी लगभग 78 सेमी पूर्व की ओर खिसक गई है।
ज्यादा जल दोहन से पृथ्वी के टेढ़ी होने का खतरा
ज्यादा जल दोहन से केवल पृथ्वी के टेढ़ी होने का खतरा नहीं है बल्कि कई तरह से संकट आएंगे। यह बात एक नहीं बल्कि कई वैज्ञानिक अध्ययनों में सामने आ चुकी है। वैज्ञानिकों के अनुसार जब पृथ्वी के भीतर से पानी निकाला जाता है तो जमीन के द्रव्यमान का संतुलन बिगड़ता है। इसकी वजह से इसे पुनर्वितरित करके संतुलित करने की कोशिश पृथ्वी करती रहती है। यह धरती से निकलकर यह पानी समुद्रों में पहुंच जाता है। इससे पृथ्वी का द्रव्यमान यानी मास वितरण बदल जाता है। इसको इस तरह से भी समझा जा सकता है कि पृथ्वी एक घूमती हुई गेंद की तरह है। अगर इसके द्रव्यमान का वितरण बदलता है तो इसके घूमने का अक्ष भी बदलता या खिसकता है। इसे पोलर मोशन कहते हैं।
भूमि के धंसने का खतरा
वैज्ञानिकों के अनुसार ज्यादा जल दोहन से सबसे बड़ा खतरा भूमि के धंसने का है। दिल्ली, कोलकाता और मुंबई जैसे शहरों में जमीन धंस रही है। यहां जमीन सिकुड़ रही है। भूजल के अत्यधिक दोहन से नदियों का प्रवाह भी कम हो रहा है। अगर पृथ्वी की धुरी लगातार खिसकती रही, तो इतना समझ लीजिए कि बड़ी तबाही आने वाली है। इसका असर पूरी मानव सभ्यता पर पडेगा। बता दें कि पृथ्वी की धुरी का झुकाव मौसमों को नियंत्रित करता है। अगर यह झुकाव बदलता है, तो गर्मी-सर्दी की अवधि और तेजी से बदलेगी। ध्रुवों पर अधिक सूर्य की रोशनी पड़ने से बर्फ तेजी से पिघलेगी। इससे समुद्र स्तर में वृद्धि से मुंबई, कोलकाता, बांग्लादेश जैसे तटीय शहर डूब सकते हैं। अटलांटिक की गल्फ स्ट्रीम जैसी धाराएं भी प्रभावित होंगी। जिससे यूरोप का तापमान अचानक गिर जाएगा। धुरी का खिसकाव पृथ्वी के घूर्णन को प्रभावित कर सकता है। जिससे दिन और रात की लंबाई में अंतर आ जाएगा। अगर धुरी और अधिक झुक जाए, तो उत्तरी ध्रुव पर 6 महीने की रात लंबी हो जाएगी। इसके अलावा धुरी में बदलाव से पृथ्वी के भीतर दबाव बदल जाएगा। इससे टेक्टोनिक प्लेट्स सक्रिय हो जाएंगी। रिंग आफ फायर यानी प्रशांत क्षेत्र में अधिक भूकंप आ सकते हैं। भारत जैसे देशों में मानसून पैटर्न पूरी तरह तबाह हो जाएगा। जिससे सूखा या अत्यधिक बारिश होगी।





