डीआरडीओ को मिली बड़ी सफलता

जन प्रवाद, ब्यूरो। 
नोएडा। अब भारत से 1,000 किमी दूर बैठे दुश्मन की खैर नहीं होगी। डीआरडीओ ऐसा कॉम्बैट एरियल व्हीकल तैयार कर रहा है। यह आसमान से लेकर समुद्र मार्गों तक वार करेगा। इसे घातक नाम दिया गया है। ईरान के साथ इजरायल-अमेरिका की जंग का असर पूरी दुनिया में दिख रहा है। तेल की कीमतें आसमान छूने लगी है। साथ ही यह जंग दुनिया के सभी देशों को बड़ी सीख भी दे रही है। बता दें कि ईरान ने अपनी सटीक रणनीति से अमेरिका जैसे सुपर पॉवर को बैकफुट पर ला दिया है। अमेरिका के लिए यह जंग काफी महंगी पड़ रही है। ईरान की इस रणनीति को दुनिया के तमाम सामरिक मामलों के जानकार बेहद सटीक और नए जमाने का युद्ध कौशल बता रहे हैं। एस-35 और एफ-22 जैसे पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट्स और आयरन डोम जैसे बेहद ताकतवर डिफेंस सिस्टम से लैस अमेरिका और इजरायल अब बेबस दिखाई दे रहे हैं। इसके पीछे की वजह ईरान के छोटे और कम कीमत के ड्रोन हैं। इनको मारने के लिए अमेरिका और इजरायल को काफी मशक्कत करनी पड़ रही है।

इससे कहा जा सकता है कि दुनियाभर में जंग का तौर-तरीका बदल रहा है। अब युद्ध जमीन पर नहीं बल्कि हवा में लड़े जा रहे हैं। चीन अपने 5वीं पीढ़ी के जे-20 लड़ाकू विमानों के बेड़े का विस्तार कर रहा है और अगली पीढ़ी की ड्रोन तकनीकों में भारी निवेश कर रहा है। ऐसे में भारतीय वायु सेना को भी एक निर्णायक कदम उठाने की जरूरत है। इसी क्रम में रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन यानी डीआरडीओ मानव रहित कॉम्बैट एरियल व्हीकल तैयार कर रहा है। इसे घातक नाम दिया गया है। बता दें कि घातक का मतलब होता है जानलेवा हमला।

रिपोर्ट के अनुसार घातक ड्रोन की कई विशेषताएं हैं। इसकी बेहतरीन स्टील्थ और जबरदस्त शक्ति इसकी पहचान है। वहीं पायलट की जान जोखिम में डाले बिना दुश्मन के इलाके में गहराई तक हमला करने की क्षमता इसे खतरनाक हथियारों की श्रेणी में खड़ा कर देती है। यह घातक स्वदेशी ड्रोन भारत के भविष्य की हवाई प्रतिरोधक क्षमता का एक मुख्य आधार बनने के लिए तैयार है। घातक के टिके रहने की क्षमता का मूल उसके फ्लाइंग-विंग आर्किटेक्चर में छिपी हुई है। इसमें पारंपरिक तौर पर विंग नहीं बल्कि छिपे हुए इंजन इनटेक लगे हैं। इसकी वजह से इस ड्रोन का रडार क्रॉस-सेक्शन जल्द पकड़ नहीं पाते हैं। यह अपने छोटे आकार के कारण दुश्मन को चकमा देने में सक्षम है।

घातक की एयरोडायनामिक व्यवहार्यता 2022 में साबित हो गई थी। घातक को मैन्ड-अनमैन्ड टीमिंग के लिए डिजाइन किया गया है। इसका मतलब है कि यह भारी सुरक्षा वाले हवाई क्षेत्र में घुसकर महत्वपूर्ण रडार ठिकानों और कमांड सेंटरों को नष्ट कर सकता है। घातक का आकार तेजस हल्के लड़ाकू विमान जैसा ही है, लेकिन लंबी दूरी के मिशनों के लिए इसकी परिचालन क्षमताएं कहीं ज्यादा बेहतर हैं। अधिकतम टेकआॅफ के समय इसका वजन लगभग 13 टन होता है। यह लगभग 3.7 टन फ्यूल ले जा सकता है। इस प्लेटफॉर्म को भारत के स्वदेशी कावेरी जेट इंजन के एक विशेष संस्करण से शक्ति मिलेगी। यह इंजन वर्तमान में रूस में उन्नत प्रमाणन परीक्षणों से गुजर रहा है। कई इंजीनियरिंग विकल्पों को मिलाकर, यह ड्रोन 1,000 किलोमीटर से ज्यादा की शानदार युद्ध-क्षमता और आठ घंटे तक हवा में मंडराने की क्षमता हासिल है। इससे आम लड़ाकू विमानों को दूर से निशाना बना सकता है।