जनप्रवाद ब्यूरो। वैज्ञानिकों को धरती के नीचे 50 करोड़ साल पुराने रहस्यमयी आईलैंड मिले हैं। नीदरलैंड की यूट्रेक्ट यूनिवर्सिटी की रिसर्च में पता चला है कि ये इलाके न केवल अपने आसपास के इलाकों की तुलना में ज्यादा गर्म हैं, बल्कि बहुत पुराने भी हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि इनका इतिहास 50 करोड़ साल से ज्यादा पुराना हो सकता है।
दक्षिणी महासागर को दुनिया का पांचवां महासागर माना
कुछ समय पहले नेशनल जियोग्राफिक के कार्टोग्राफर्स ने दक्षिणी महासागर को दुनिया का पांचवां महासागर माना था। अब नीदरलैंड की यूट्रेक्ट यूनिवर्सिटी की एक अंतरराष्ट्रीय टीम ने नया और अब तक छिपा हुआ महाद्वीप खोजने का दावा किया है। रिसर्चर्स का मानना है कि आइसलैंड के नीचे एक महाद्वीप डूबा हुआ है जिसे आइसलैंडिया नाम दिया गया है। यह रिसर्च इसलिए अहम है क्योंकि अभी तक माना जाता रहा है कि महाविशाल महाद्वीप 5 करोड़ साल पहले टूट गया था। नई स्टडी के नतीजे साबित होने से यह साफ हो गया कि यह पूरी तरह टूटा नहीं था। यह महाद्वीप ग्रीनलैंड से लेकर यूरोप तक फैला हुआ माना जा रहा है।
धरती के नीचे छिपा महाद्वीप
वैज्ञानिकों द्वारा धरती के नीचे छिपी खोजी गई दोनों जगहों का साइज महाद्वीपों के बराबर है। वैज्ञानिकों ने अपनी नई रिसर्च में इन्हें आईलैंड बताया है। नीदरलैंड की यूट्रेक्ट यूनिवर्सिटी की रिसर्च में पता चला है कि ये इलाके न केवल अपने आसपास के इलाकों की तुलना में ज्यादा गर्म हैं, बल्कि बहुत पुराने भी हैं। शोधकर्ताओं का मानना है कि इसका इतिहास 50 करोड़ साल से ज्यादा पुराना हो सकता है। रिसर्च के अनुसार ये आईलैंड लगभग 2,000 किलोमीटर की गहराई में स्थित है। इनकी ऊंचाई लगभग 1,000 किलोमीटर है। यह ऊंचाई इतनी ज्यादा है कि इसके आगे धरती का सबसे ऊंचा पहाड़ भी बौना है। भूकंप की जांच के दौरान अफ्रीका और प्रशांत महासागर के नीचे मौजूद इन इलाकों का पता चला था। बता दें कि जब बड़े भूकंप आते हैं, तो पूरी धरती कांपने लगती है। धरती की इन गहराइयों के बारे में जानने के लिए, वैज्ञानिकों को बड़े भूकंपों का इंतजार रहता है। भूकंपीय गति के सहारे वैज्ञानिक उन तथ्यों की जांच करते हैं जो जमीन में बहुत नीचे आते हैं।
994 में बोलीविया में आया था भीषण भूकंप
बता दें कि 1994 में बोलीविया में भीषण भूकंप आया था। इस दौरान वैज्ञानिकों को पृथ्वी ने गहराई में बहुत सारी खोजें की थी। यह रिसर्च बताती है कि धरती की आंतरिक परतें वैसी नहीं हैं जैसे पहले समझा जाता था। इसके अंदर बहुत पुरानी और विशाल संरचनाएं बनी हुई हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि धरती भीतरी सतह में होने वाली हलचलों को समझने के लिए इन अंदरूनी इलाकों के बारे में जानकारी होनी चाहिए। यह रिपोर्ट अभी तक किए गए कई अध्ययनों को चुनौती देती है। जिनसे उत्तरी अटलांटिक क्षेत्र में महासागर और महाद्वीप की क्रस्ट से लेकर आइसलैंड के बनने जैसी प्रक्रिया को समझा गया था। इस नई स्टडी से खनिज और हाइड्रोकार्बन्स स्रोतों को लेकर नई चर्चा शुरू हो सकती है। ये महाद्वीप के क्रस्ट में मिलते हैं। वैज्ञानिक इन तत्वों के बारे में नया खुलासा कर सकते हैं।





