सेना को जल्द मिलेगी आसमान की तीसरी आंख, दुश्मन की हर साजिश होगी नाकाम

जनप्रवाद ब्यूरो, नोएडा। भारतीय सेना को जल्द आसमान की तीसरी आंख मिलने वाली है। इससे दुश्मन की हर साजिश पकड़ी जाएगी। डीआरडीओ इस मिशन के लिए छह खास विमान तैयार कर रहा है। इसके लिए डीआरडीओ ने एआईईएसएल और अदाणी डिफेंस के साथ समझौते किए हैं। इससे भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल हो जाएगा जिसके पास ये खास रक्षा तकनीक उपलब्ध है।
डीआरडीओ ने चला बड़ा दांव 

रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन यानी डीआरडीओ ने एईडब्ल्यू एंड सी एमके-2 प्रोजेक्ट के लिए बड़ा दांव चला है। इसके लिए अदाणी डिफेंस और एआई इंजीनियरिंग के साथ दो अहम समझौते किए हैं। इसके तहत छह कमर्शियल विमानों को अब खतरनाक मिलिट्री रडार में बदला जाएगा। इससे भारतीय वायुसेना आसमान से ही दुश्मनों की हर हरकत पर पैनी नजर रखेगी। ये डील एयरबोर्न अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल यानी एईडब्ल्यू एंड सी एमके-2 प्रोजेक्ट को नई ताकत देगी। साथ ही इससे भारत की हवाई सीमा पूरी तरह सुरक्षित हो जाएगी। रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह की मौजूदगी में इस महात्वाकांक्षी प्रोजेक्ट पर मुहर लगी। इस प्रोजेक्ट के पूरा होने के बाद अब दुश्मन कोई भी साजिश रचने से पहले सौ बार सोचेगा। अब तक केवल अमेरिका, फ्रांस, इजराइल, चीन और स्वीडन जैसे पांच देशों ने ही स्वदेशी एईडब्ल्यू क्षमता विकसित की है। एईडब्ल्यू और सी-एमकेआईआई के विकसित होने के बाद भारत भी इस चुनिंदा समूह में शामिल हो जाएगा, जिसके पास यह खास रक्षा तकनीक उपलब्ध है।
ए321 यात्री विमान सेना में होंगे उपयोग

इन दो समझौतों की बात करें तो पहला समझौता एआई इंजीनियरिंग सर्विसेज लिमिटेड (एआईईएसएल) के साथ किया गया है। इसके तहत छह ए321 यात्री विमानों को सैन्य उपयोग के अनुरूप तैयार किया जाएगा। इन विमानों में विशेष उपकरण और अत्याधुनिक प्रणालियां लगाकर उन्हें एईडब्ल्यू एंड सी मार्क-2 विमान के रूप में विकसित किया जाएगा। दूसरा समझौता अदाणी डिफेंस सिस्टम्स एंड टेक्नोलॉजीज लिमिटेड के साथ हुआ है। कंपनी इस परियोजना में विकास एवं उत्पादन साझेदार की भूमिका निभाएगी। वह इन विमानों में लगने वाली मिशन प्रणालियों के विकास और उनके एकीकरण में डीआरडीओ का सहयोग करेगी। बता दें कि डीआरडीओ का सेंटर फॉर एयर बोर्न सिस्टम्स इस पूरे मिशन को लीड कर रहा है। कैब्स ने छह ए321 विमानों को स्पेशल मिलिट्री रोल के लिए तैयार करने का जिम्मा एआई इंजीनियरिंग सर्विसेज लिमिटेड को दिया है। ये विमान पहले आम यात्रियों को लाने-ले जाने का काम करते थे। अब इन्हें अत्याधुनिक हवाई चेतावनी और कंट्रोल प्लेटफॉर्म में बदल दिया जाएगा। अदाणी डिफेंस सिस्टम्स इस प्रोजेक्ट में मिशन सिस्टम्स के डेवलपमेंट का काम देखेगी। प्रोजेक्ट के पूरा होने के बाद ये विमान आसमान में उड़ते हुए कमांड और कंट्रोल सेंटर बन जाएंगे। एईडब्ल्यू एंड सी मार्क-2 प्रणाली तैयार होने के बाद भारतीय वायुसेना को लंबी अवधि और अधिक दूरी से दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रखने की क्षमता मिलेगी। इससे युद्धक्षेत्र की बेहतर जानकारी हासिल करने और अधिक प्रभावी कमान एवं नियंत्रण की क्षमता मिलेगी। इससे लंबी दूरी से आने वाले संभावित खतरों का समय रहते पता लगाकर उनका प्रभावी जवाब देना आसान हो जाएगा। बता दें कि यह भारत का सबसे उन्नत स्वदेशी एयरबोर्न सर्विलांस प्लेटफॉर्म तैयार बताया जा रहा है। इस प्लेटफॉर्म को भारतीय वायुसेना की इंटीग्रेटेड एयर कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम से जोड़ा जाएगा। यह देशव्यापी कमांड एवं कंट्रोल नेटवर्क है, जो निगरानी, वायु रक्षा और सैन्य अभियानों से जुड़े संसाधनों को रियल-टाइम में आपस में जोड़ता है। इसके माध्यम से हवाई रक्षा और अधिक मजबूत होगी। इसके अलावा युद्ध के समय निर्णय लेने की प्रक्रिया तेज होगी, युद्धक्षेत्र में बेहतर समन्वय स्थापित होगा। किसी भी खतरे के प्रति प्रतिक्रिया पहले से अधिक प्रभावी बन सकेगी।