मक्का जॉइंट डिफेंस पैक्ट की खुली पोल, तुर्की के विदेश मंत्री हाकान फिदान के बयान से उठे सवाल

जनप्रवाद ब्यूरो, नोएडा। पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की के बीच हुए रक्षा समझौते की हवा निकल गई। तुर्की के विदेश मंत्री ने बयान जारी कर कहा कि यह समझौता ईरान समेत किसी अन्य देश के खिलाफ नहीं है। वहीं यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब और यमन के रणनीतिक इलाकों में मिसाइल और ड्रोन हमलों का वीडियो जारी किया है। इन हमलों पर तुर्की की चुप्पी इस बात की गवाही दे रहा है कि यह समझौता केवल कागजी ही साबित होगा।
मक्का में अहम समझौता 

पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की के बीच मक्का में एक अहम समझौता हुआ था। इसे दुनिया में इस्लामिक नाटो भी कहा जाने लगा। इस समझौते को मक्का जॉइंट डिफेंस पैक्ट नाम दिया गया था। समझौते के अनुसार तीनों में से किसी भी एक देश पर सशस्त्र हमला तीनों देशों पर हमला माना जाएगा। तीनों देश मिलकर उसका सैन्य जवाब देंगे। दूसरी ओर इस समझौते कुछ दिन बाद ही नया समीकरण सामने आ गया। तुर्की के विदेश मंत्री हाकान फिदान ने अपने बयान में साफ किया है कि यह त्रिपक्षीय समझौता किसी खास देश या ईरान के खिलाफ नहीं है। बता दें कि तुर्की के विदेश मंत्री के बयान के बाद गठबंधन के स्वरूप पर सवाल उठने लगे हैं। तुर्की की समाचार एजेंसी अनादोलु को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने स्पष्ट किया कि तीनों देश किसी भी देश को तब तक दुश्मन नहीं मानेंगे जब तक यह सिद्ध न हो जाए कि यह हमला शत्रुतापूर्ण कार्रवाई है। 
हूती विद्रोहियों ने किया हमला

अब यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब और यमन के रणनीतिक ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन से हमला किया है। विद्रोहियों ने इन हमलों का वीडियो भी जारी किया है। वीडियो में हूती लड़ाके खुले इलाकों और जंगल के बीच से मिसाइल और ड्रोन लॉन्च करते दिखाई दे रहे हैं। यह वीडियो ऐसे वक्त सामने आया है, जब हूतियों ने सऊदी अरब की एक अहम तेल फैसिलिटी और यमन के मोखा बंदरगाह को निशाना बनाया है। 
मिसाइल दागते दिखे विद्रोही


जारी फुटेज में विद्रोही एक के बाद एक मिसाइल और ड्रोन हमले करते दिखाई दे रहे हैं। हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सरी ने दावा किया कि इन हमलों में सऊदी सैनिकों की मौजूदगी वाले इलाकों और हथियारों के गोदामों को निशाना बनाया गया। हूतियों ने सऊदी अरब के जिजान में मौजूद अरामको रिफाइनरी पर भी ड्रोन हमला करने का दावा किया। बता दें कि सऊदी ऊर्जा मंत्रालय ने रिफाइनरी से जुड़ी एक सुविधा में आग लगने की पुष्टि की है। हूतियों ने दावा किया कि यह हमला सऊदी ड्रोन के यमन के हज्जाह और सादा प्रांतों में घुसने के जवाब में किया गया है। इन हमलों ने यमन में 2022 के बाद से चली आ रही शांत स्थिति पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। बता दें कि मोखा बंदरगाह बाब-अल-मंदेब के पास है, जो दुनिया के अहम समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल है। ऐसे में यहां बढ़ती हिंसा का असर सिर्फ यमन और सऊदी अरब तक सीमित रहने के बजाय पूरे क्षेत्र की शिपिंग और ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ सकता है।
पाक, सऊदी अरब-तुर्की के बीच समझौता

हम एक बार फिर पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की के बीच हुए रक्षा समझौते पर वापस लौटते हैं। इस समझौते पर अब बड़ा सवाल उठने लगा कि क्या तुर्की और पाकिस्तान हुती विद्रोहियों के खिलाफ कारवाई करेंगे। इस पर विश्लेषकों का मानना है कि तुर्की के विदेश मंत्री हाकान फिदान का बयान एक तरह से सऊदी अरब के लिए एक झटके की तरह है। बता दें कि तुर्की के विदेश मंत्री समझौते की तुलना नाटो के अनुच्छेद 5 से की है। जिसके तहत रक्षा समझौते को लागू करने की शर्तें बेहद स्पष्ट हैं। जिसमें किसी सदस्य देश पर हमला होने पर अपने से ही तीनों देशों की सेनाएं युद्ध में नहीं उतरेंगी। इसके लिए पीड़ित देश को औपचारिक रूप से मदद का अनुरोध करना होगा। खतरे के पैमाने और प्रकृति के आधार पर सहायता का दायरा तय होगा। इसमें खुफिया जानकारी साझा करना और लॉजिस्टिक्स मदद या जरूरत पड़ने पर सैन्य टुकड़ियों की तैनाती शामिल हो सकती है।