जन प्रवाद, ब्यूरो।
पीटीआई, भाषा। ईरान और अमेरिका का युद्ध अगर लंबे समय तक चला तो भारत सहित पूरी दुनिया पर तेल का बड़ा संकट आ सकता है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक मार्च में स्ट्रेट आॅफ होर्मुज पर तेल टैंकर की आवाजाही में 75 प्रतिशत से ज्यादा कमी देखी गई है। यही नहीं जलमार्ग पर सैकड़ों टैंकरों का लंबा जाम लगा हुआ है। खास बात यह है कि यह घटनाक्रम ऐसे समय पर हो रहा है, जब ईरान रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स ने स्ट्रेट बंद करने का ऐलान किया है। यही नहीं यहां गुजरने वाले टैंकरों में आग लगाने की भी धमकी दी है। बताया जा रहा है कि करीब 706 टन ईंधन टैंकर स्ट्रेट के दोनों तरफ फंसे हुए हैं। इनमें 334 क्रूड ले जा रहे हैं, जबकि 109 डर्टी प्रोडक्ट टैंकर हैं और 263 क्लीन प्रोडक्ट जहाज हैं।

पीटीआई भाषा के मुताबिक ऊर्जा विश्लेषक कंपनी रिस्टैड एनर्जी का कहना है कि प्रतिदिन लगभग 1.5 करोड़ बैरल यानी वैश्विक आपूर्ति का करीब 20 प्रतिशत कच्चा तेल होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है। यह तेल मार्ग विश्व का सबसे अहम संकरे रणनीतिक मार्ग के रूप में जाना जाता है। होर्मुज जलडमरूमध्य के उत्तर में ईरान और इस रास्ते से सऊदी अरब, कुवैत, इराक, कतर, बहरीन, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और ईरान का तेल एवं गैस का यहां से निर्यात होता है।
जानकारों की मानें तो ईरान और अमेरिका युद्ध के चलते कच्चे तेल की आपूर्ति बाधित होगी। यह भी हो सकता है कि इस दौरान तेल की आपूर्ति पूरी तरह से बंद रहे। फारस की खाड़ी के संकरे मार्ग स्ट्रेट आॅफ होर्मुज से गुजर रहे जहाजों पर हमले के कारण वैश्विक आपूर्ति क्षमता प्रभावित हुई है। विशेषज्ञों की मानें तो पश्चिम एशिया में हमले लंबे समय तक जारी रहे तो कच्चे तेल और पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बेहतासा वृद्धि होगी।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार कमांडर इन चीफ के सलाहकार इब्राहीम जबारी ने स्पष्ट कर दिया है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद कर दिया जाएगा। अगर कोई भी गुजरने की कोशिश करेगा तो तैराकी करना पड़ेगा और नौसेना उन जहाजों को आगे बढ़ने से रोक देगी। बता दें कि तेल व्यापार की कुल खपत का करीब 20 प्रतिशत हिस्सा स्ट्रेट आॅफ होर्मुज से होकर गुजरता है।
भारतीय पेट्रोलियम मंत्रालय की ओर से सोमवार को कहा गया कि वह पूरी तरह से इस पर नजर रखे हुए है। देश में प्रमुख पेट्रोलियम उत्पादों की उपलब्धता तथा किफायती दरों को सुनिश्चित करने के लिए जरूरी कदम उठाया जाएगा। बता दें कि पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने मंत्रालय के अधिकारियों और कंपनियों के पदाधिकारियों के साथ कच्चे तेल, एलपीजी और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति की स्थिति की समीक्षा की थी। अब देखने की बात होगी कि युद्ध की स्थिति क्या रहती है। यह तो तय है कि अगर युद्ध लंबा खिंचा तो तेल आपूर्ति बाधित होगी जिससे पेट्रोलियम की कमी के कारण महंगाई भी बढ़ सकती है।





