अराजक हुआ कॉकरोच जनता पार्टी का आंदोलन, हिंसा ने खड़े किए विरोध-प्रदर्शन पर सवाल

जनप्रवाद ब्यूरो, नोएडा। नीट परीक्षा में कथित गड़बड़ियों को लेकर शुरू हुआ कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन को लेकर बेहद चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार यह आंदोलन अचानक हिंसक हो उठा। इसके पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं। इस हिंसा में 118 से ज्यादा पुलिसकर्मी घायल हुए जबकि करीब 60 प्रदर्शनकारी भी जख्मी हुए।  दूसरी ओर किसानों ने भी आंदोलन का ऐलान कर दिया है।
संसद चलो मार्च के दौरान हुई भारी हिंसा 

कॉकरोच जनता पार्टी के संसद चलो मार्च के दौरान हुई भारी हिंसा के बाद दिल्ली पुलिस ने कार्रवाई शुरू कर दी है। प्रदर्शन के दौरान हुए पथराव और तोड़फोड़ को लेकर पुलिस ने दिल्ली के दो अलग-अलग थानों- कनॉट प्लेस और पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन में उपद्रवियों के खिलाफ केस दर्ज किया है। बता दें प्रदर्शनकारियों ने सभी चेतावनियों और निदेर्शों को नजरअंदाज करते हुए इलाके में लगी बीएनएस की धारा 163 का उल्लंघन किया। प्रदर्शनकारियों के पथराव और झड़प में 118 से ज्यादा पुलिसकर्मी घायल हो गए। घायलों में स्पेशल सीपी, जॉइंट सीपी, एडिशनल सीपी, डीसीपी, एडिशनल डीसीपी और एसीपी स्तर के कई वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ कई महिला पुलिसकर्मी भी शामिल हैं। यहां सबसे चिंता की बात यह है कि छात्रों को लेकर शुरू हुआ आंदोलन हिंसक क्यों हो उठा। मीडिया रिपोर्टों में इसके पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं।
संसद मार्च का आंदोलन भीड़ में तब्दील 
मीडिया रिपोर्टों की माने तो नई दिल्ली के जंतर मंतर से निकलते ही संसद मार्च का आंदोलन भीड़ में तब्दील हो गया। इसके बाद इनका न कोई नेता रहा और न ही किसी के निर्देश पर वहां पहुंचे। सहूलियत के हिसाब से प्रदर्शनकारी आगे बढ़ते रहे। जिसको जिस दिशा में खुला रास्ता में दिखा, वह उसी दिशा में चले गए। वहीं, सबसे बड़ा समूह संसद मार्ग की तरफ बढ़ता रहा। भारी भीड़ के बीच यह लोग एक के बाद बैरीकेड लांघते हुए यह संसद भवन की दहलीज तक जा पहुंचे। इस दौरान जगह-जगह पर इनकी पुलिस के साथ झड़प भी हुई। लाठीचार्ज, पत्थरबाजी व आंसू गैस के गोले भी चले। जानकारों का मानना है कि पहले से कमजोर संगठनात्मक तैयारी ने अव्यवस्था बढ़ा दी। नेतृत्व के स्तर पर बड़ी संख्या में संसद मार्च के लिए जुटे प्रदर्शनकारियों के बीच तालमेल बिठाने का कोई पुख्ता इंतजाम नहीं था। सोशल मीडिया से जन्मी कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन में एक बार इंटरनेट बंद होने से धराशायी हो गई। यहां तक कि मोबाइल से आंदोलन का बुनियादी संदेश तक पहुंचा पाना नेताओं के लिए मुमकिन नहीं हुआ। 
बेहद चौंकाने वाली है मीडिया रिपोर्ट 
दूसरी मीडिया रिपोर्ट बेहद चौंकाने वाली है। प्रदर्शन के दौरान सड़क पर उतरे लोगों में वास्तविक छात्रों से ज्यादा बाहरी चेहरे नजर आए, जिनमें जोमैटो के डिलीवरी बॉय से लेकर ट्रक ड्राइवर और दिहाड़ी मजदूर तक शामिल थे। अब केंद्र और दिल्ली सरकार ने इस संदिग्ध भीड़ की जांच शुरू कर दी है। सीसीटीवी और ड्रोन फुटेज खंगालकर यह पता लगाया जा रहा है कि क्या इन लोगों को किसी सोची-समझी साजिश के तहत दिल्ली बुलाया गया था। सरकारी सूत्रों के अनुसार, जांच का सबसे बड़ा सवाल यह है कि प्रदर्शन में बड़ी संख्या में शामिल ऐसे लोगों का उद्देश्य क्या था, जिनका नीट परीक्षा से प्रत्यक्ष संबंध नहीं था। यह भी पता लगाया जाएगा कि क्या इन्हें किसी खास मकसद से दिल्ली बुलाया गया था और इनके पीछे कौन लोग थै।   रेलवे, ट्रांसपोर्ट विभाग से मिले आंकड़ों से ये भी पता चला है कि भीड़ का बड़ा हिस्सा पश्चिमी उत्तर प्रदेश, हरियाणा और पंजाब से आया था। इस आंदोलन में कुछ ऐसे बच्चे भी शामिल हुए जिनको इस आंदोलन का उद्देश तक पता नहीं था। मीडियो रिपोर्टों के अनुसार इनमें से अधिकतर ने परिजनों से झूठ बोलकर दिल्ली की राह पकड़ी। इन लोगों ने यहां आने के लिए व्हाट्सएप ग्रुप और अपने-अपने नेटवर्क का सहारा लिया। सीजेपी के प्रदर्शन में शामिल कई लोगों के मुद्दे सीजेपी की मांगों से अलग रहे। इनमें से कोई जम्मू में 370 के खिलाफ तो कोई पुलिस की बर्बरता की शिकायत लेकर यहां पहुंचा। प्रदर्शन में शामिल युवतियां काफी गुस्से में नजर आईं।
किसान भी पहुंच रहें शंभू बॉर्डर 
पंजाब के किसान भारत-अमेरिका मुक्त व्यापार समझौते के खिलाफ आज शंभू बॉर्डर से दिल्ली कूच कर रहे हैं। देश बचाओ मोर्चा के आह्वान पर अमृतसर और गुरदासपुर से किसानों का काफिला बॉर्डर पहुंच रहा है। किसानों की मांग है कि प्रस्तावित एफटीए को रद्द किया जाए। इसको लेकर शंभु बॉर्डर के आसपास के इलाके में धारा 163 लागू की गई है और भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। इन सब के बीच भारतीय किसान यूनियन (चढ़ूनी) के प्रमुख गुरनाम सिंह चढ़ूनी को किसान महापंचायत में शामिल होने के लिए जाते समय हरियाणा पुलिस ने हिरासत में ले लिया।