नीट पेपर लीक के मुद्दे पर पीएम मोदी ने दिया बड़ा बयान, संसद से सड़क तक संग्राम जारी

जनप्रवाद ब्यूरो, नोएडा। नीट पेपर लीक के मुद्दे पर जंतर-मतंर पर शुरू हुआ आंदोलन अब राजनीतिक हो चुका है। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रही सीजेपी की मुहिम भारत ही नहीं विदेशों तक फैल रही है। इसी बीच अब पहली बार पीएम मोदी ने इस मुद्दे पर देश की जनता के सामने अपनी राय रखी। वहीं इस पेपर लीक मुद्दे पर हमलावर राहुल गांधी ने भी अपना स्टैंड अब साफ कर दिया है। आंदोलन से जुड़े हर मुद्दे को जानने के लिए देखिए ये खास वीडियो।
राजनीतिक अखाड़ा बना आंदोलन

नीट पेपर लीक मामला अब छात्र आंदोलन से हटकर राजनीतिक अखाड़ा बन चुका है। इस मुद्दे को लेकर संसद के चालू मॉनसून सत्र के चौथे दिन संसद परिसर में सत्तापक्ष और विपक्ष के सांसद आमने-सामने आ गए। नीट पेपर लीक और छात्रों के प्रोटेस्ट पर लाठीचार्ज को लेकर दोनों पक्ष के सांसदों ने संसद परिसर में प्रदर्शन किया। विपक्ष दोनों सदनों में स्थगन प्रस्ताव के तहत इस विषय पर चर्चा चाहता है। हंगामे के कारण दोनों सदनों की कार्यवाही शुरू होते ही 12 बजे तक के लिए स्थगित करनी पड़ी। दूसरी ओर संसद की कार्यवाही शुरू होने से पहले पीएम मोदी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर लिखा कि देश के युवाओं का हित और उनका भविष्य हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। पीएम मोदी ने लिखा कि पेपर लीक के सभी मामलों में दोषियों को जल्द से जल्द कठोर दंड देने, मामलों के त्वरित निस्तारण के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट्स का गठन किया जाएगा। उन्होंने बताया कि इस संबंध में संबंधित विभागों और अधिकारियों को जरूरी कदम उठाने के निर्देश दे दिए गए हैं। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा, युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। इसी तरह सरकार की ओर से केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस मुद्दे पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि युवाओं का हित और उनका उज्ज्वल भविष्य मोदी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता और संकल्प भी है। प्रधानमंत्री जी द्वारा फास्ट ट्रैक कोर्ट्स के गठन से पेपर लीक के मामलों में दोषियों के खिलाफ त्वरित सुनवाई और कठोर कार्रवाई का निर्णय इसी का प्रतिबिंब है। 
विपक्ष के रुख में नरमी नहीं 


वहीं पीएम मोदी के ऐलान के बावजूद विपक्ष के रुख में कोई नरमी नहीं आई है। विपक्ष धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर अड़ा हुआ है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने पीएम मोदी के बयान पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने प्रधानमंत्री को रिपोस्ट करते हुए लिखा कि आपने ही हमारे युवाओं के भविष्य को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया है। आपने न सिर्फ हमारी शिक्षा प्रणाली पर पूरा कब्जा होने और उसे बर्बाद होने दिया, उसे बढ़ावा भी दिया । इसके जिम्मेदार हर व्यक्ति को संरक्षण दिया। उन्होंने तीन मांगे उठाई। इसमें धर्मेंद्र प्रधान को पद से हटाने, छात्रों से माफी और  छात्रों के साथ हिंसा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। इसी तरह कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने केंद्र सरकार से प्रदर्शन कर रहे छात्रों की बात सुनने और उनसे बातचीत करने की अपील की। उन्होंने कहा कि छात्रों का व्यवस्था से भरोसा उठ गया है। उन्होंने आगे कहा, समाधान तभी निकलेगा, जब आप छात्रों की मांगें मानेंगे। आप कहते हैं कि आपको छात्रों पर भरोसा है, लेकिन उन्हीं पर लाठीचार्ज किया गया। 
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग 


उधर, नीट पेपर लीक मामले में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर सड़क से संसद तक जारी और तेज हो गया। दिल्ली में जंतर-मंतर पर सीजेपी के विरोध-प्रदर्शन के दौरान दो जगह हुए पथराव में दो सहायक पुलिस आयुक्तों (एसीपी) समेत छह पुलिसकर्मी चोटिल हो गए। प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए पुलिस व आरएएफ ने आंसू गैस के गोले दागे और लाठीचार्ज किया। कई प्रदर्शनकारी भी घायल हुए हैं। 
बुधवार की रात मौके पर भारी पुलिस बल बुला लिया गया। जंतर-मंतर व आसपास की सड़कों पर भारी संख्या में प्रदर्शनकारी मौजूद हैं। इस बीच, दिल्ली से शुरू हुआ आंदोलन अब अन्य शहरों में भी फैल गया है। बुधवार को पटना, जयपुर, चेन्नई, अहमदाबाद, तिरुवनंतपुरम व मुंबई समेत देशभर में छात्रों ने कई जगह प्रदर्शन किए और प्रधान के इस्तीफे की मांग की। इसके अलावा वांगचुक के समर्थन में अमेरिकी मानवाधिकार संगठन, हिंदूज फॉर ह्यूमन राइट्स ने न्यूयॉर्क में एकजुटता का प्रदर्शन किया। इसी तरह लंदन में भारतीय उच्चायोग और डब्लिन में भारतीय दूतावास के बाहर भी ऐसे ही प्रदर्शन आयोजित किए गए थे।
सोनम वांगचुक की अपील


25 दिन से अनशन कर रहे सोनम वांगचुक ने सोशल मीडिया पर लिखा कि अगर आंदोलन करने वाले युवाओं पर दर्ज मुकदमे वापस लिए जाते हैं तो वे प्रदर्शनकारियों से अपील करेंगे कि अपने आंदोलन को अभी के लिए टाल दें। सरकार से बात शुरू करें। इससे पता चलता है कि सोनम वांगचुक के बयान में नरमी दिखने लगी है। बता दें कि यह नरमी तब आई जब दो केंद्रीय मंत्रियों के मेदांता अस्पताल जाकर वांगचुक से मुलाकात की थी। वहीं कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी ने कहा है कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा होगा तभी आंदोलन वापस लेंगे। जिन छात्रों ने जिंदगी समाप्त की है उन्हें एक करोड़ का मुआवजा दिया जाए। कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने कहा अगर किसान आंदोलन एक साल तक चल सकता है तो उनका आंदोलन भी बिना जीत हासिल किए समाप्त नहीं होगा। उन्होंने कहा कि पुलिस हिंसा में शामिल सभी पुलिस अधिकारियों को सजा दी जाए तभी आंदोलन वापस लेंगे।