मंगल ग्रह पर मिला खास केमिकलए अब मंगल ग्रह पर जीवन संभावना

जनप्रवाद ब्यूरो टीम। मंगल ग्रह पर दशकों से जीवन की तलाश चल रही है। अब नासा के वैज्ञानिकों को इस लाल ग्रह पर ऐसा केमिकल मिला है जो जीवन को जन्म देता है। यह खोज अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी के क्यूरियोसिटी रोवर से की गई है।
मंगल की सहत का बारीकी से अध्ययन

अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा पिछले कई बरसों से नहीं बल्कि दशकों से मंगल की सहत का बारीकी से अध्ययन कर रही है। इस कोशिश में नासा अब तक 6 रोवर को मंगल की सतह पर उतार चुकी है। इन रोवर्स ने मंगल की सतह के बारे में वैज्ञानिकों को कई अहम जानकारियां दी हैं। सोलर पॉवर से चलने वाले ये रोवर मंगल की कई अद्भुत तस्वीरें धरती पर मौजूद साइंटिस्ट्स तक पहुंचा चुके हैं। नासा के वैज्ञानिक भी इन तस्वीरों को बड़ी बारीकी से खंगालते रहे हैं। अब नासा का रोवर क्यूरियोसिटी मंगल के गेडिज वैली चैनल में एक चट्टान पर चढ़ा और उसे कुचल दिया। इसके बाद इस चट्टान से हैरान करने वाला खुलासा हुआ। रोवर ने जो तस्वीरें भेजी उसमें पाया गया कि उसके अंदर से पीले क्रिस्टल निकले, जो शुद्ध सल्फर के थे। बता दें कि इससे पहले परसीवरेंस रोवर ने भी मंगल पर सल्फेट खोजे थे लेकिन शुद्ध सल्फर पहली बार मिला है। साथ ही आसपास कई ऐसी चट्टानें मिली हैं जिसमें यह तत्व पाया गया। यह खोज इतनी हैरान करने वाली है कि वैज्ञानिक इसे रेगिस्तान में ओएसिस जैसा बता रहे हैं।
899 किलो वजन वाला रोवर

बता दें कि 899 किलो वजन वाला यह रोवर काफी समय से मंगल पर सकिय है। यह चट्टान गेडिज वैली चैनल नामक जगह पर मिली है। वैज्ञानिकों के अनुसार यह जगह मंगल पर एक पुरानी नदी का चैनल है। जहां अरबों साल पहले पानी बहता था। रोवर जब इस चैनल में आगे बढ़ रहा था, तब उसने इस चट्टान को कुचल दिया। वैज्ञानिकों ने देखा कि आसपास कई ऐसी ही चट्टानें पड़ी हैं, जो बाहर से सामान्य लगती हैं लेकिन अंदर शुद्ध सल्फर मौजूद है।
मंगल पर घुलने वाले सल्फर

बता दें कि सल्फेट वो नमक है जो पानी में घुलने वाले सल्फर से बनते हैं। जब पानी सूख जाता है तो ये सल्फेट पीछे रह जाते हैं। मंगल पर पानी के इतिहास को समझने के लिए सल्फेट बहुत मदद करते हैं। शुद्ध सल्फर बनने के लिए बहुत खास परिस्थितियां चाहिए। वैज्ञानिकों को इस क्षेत्र में ऐसी परिस्थितियां नहीं दिखतीं फिर भी सल्फर के इतने बड़े-बड़े टुकड़े सतह पर पड़े हैं। इसका मतलब है कि मंगल के भूवैज्ञानिक इतिहास में कुछ बहुत बड़ा रहस्य छिपा है, जिसे वैज्ञानिक अभी तक नहीं जान पाए थे। बता दें कि सल्फर जीवन के लिए जरूरी तत्व है, यह दो जरूरी अमीनो एसिड बनाने में काम आता है। यह प्रोटीन के निर्माण के लिए भी आवश्यक है। ऐसे में यह जीवन की संभावना की दिशा में बेहद अहम कदम साबित हो सकता है।  
अन्य मिशनों में भी पानी की खोज

देखा जाए तो मंगल पर चल रहे अन्य मिशनों में भी पानी, रसायन और जीवन के लिए उपयोगी चीजें बार-बार मिल रही हैं। इससे यह साबित होता है कि मंगल कभी जीवन के लिए उपयुक्त रहा होगा। नासा के वैज्ञानिकों के अनुसार क्यूरियोसिटी रोवर ने 42 जगहों पर छेद करके केमिकल एनालिसिस किया है। क्यूरियोसिटी के पास इतने शक्तिशाली उपकरण हैं कि वह चट्टानों का विश्लेषण कर सकता है। अगर रोवर उस चट्टान पर से नहीं गुजरता और उसे कुचलता नहीं तो शायद बहुत समय तक शुद्ध सल्फर का पता नहीं चलता। अब वैज्ञानिक मॉडलिंग करके समझने की कोशिश कर रहे हैं कि यह सल्फर मंगल पर कैसे पहुंचा। वैज्ञानिकों के अनुसार यह खोज मंगल को समझने की दिशा में एक नया अध्याय खोल देगी। क्यूरियोसिटी जैसे रोवर हमें दिखा रहे हैं कि मंगल सिर्फ लाल रेगिस्तान नहीं है, बल्कि वहां भी रसायनों और खनिजों का पुराना इतिहास है। वैज्ञानिक अब इस रहस्य को सुलझाने में जुटे हैं कि शुद्ध सल्फर का ऐसा बड़ा भंडार वहां कैसे बना।