जनप्रवाद ब्यूरो, नोएडा। ब्रह्मांड का राक्षस कहे जाने वाले सुपरमैसिव ब्लैक होल को लेकर वैज्ञानिकों ने ऐसा राज खोला है जिससे आज तक दुनिया अनजान थी। जेम्स वेब टेलीस्कोप में यह देखा गया कि ब्लैक होल अपना खाना कैसे खाते हैं। साथ ही यह भी देखा कि यह दैत्य अपना शिकार कैसे करता है। अब इस रहस्य से भी पर्दा उठ गया है कि ब्लैक होल इतनी तेजी से कैसे बड़े हो जाते हैं।
हमारा ब्रह्मांड रहस्यों का घर

हमारा ब्रह्मांड रहस्यों का घर है। इसके बारे में जितनी खोज की जाती है उतने ही रहस्य बाहर आ जाते हैं। ऐसे में यह समझा जा सकता है कि अंतरिक्ष ऐसा क्षेत्र है, जहां जितनी शोध की जाए उतनी ही कम पड़ जाती है। जब वैज्ञानिक एक शोध पूरा करते हैं तो उन्हें दूसरे शोध की आवश्यकता पड़ जाती है। यानी अध्ययन दर अध्ययन का यह सिलसिला जारी ही रहता है। अब इसी क्रम में वैज्ञानिकों ने गैलेक्सी में स्थित एक ब्लैक होल का सबसे खतरनाक राज खोल दिया है। वैज्ञानिकों ने पहली बार देखा कि सुपरमैसिव ब्लैक होल अपना भोजन कैसे ग्रहण करते हैं। बता दें कि यह एक ऐसी गुत्थी थी जिसने दशकों से अंतरिक्ष वैज्ञानिकों को परेशान कर रखा था। आमतौर पर यह माना जाता है कि ब्लैक होल हमेशा अपने आसपास मौजूद गैस और धूल को निगलते रहते हैं। इसी डाइट की वजह से उनका आकार सूरज से अरबों गुना बड़ा हो जाता है। शुरुआती ब्रह्मांड में ब्लैक होल इतनी तेजी से कैसे बड़े हुए, यह सवाल हमेशा उठता रहा है। अब जेम्स वेब टेलीस्कोप की मदद से हुई नई रिसर्च ने इस रहस्य से पूरी तरह पर्दा उठ गया है।
ब्लैक होल को लेकर बड़ी जानकारी

वैज्ञानिकों ने अपने नए अध्ययन में पाया कि ब्लैक होल अपना भोजन प्राप्त करने के लिए फास्टिंग और फीस्टिंग के एक खास साइकिल का इस्तेमाल करते हैं। इसी सेल्फ-रेगुलेटिंग साइकिल की वजह से यह दैत्याकार रूप लेते हैं। बता दें कि हर बड़ी गैलेक्सी के बीच में एक सुपरमैसिव ब्लैक होल मौजूद होता है। इनमें से कुछ ब्लैक होल बहुत शांत होते हैं। यह अपने आसपास मौजूद गैस और धूल को बहुत कम मात्रा में खाते हैं। कुछ ब्लैक होल बहुत ज्यादा भूखे होते हैं। ये तेजी से गैस को निगलते हैं। साथ ही एक्टिव गैलेक्टिक न्यूक्लिआई के रूप में काम करते हैं। जब ये ब्लैक होल खाना खाते हैं तो शक्तिशाली जेट्स के जरिए गैस को बाहर फेंकते हैं। इस गैस से ही नए तारों का जन्म होता है। माना जा रहा है कि जेट्स से बाहर निकली गैस ठंडी होकर वापस ब्लैक होल में आ जाती है।
जेम्स वेब टेलीस्कोप की मदद

वैज्ञानिकों ने इस बड़े रहस्स को सुलझाने के लिए जेम्स वेब टेलीस्कोप की मदद ली। इसका रुख सेंटोरस क्लस्टर की तरफ किया गया। इस क्लस्टर के बीच में एनजीसी 4696 नाम की एक विशाल गैलेक्सी मिली। यह गैलेक्सी हमारी धरती से करीब 145 मिलियन लाइट-ईयर्स की दूरी पर स्थित है। बता दें कि इससे पहले भी हबल स्पेस टेलीस्कोप ने इस गैलेक्सी को करीब से देखा था। तब वहां गैस का एक हुक के आकार का रहस्यमयी भंवर नजर आया था। जेम्स वेब टेलीस्कोप ने इसी भंवर का बहुत बारीकी से अध्ययन किया। यह हुक के आकार का भंवर करीब 800 प्रकाश वर्ष यानी इसकी चौड़ाई सूर्य से कहीं ज्यादा है। इसके अंदर की गैस बहुत तेज रफ्तार से लगातार घूम रही है। इसकी स्पीड 600 किलोमीटर प्रति सेकंड आंकी गई है। यह घूमती हुई गैस असल में एक बड़े फिलामेंट से सीधे जुड़ी हुई है। फिलामेंट का मतलब गैस की एक लंबी और पतली धारा होता है। यह गैस धीरे-धीरे ठंडी होती है और फिलामेंट्स का रूप ले लेती है। यही ठंडी गैस वापस गैलेक्सी के केंद्र में गिरती है और ब्लैक होल के चारों तरफ एक डिस्क बना लेती है। यह डिस्क दोबारा ब्लैक होल को भोजन देने लगती है और उसके विकास का नया दौर शुरू हो जाता है। ब्लैक होल इन गैसों और तारों को फिर से खाना शुरू कर देता है। यानी पहले ब्लैकहोल सारी गैस और तारों को खा लेता है। इसके बाद वह गैस को बाहर फेंकता है। इससे तारों का जन्म होता है। तारों के जन्म के बाद ब्लैकहोल फिर से तारों और गैसों को निगलने लगता है। ऐसे में यह समझा जा सकता है कि इस प्रक्रिया में दावत और उपवास का एक अनोखा चक्र चलता रहता है।





