जन प्रवाद, ब्यूरो।
बिहार। बिहार की राजनीति में इन दिनों बड़ा बदलाव होने से चर्चाओं का बाजार गरम है। नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के बाद अगला सीएम कौन होगा, इस पर लोग तरह-तरह की कयासबाजी लगा रहे हैं। 1980 के दशक से अब तक बिहार की राजनीति पर जेपी आंदोलन से निकले नेताओं का गहरा असर था।इस तिकड़ी में लालू यादव, नीतीश कुमार और रामविलास पासवान शामिल रहे। फिलहाल, रामविलास पासवान अब इस दुनिया में नहीं हैं और लालू यादव का स्वास्थ्य भी ठीक नहीं रहता है। उन्होंने राजनीति की कमान अपने बेटे तेजस्वी यादव को सौंप दी है। वहीं नीतीश कुमार पिछले दो दशकों से लगातार मुख्यमंत्री रहे हैं। अब नीतीश कुमार ने राज्यसभा की ओर रुख करने का निर्णय लिया है।
बता दें कि पुराने नेताओं में इस तिकड़ी के अलावा सुशील मोदी भी बड़ा चेहरा थे। उन्हें नीतीश कुमार का बहुत करीबी भी माना जाता है। वे पूर्व में डिप्टी सीएम भी रहे थे। फिलहाल, वे भी अब इस दुनिया में नहीं हैं। बताया जा रहा है कि नया सीएम भाजपा का होगा। अभी तक भाजपा ने अपने पत्ते नहीं खोले हैं। संभवता भाजपा को वहां के जातीय समीकरण को देखते हुए ही निर्णय लेना होगा।

बता दें कि शराबबंदी और दीपिका दीदी जैसी योजनाओं से नीतीश कुमार ने महिलाओं के बीच पैठ बनाई। नीतीश कुमार की जब भी बात होती है तो उससे पहले के 15 सालों के लालू यादव के शासन की चर्चा होती है। इसी वजह से नीतीश कुमार ने कानून व्यवस्था, शिक्षा व्यवस्था, महिला सुरक्षा और योजनाओं को लेकर अपनी छवि बनाई।





