ड्रोन सुरक्षा को और ज्यादा मजबूत करने की दिशा में बड़ी उपलब्धि, भार्गवास्त्र का सफल प्रयोग

जनप्रवाद ब्यूरो, नई दिल्ली। भारतीय सेना ने अपनी ड्रोन सुरक्षा को और ज्यादा मजबूत करने की दिशा में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। सोलर इंडस्ट्रीज द्वारा विकसित स्वदेशी भार्गवास्त्र काउंटर-ड्रोन सिस्टम अब अपने अंतिम परीक्षण में आ चुका है। यह सिस्टम दुश्मन के ड्रोन, लॉइटरिंग मुनिशन और खासकर स्वार्म अटैक को खत्म करने के लिए बनाया गया है। यह 10 सेकंड में 64 रॉकेट से हमला कर सकता है। 
40 डिग्री की कड़ाके की ठंड में भी काम

माइनस 40 डिग्री की कड़ाके की ठंड में भी सीमा पर अब रोबोट गश्त करते नजर आएंगे। यह सब सोलर इंडस्ट्रीज द्वारा विकसित स्वदेशी भार्गवास्त्र काउंटर-ड्रोन सिस्टम के जरिए होगा। यह सिस्टम बहुआयामी है। यानी यह कई तरीकों से काम करेगा। दुनिया का सबसे अनोखा एंटी-ड्रोन सिस्टम अगले कुछ ही महीनों में चालू होने की संभावना है। यह विकसित देशों के पास मौजूद सिस्टम से भी अलग और खास होगा। दुश्मन के ड्रोन हमलों को नाकाम करने के लिए इससे एक साथ 64 छोटी लेकिन अचूक मिसाइलें दागी जा सकेंगी। अब भारतीय सेना ने इस भार्गवास्त्र ड्रोन सुरक्षा को और ज्यादा मजबूत करने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। सोलर इंडस्ट्रीज द्वारा विकसित स्वदेशी भार्गवास्त्र काउंटर-ड्रोन सिस्टम अब अपने अंतिम परीक्षण में है। सेना के अनुसार सभी परीक्षण दिसंबर 2026 तक पूरा होने की उम्मीद है। यह सिस्टम दुश्मन के ड्रोन, लॉइटरिंग मुनिशन और खासकर स्वार्म अटैक को खत्म करने के लिए बनाई गई है।
भौगोलिक परिस्थतियों का रखेगा ध्यान


भार्गवास्त्र को भारत की अलग-अलग भौगोलिक परिस्थतियों को ध्यान में रखकर ही डिजाइन किया गया है। यह रेगिस्तान, मैदानी इलाकों और 5000 मीटर तक की ऊंचाई वाले पहाड़ी क्षेत्रों में भी ठीक तरीके से काम करता है। यह क्षमता इसे सीमा सुरक्षा, महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों और रणनीतिक स्थानों की सुरक्षा के लिए बेस्ट बनाती है। बता दें कि भार्गवास्त्र एक लेयर्ड हार्ड-किल इंटरसेप्शन आर्किटेक्चर पर काम करता है। इसमें एक सिंगल लॉन्चर में 64 माइक्रो-रॉकेट्स या मिसाइलें लगाई जा सकती हैं। पूरा सैलवो यानी यानी सभी हथियार एक साथ सिर्फ 10 सेकंड में दागे जा सकते हैं। यह क्षमता इसे ड्रोन स्वार्म हमलों के खिलाफ बेहद प्रभावी बनाती है। सिस्टम मध्यम और बड़े यूएवी को 10 किलोमीटर दूर से और छोटे ड्रोन को 6 किलोमीटर से ज्यादा दूरी पर डिटेक्ट कर सकता है। भार्गवास्त्र में दो प्रकार के हथियार लगे हैं। स्वार्म हमलों को रोकने के लिए अनगाइडेड माइक्रो-रॉकेट्स का इस्तेमाल किया जाता है, जो बहुत बड़े क्षेत्र को भी कवर करते हैं। वहीं सटीक हमले के लिए गाइडेड माइक्रो-मिसाइल्स का उपयोग होता है, जो अपने टारगेट पर सीधा और सटीक हमला करता है। यह हिट-टू-किल तकनीक पर काम करता है। सिस्टम को सी-4 क नेटवर्क के साथ जोड़ा गया है और इसमें ईओ/आईआर सेंसर लगे हैं, जो दिन रात किसी भी मौमस में काम कर सकते हैं।
ड्रोन और स्वार्म अटैक सबसे बड़ी चुनौती 

आज के दौर में चल रहे युद्ध में ड्रोन और स्वार्म अटैक सबसे बड़ी चुनौती बन गए हैं। कोई भी एयर डिफेंस सिस्टम 100 प्रतिशत सुरक्षा नहीं दे सकता है। ऐसे में भार्गवास्त्र जैसे सिस्टम महत्वपूर्ण संपत्तियों के चारों ओर घना ओवरलैपिंग कवच तैयार करते हैं। महत्वपूर्ण क्षेत्रों में 4-6 भार्गवास्त्र सिस्टम तैनात करने से दुश्मन के सैचुरेशन अटैक को रोकना आसान हो जाएगा। वहीं, दूसरी तरफ अन्य डिफेंस सिस्टम की लागत ज्यादा आती है। यह सिस्टम भारत को स्वदेशी एंटी-ड्रोन शील्ड विकसित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। पूरी तरह भारतीय कंपनियों द्वारा विकसित भार्गवास्त्र न सिर्फ सेना की लड़ाकू क्षमता बढ़ाएगा बल्कि विदेशी तकनीक पर निर्भरता भी कम करेगा। अंतिम परीक्षण सफल होने के बाद भारतीय सेना में इसका शीघ्र शामिल होना भारत की रक्षा क्षमता को नई ऊंचाई देगा। साथ ही ड्रोन युद्ध के इस नए युग में भार्गवास्त्र जैसे स्वदेशी हथियार भारत को मजबूत सुरक्षा कवच प्रदान करेगा।