जनप्रवाद ब्यूरो, नई दिल्ली। मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार ने मंगलवार को कहा कि पश्चिम बंगाल में किसी भी पात्र मतदाता का नाम मतदाता सूची से नहीं हटाया जाएगा और उसकी प्राथमिकता राज्य में स्वतंत्र, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव सुनिश्चित करना है। राजनीतिक दलों और अधिकारियों के साथ कई बैठकों के बाद कोलकाता में संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कुमार ने कहा कि पश्चिम बंगाल की जनता का हमेशा से शांतिपूर्ण और भागीदारी वाले लोकतंत्र में विश्वास रहा है। उन्होंने कहा, हमारा लक्ष्य बंगाल में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव तथा शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करना है। मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने इस बात पर भी जोर दिया कि प्रत्येक पात्र मतदाता को अपना मत डालने का अवसर मिलेगा। कुमार ने कहा, किसी भी पात्र मतदाता का नाम नहीं हटाया जाएगा। राज्य में चुनावी प्रक्रिया के व्यापक स्वरूप को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में लगभग 80,000 मतदेय केंद्र हैं, जिनमें से लगभग 61,000 ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित हैं।
मतदान प्रक्रिया में होगी पारदर्शिता
कुमार ने यह भी घोषणा की कि मतदान प्रक्रिया के दौरान पारदर्शिता बढ़ाने के लिए निर्वाचन आयोग राज्य भर के मतदान केंद्रों पर 100 प्रतिशत वेबकास्टिंग लागू करेगा।
सुप्रीम कोर्ट ने बंगाल सरकार चुनाव आयोग को दियाा निर्देश
]उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को पश्चिम बंगाल सरकार और निर्वाचन आयोग को राज्य में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में न्यायिक अधिकारियों को सभी प्रकार की सहायता प्रदान करने का निर्देश दिया। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति आर महादेवन और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने कहा कि एसआईआर प्रक्रिया में तैनात न्यायिक अधिकारियों ने अब तक मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के 10.16 लाख आपत्तियों और दावों पर सुनवाई की है। पीठ ने निर्वाचन आयोग को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की मंजूरी के बिना कोई भी ऐसा अनिवार्य कदम न उठाया जाए, जिससे एसआईआर प्रक्रिया बाधित हो। पीठ ने कहा कि आयोग के पोर्टल में तकनीकी व्यवधानों की जांच की जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि ऐसी कोई बाधा न उत्पन्न हो। पीठ ने कहा कि न्यायिक अधिकारियों के लिए नये ह्यलॉगिन आईडीह्ण शीघ्र बनाए जाएं, ताकि मतदाता सूचियों में संशोधन की प्रक्रिया सुचारू रूप से सुनिश्चित हो सके। इसने यह भी कहा कि न्यायिक अधिकारियों के निर्णयों की समीक्षा निर्वाचन आयोग के किसी भी प्रशासनिक अधिकारी द्वारा नहीं की जा सकती। शीर्ष अदालत ने कहा कि (कोलकाता) उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश अपीलों पर सुनवाई के लिए पूर्व मुख्य न्यायाधीशों और उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की पीठ गठित कर सकते हैं तथा निर्वाचन आयोग को एसआईआर प्रक्रिया में न्यायिक अधिकारियों के फैसलों के खिलाफ अपीलों पर सुनवाई के लिए एक अपीलीय निकाय गठित करने के लिए अधिसूचना जारी करने का निर्देश दिया। पीठ राज्य में जारी एसआईआर प्रक्रिया से संबंधित कई याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी।





