जनप्रवाद ब्यूरो, टीम। अमेरिकी सुरक्षा पर निर्भर रहने वाले देश अब नया फार्मूला अपना रहे हैं। यह तरीका ‘खुद करो अपनी सुरक्षा न करो दूसरों पर भरोसा’ है। इस दिशा में बड़ा कदम बढ़ाते हुृए जापान समंदर में ऐसा दानव उतारने जा रहा है जिसके सामने रूस, अमेरिकी, चीन समेत सभी देशों के नौसेना के सबसे आधुनिक युद्धपोत भी बौने नजर आएंगे।
मारक क्षमता जानकर सभी हैरान
जापान जिस नौसैनिक जहाज को समंदर में उतारने जा रहा है उसकी खासियत और मारक क्षमता जानकर दुनिया भर के रक्षा विशेषज्ञ हैरान हैं। उनके अनुसार इस तरह का जहाज फिलहाल किसी देश के नहीं है। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार यह समंदर का महादानव कहा जाए तो अतिश्योक्ति नहीं होगी। जापान ने इसकी लांचिंग की तैयारी पूरी कर ली है। इसके सामने अमेरिकी रूस, नौसेना के सबसे आधुनिक युद्धपोत भी बौने नजर आएंगे। यह कोई साधारण जहाज नहीं बल्कि 16,000 टन विस्थापन वाला एक तैरता हुआ किला है। जिसे एजिस प्रणाली से सुसज्जित युद्धपोत नाम दिया गया है। अमेरिका के न्यूजर्सी में इस महाविनाशक जहाज के दिल यानी रडार का परीक्षण पूरा हो चुका है। जिसने दुनिया में खलबली मचा दी है।
लॉकहीड मार्टिन ने किया विकसित
इस खतरनाक युद्धपोत को लॉकहीड मार्टिन द्वारा विकसित किया गया है। इसमें एसपीवाई-7 नाम दिया गया हइै। इसमें दुनिया का सबसे उन्नत रडार ईएएसए लगा है। इसकी सबसे बड़ी ताकत दुश्मन की बैलिस्टिक मिसाइलों और यहां तक कि हाइपरसोनिक खतरों को अंतरिक्ष में ही पहचानकर उन्हें नेस्तनाबूद करना है। इस रडार में चार स्थिर डिजिटल फेस लगे हैं जो बिना घूमे चारों दिशाओं में 360-डिग्री तक नजर रखते हैं। इसकी डिस्क्रिमिनेशन क्षमता इतनी सटीक है कि यह असली मिसाइल और दुश्मन द्वारा छोड़े गए नकली लक्ष्यों के बीच आसानी से अंतर कर सकता है। यह विशालकाय शिकारी जहाज 190 मीटर लंबा है। यह 128 वर्टिकल लांचिंग सेल यानी मिसाइल दागने वाले खांचे से लैस है।
360 डिग्री कवरेज वाला रडार
इसका रडार इसलिए 360 डिग्री कवरेज कर लेता है क्योंकि इसमें चार स्थिर रडार फेस लगे हैं। प्रत्येक रडार 4.3 मीटर ऊंचा है जो बिना घूमे चारों दिशाओं में एक साथ नजर रखने में सक्षम है। यह एक साथ दर्जनों जटिल मिसाइल खतरों, डिकॉय यानी नकली मिसाइल और हाइपरसोनिक खतरों को ट्रैक और उनकी पहचान कर सकता है। यह रडार दुश्मन की मिसाइल के प्रक्षेपवक्र को इतनी सटीकता से मापता है कि इंटरसेप्टर मिसाइल को सटीक निशाना लगाने में मदद मिलती है। इसे सॉफ्टवेयर के जरिए अपडेट किया जा सकता है जिससे भविष्य के नए खतरों जैसे हाइपरसोनिक ग्लाइड वाहन से लड़ने के लिए हार्डवेयर बदलने की जरूरत नहीं होगी। जापान ने इन जहाजों का निर्माण जमीनी मिसाइल डिफेंस के विकल्प के रूप में किया गया है। पहला जहाज 2027 तक और दूसरा जहाज 2028 तक जापानी नौसेना में शामिल हो जाएगा। यह चीन और उत्तर कोरिया की मिसाइल चुनौतियों के खिलाफ जापान की सबसे बड़ी सुरक्षा गारंटी होगी।





