जनप्रवाद ब्यूरो, नई दिल्ली। मंगलवार को नासा के आर्टेमिस-2 मिशन ने इतिहास रच दिया। मिशन के तहत चार अंतरिक्ष यात्रियों ने चंद्रमा की चारों ओर यात्रा की। इस दौरान इंसान ने चांद के उस हिस्से का दीदार किया, जिसे पहले किसी ने नहीं देखा था। इस मिशन ने अपोलो-13 का रिकॉर्ड तोड़ दिया।
माना जा रहा है ऐतिहासिक उपलब्धि
आर्टेमिस-2 मिशन नासा के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि माना जा रहा है। इस मिशन का ओरियन स्पेसक्राफ्ट अब उस डीप स्पेस में प्रवेश कर चुका है, जहां कभी अपोलो मिशन गया था। फिलहाल, क्रू मेंबर बेहद अहम चरण में हैं। यहां वे अंतरिक्ष यान के सिस्टम्स का परीक्षण करते हुए चंद्रमा के दूरस्थ और ऊबड़-खाबड़ हिस्सों को देख रहे हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार इस मिशन ने इंसानों को पृथ्वी से अब तक की सबसे ज्यादा दूरी तक पहुंचा दिया है। इस मिशन ने अपोलो 13 का पुराना रिकॉर्ड भी तोड़ दिया। नासा की तरफ से दी गई जानकारी के अनुसार जैसे ही अंतरिक्ष यात्री चांद के पास पहुंचे, उनके सामने खिड़कियों से चांद का शानदार नजारा दिखाई देने लगा। खास बात यह रही कि इस दौरान उन्हें चांद के उस हिस्से को देखने का मौका मिला, जिसे पहले इंसानों ने कभी इस तरह करीब से नहीं देखा था।
करीब छह घंटे तक चला फ्लाईबाय
यह पूरा फ्लाईबाय करीब छह घंटे तक चला, जो इस मिशन का सबसे अहम हिस्सा माना जा रहा है। इस मिशन में तीन अमेरिकी और एक कनाडाई अंतरिक्ष यात्री शामिल है, जो मिलकर इस ऐतिहासिक यात्रा को अंजाम दे रहे हैं। यह मिशन नासा की उस बड़ी योजना का हिस्सा है, जिसके तहत एक बार फिर इंसानों को चांद पर उतारने की तैयारी की जा रही है। खास तौर पर चांद के साउथ पोल (दक्षिणी ध्रुव) पर अगले दो साल में इंसानों के कदम रखने का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही यह भविष्य में चांद पर स्थायी बेस बनाने की दिशा में पहला बड़ा कदम है। नासा ने बताया कि इस कदम को लेकर एजेंसी का लक्ष्य है कि 2028 तक चांद के दक्षिणी ध्रुव के पास इंसानों की लैंडिंग कराई जाए।
लूनर फ्लाईबाय किया
इस मिशन की एक विशेषता यह भी रही कि इसने लूनर फ्लाईबाय किया है। बता दें कि लूनर फ्लाईबाय तब होता है जब कोई अंतरिक्ष यान चंद्रमा के पास से गुजरता है, लेकिन अपनी गति कम करने और उसकी कक्षा में स्थिर रहने के लिए इंजन नहीं चलाता है। इस क्रम में मिशन चंद्रमा के चारों ओर रुकने के बजाय यह चंद्रमा को एक कॉस्मिक पिवट पॉइंट के रूप में इस्तेमाल कर रहा है। नासा के वैज्ञानिकों के अनुसार यह फ्री-रिटर्न ट्राजेक्टरी की मदद से संभव होता है। यह खगोलीय यांत्रिकी की एक समझदारी भरी तकनीक है, जिसमें अंतरिक्ष यान चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण को एक प्राकृतिक स्लिंगशॉट की तरह उपयोग करता है। इसमें चंद्रमा का शक्तिशाली गुरुत्वाकर्षण एक अदृश्य बंधन की तरह काम करता है। यह कैप्सूल को पकड़ लेता है और उसे दूर की तरफ एक तंग यू-टर्न में घुमा देता है।
वापस लौटने में मदद करेगी गति
मिशन पूरा होेने के बाद यही गति वापस लौटने में मदद करेगी। इस गति के कारण ओरियन को पृथ्वी की ओर वापस धकेल दिया जाएगा। इससे मिशन की वापसी यात्रा शुरू करने के लिए किसी विशाल इंजन को आवश्यकता नहीं होगी। यह मार्ग बेहद सुरक्षित बताया जाता है क्योंकि यह भौतिकी के अपरिवर्तनीय नियमों पर आधारित है। भले ही मुख्य प्रणोदन प्रणाली पूरी तरह विफल हो जाए।





