जन प्रवाद, ब्यूरो।
नई दिल्ली। ऐसा लगता है कि वर्षों पूर्व की गई भविष्यवाणियां सही साबित होने वाली हैं। मध्य पूर्व में जिस तरह की स्थिति बन रही है उससे लगता है कि कोई बड़ा युद्ध होने वाला है। तनाव और संभावित क्षेत्रीय संघर्ष की आशंकाओं के मद्देनजर अमेरिका, ब्रिटेन, चीन और भारत सहित कई देशों ने अपने नागरिकों और दूतावास के कर्मचारियों के लिए एडवाइजरी जारी की है। यह स्थिति तब और गंभीर हो गई है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर संभावित हवाई हमलों को टालने के लिए चल रही कूटनीतिक बातचीत पर निराशा जाहिर की।

ट्रंप का कड़ा रुख और बातचीत की स्थिति
टेक्सास में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि मैं बातचीत से खुश नहीं हूं। बातचीत का सिलसिला बदस्तूर जारी हैं, लेकिन नतीजा सापेक्ष नहीं हो पा रहा है। एक सवाल के जवाब में उन्होंने स्पष्ट जवाब देने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि मैं आपको यह बताना पसंद नहीं करूंगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
बता दें कि हाल ही में हुई अमेरिकी-ईरान वार्ता के बाद, ट्रंप के दूत ब्रायन हुक और उनके दामाद जेरेड कुश्नर के नेतृत्व वाली अमेरिकी वार्ता में निराशा हाथ लगी। अगली तकनीकी बातचीत सोमवार को वियना में होने की संभावना है। वहीं, ईरान और मध्यपूर्व देश ओमान से प्रभावित होकर सकारात्मक संकेत दिए गए हैं। ओमान के विदेश मंत्री यूसुफ अलउसबी ने व्हाइट हाउस में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जैसे नेता से मुलाकात के बाद कहा- शांति हमारी पहुंच में है।
दूतावासों को खाली करने के निर्देश
युद्ध की आशंका के मद्देनजर कई देशों ने एहतियाती कदम उठाए हैं।
अमेरिका ने यरुशलम में अपने गैर आपातकालीन कर्मचारियों को देश छोड़ने की अनुमति दे दी है। अमेरिका को आशंका है कि यदि वह ईरान पर हमला करता है और इजरायल उसमें साथ देता है, तो ईरान इजरायल पर जवाबी कार्रवाई कर सकता है। इससे पहले वाशिंगटन ने बेयरूत (लेबनान) के लिए भी इसी तरह का आदेश जारी किया था। साथ ही भारत, ब्रिटेन, चीन, आॅस्ट्रेलिया, पोलैंड, फिलीपिंस, स्वीडन और सिंगापुर जैसे देशों ने भी अपने नागरिकों और राजनयिकों को मध्य पूर्व के कुछ हिस्से छोड़ने की सलाह दी है।

बता दें कि ब्रिटेन ने घोषणा की है कि वह ईरान से अपने राजनयिक कर्मचारियों को अस्थायी रूप से वापस बुला रहा है। कूटनीतिक रास्ते खुले होने के दावों के बावजूद, अमेरिका मध्य पूर्व में अपनी सैन्य ताकत लगातार बढ़ा रहा है। एक दूसरा अमेरिकी विमानवाहक पोत प्रवेश कर चुका है और वर्तमान में इजरायल लक्ष्यों में तैनात है।
बता दें कि अब तक कई एयरलाइंस ने इजरायल की आंतरिक राजनीतिक स्थिति को देखते हुए अपनी उड़ानें निलंबित कर दी हैं। अमेरिकी दूतावास ने अपने कर्मचारियों के लिए यरुशलम के ओल्ड सिटी और वेस्ट बैंक जैसे क्षेत्रों में यात्रा करने पर रोक लगाने की चेतावनी दी है।





