अमेरिका-ईरान युद्ध होगा और भीषण !

जन प्रवाद, ब्यूरो। 
नई दिल्ली। पीएम मोदी ने कल लोकसभा में कहा था कि देशवासियोें को कोरोना संकट की तरह की धैर्य रखने की आवश्यकता है। यह संकट जल्द खत्म नहीं होगा बल्कि लंबा चलेगा। इसका मतलब साफ है कि युद्ध जल्द रुकने वाला नहीं है और तेल-गैस की समस्या के लिए देशवासियों को तैयार रहने की आवश्यकता है। 
उनके इस बयान के बाद मंगलवार मीडिया रिपोर्ट्स में ऐसी खबरें आनी शुरू हो गई हैं कि अमेरिका-ईरान युद्ध अब और लंबा चलेगा। ऐसा बताया जा रहा है कि इस युद्ध में अब सऊदी अरब और यूएई खुलकर सामने आ गए हैं। हालांकि, इसकी आधिकारिक रूप से पुष्टि नहीं की गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार सऊदी अरब और यूएई ने ईरान युद्ध में शामिल होने के लिए कुछ जरूरी कदम उठाए हैं। ऐसा कहा जा रहा है कि सऊदी अरब ने फायद एयर बेस को भी अमेरिका को देने पर सहमति जता दी है। 
बता दें कि सऊदी अरब लगातार कहता आ रहा है कि उसके एयरबेस का इस्तेमाल पुराने दुश्मन के लिए नहीं किया जा सकता। एसी भी खबरें हैं कि यूएई ने ईरान के मालिकाना हक वाले कुछ अस्पताल और स्कूलों को बंद कर दिया है। ऐसी भी खबरें हैं कि ईरान पर हमले में इस्तेमाल की गई मिसाइलें बहरीन से दागी गई थीं। 


बता दें कि सऊदी अरब ने ईरान के सैन्य अटैची और चार दूतावास कर्मचारियों को देश छोड़ने का आदेश दिया है। सऊदी अरब ने ईरान पर अपनी क्षेत्रीय संप्रभुता के उल्लंघन का आरोप लगाया है। इसके बाद ईरान कूटनीतिक रूप से कमजोर पड़ता दिखाई दे रहा है। वहीं यूएई का कहना है कि उसकी हवाई रक्षा प्रणाली ईरान की ओर से हो रही गोलाबारी को रोकने की कोशिश कर रही है। 


5 दिनों में नहीं होंगे हमले

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने के लिए दी गई समय सीमा बढ़ा दिया है। यह भी कहा गया है कि अमेरिका पांच दिनों के लिए बिजली संयंत्र पर हमले नहीं करेगा। ट्रंप ने ट्रू सोशल साइट पर युद्ध के समाधान की संभावना जताई। वैसे ट्रंप पहले भी कह चुके हैं कि युद्ध अंतिम चरण में है। उन्होंने जल्द समाधान की बात भी कही थी। टंÑके के बदले रुख से दोनों देशों के बीच समाधान की उम्मीदें भी जागी हैं। ट्रंप ने ईरान से बातचीत की इच्छा जताई थी। इसके बाद ईरान ने कुछ शर्तें रखी थीं जिसमें पहले जंग बंद होनी चाहिए। इसके अलावा उन्होंने नुकसान की भरपाई की थी बात की थी। लेकिन, डोनाल्ड ट्रंप ने सभी शर्तों को मानने से इंकार कर दिया था। 
बता दें कि अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध में करीब 2,000 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं। साथ ही वैश्विक अर्थव्यवस्था भी चरमरा गई है। तेल की कीमतें बढ़ने के साथ ही रसोई गैस की किल्लत ने लोगें को परेशान कर दिया है। हवाई मार्गों पर भी खतरे के चलते लोग यात्रा से बच रहे हैं।