आजम में मिलने जेल जाएंगे अखिलेश, पश्चिमी यूपी साधने को लगा सकते हैं दांव

जन प्रवाद, ब्यूरो। 
मुरादाबाद। उत्तर प्रदेश में आगामी 2027 में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। ऐसे में सभी राजनीतिक पार्टियों ने तैयारियां तेज कर दी हैं। पक्ष और विपक्ष दोनों एक दूसरे पर हमलावर हैं। यही नहीं एक दूसरे के विधायक व नेताओं को अपनी ओर खींचने का खेल भी जोरों पर चल रहा है। योगी सरकार में आजम खां को लेकर बड़ी खबर आ रही है। 


पश्चिमी यूपी को साधने के लिए अखिलेश यादव फिर से आजम खां पर दांव लगा सकते हैं। सपा शासन में मिनी मुख्यमंत्री कहे जाने वाले आजम खां भले ही लंबे समय से जेल में हैं और इस बीच के कुछ चुनावों में उनकी या उनके परिवार की सीधी हिस्सेदारी नहीं हो सकी, लेकिन इसके बाद भी सपा के नीतिगत मामलों में उनका दखल और प्रभाव कम नहीं हुआ है। जेल बंदी के दौरान सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव का समय-समय पर उनसे या उनके परिवार से मिलना भी पार्टी में उनके कद की अहमियत बताता है।


पूर्व 2022 के विधानसभा चुनाव की बात करें तो टिकट के फैसलों से लेकर चुनाव संचालन तक सपा सुप्रीमो ने उनकी राय को तरजीह दी थी। इस चुनाव के नतीजों में पश्चिमी यूपी के दायरे में गिने जाने वाली 126 सीटों में से 41 पर सपा-रालोद गठबंधन ने जीत दर्ज की थी। इनमें से 33 सीटें सपा उम्मीदवारों के खाते में थीं। मुरादाबाद मंडल की 27 सीटों में से 17 पर सपा को सफलता मिली थी।
जानकारों का अनुमान है कि इस मुलाकात में पश्चिमी यूपी के लिहाज से उन विषयों पर भी चर्चा हो सकती है, जिन्हें मुद्दा बनाकर सपा को चुनावी रुख अपनी ओर करने में मदद मिल सकती है। कहा जा रहा है कि आजम खां और उनके ड्रीम प्रोजेक्ट जौहर यूनिवर्सिटी पर कसा जांच एजेंसियों का शिकंजा और उसके छात्रों का लंबा आंदोलन सपा के लिए बड़ा मुद्दा हो सकता है। इसी तरह संभल में हरिहर मंदिर बनाम जामा मस्जिद के मुकदमे की शुरुआत के साथ भड़की हिंसा तथा हाल ही में सदन में पेश हुई उसकी न्यायिक जांच रिपोर्ट भी सपा चुनावी एजेंडे में ला सकती है।