भारतीय सेना को मिलेगी नई ताकत, शामिल होगी नई तकनीक आकाश तरंग 

जनप्रवाद ब्यूरो, नोएडा। भारतीय सेना को नई ताकत मिलने जा रही है। इसके सेना शामिल होने के बाद दुश्मन को बर्बाद करने के लिए ब्रह्मोस-अग्नि जैसी भारी भरकम मिसाइलों की जरुरत कम ही पड़ेगी। नई तकनीक आकाश तरंग दुश्मन देश की सेना औैर उसके युद्धक हथियारों को नष्ट करने के लिए काफी है। 
डीएसी ने दी मंजूरी

रक्षा अधिग्रहण परिषद यानी डीएसी ने करीब 52 हजार करोड़ रुपये के नए रक्षा सौदों को मंजूरी दी है। इस सौदे के तहत आकाश तरंग की खरीद की जाएगी। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार यह तकनीक भारतीय सेना का सबसे घातक और अहम हथियार बनेगा। ऐसा इसलिए है क्योंकि आज के दौर में साल दर साल युद्ध का तरीका बदल रहा है। आज से 10-15 साल पहले टैंक, फाइटर जेट और बड़ी मिसाइलों के दम पर युद्ध लडे और जीते जाते थे। अब यह तरीका बदल चुका है। रूस और यूक्रेन युद्ध इसका सबसे बड़ा प्रमाण है। यहां अब मिसाइलों और टैंकों से ज्यादा आधुनिक तकनीक की जरुरत पड़ रही है। यही वजह है कि भारत अब सिर्फ हमला करने वाले हथियारों पर नहीं, बल्कि दुश्मन के हमले को शुरूआत में ही रोकने वाली तकनीकों पर भी तेजी से काम कर रहा है।
डिफेंस की दिशा में अहम कदम 

भारत ने डिफेंस की दिशा में अहम कदम बढ़ाते हुए आकाश तरंग को सेना में शामिल करने को मंजूरी दे दी है। बता दें कि यह एडवांस एंटी-यूएवी इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम है। आसान भाषा में कहें तो यह दुश्मन के ड्रोन को गोली या मिसाइल से नहीं गिराता, बल्कि उसका पूरा कंट्रोल छीन लेता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि हर ड्रोन अपने आॅपरेटर से रेडियो सिग्नल के जरिए जुड़ा होता है। इसी सिग्नल के जरिए उसे दिशा, ऊंचाई और टारगेट की जानकारी मिलती है। आकाश तरंग इसी कनेक्शन पर हमला करता है। जैसे ही कोई दुश्मन ड्रोन भारतीय सेना की पोस्ट, बॉर्डर, एयरबेस या किसी संवेदनशील इलाके की तरफ बढ़ेगा, यह सिस्टम उसके कम्युनिकेशन लिंक को जाम कर देगा। इसके बाद ड्रोन अपने आॅपरेटर से संपर्क खो देगा। ऐसे में समझा जा सकता है कि आकाश तरंग बिना गोली-बारुद और महंगी मिसाइलों पर बिना खर्च किए ही दुश्मन देश की रीढ़ तोड़ देगा। आकाश तरंग ड्रोंस के जीपीएस को भी कंफ्यूज करने की ताकत रखता है। 
रूस-यूके्रन युद्ध से सबक

हम सभी जानते हैं कि रूस और यूक्रेन युद्ध के दौरान यूक्रेन ने ड्रोन से भारी तबाही मचाई थी। ऐसे में समझा जा सकता है कि पूरी दुनिया में ड्रोन का खतरा बढ़ने के साथ नई चुनौती भी सामने आई है। अगर दुश्मन एक साथ दर्जनों या सैकड़ों छोटे ड्रोन भेज दे तो हर ड्रोन पर महंगी मिसाइल दागना समझारी नहीं होगी। ऐसी स्थिति में यहीं आकाश तरंग सबसे बड़ी भूमिका निभाएगा। यह इलेक्ट्रॉनिक तरीके से एक साथ कई ड्रोन के सिग्नल को ब्लॉक कर देगा। इससे बिना खर्च के दुश्मन देश के मंसूबों को नाकाम करने में सफलता हासिल होगी। यही वजह है कि भारतीय सेना अब इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर को भविष्य के युद्ध की सबसे बड़ी ताकत मान रही है।
अन्य हथियारों और सिस्टम होंगे शामिल

रक्षा अधिग्रहण परिषद डीएसी ने सिर्फ आकाश तरंग को ही मंजूरी नहीं दी है। इसके साथ अन्य ऐसे हथियारों और सिस्टम को शामिल करने की मंजूरी दी है जो भारतीय सेना की ताकत को कई गुना बढ़ा देंगे। इसमें मुख्य रूप से मैन पोर्टेबल एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल, मीडियम रेंज सरफेस टू एयर मिसाइल, वेरी शॉर्ट रेंज एयर डिफेंस सिस्टम, एक्टिव प्रोटेक्शन सिस्टम और कामिकेज ड्रोन शामिल हैं। ये सभी हथियार मिलकर भारतीय सेनाओं की ताकत को मौजूदा ताकत से कई गुना अधिक बढ़ा देंगे। इनके आने के बाद दुश्मन की किसी भी चाल को न केवल माकूल जवाब दिया जा सकेगा, बल्कि उसके हर मंसूबे पर नेस्तनाबूद किया जा सकेगा।