वैज्ञानिकों ने की अब तक के सबसे पुरातन और विशाल सांप की खोज 

जनप्रवाद ब्यूरो नई दिल्ली। वैज्ञानिकों ने अब तक के सबसे पुरातन और विशाल सांप की खोज की है। यह सबसे बड़ा समुद्री सांप माना जा रहा है। यह सांप धरती पर इंसानों के आने से लाखों साल पहले था। इसके आकार और कार्य को जानकर शोधकर्ता भी हैरान हैं। 

नई-नई खोजे करते हैं वैज्ञानिक


समय-समय पर दुनियाभर के वैज्ञानिक नई-नई खोजे करते हैं। इनमें कई ऐसी खोजें होती हैं, जिन्हें देखकर वे खुद भी हैरान हो जाते हैं। अब शोधकर्ताओं ने एक ऐसी खोज की है, जिसने पूरी दुनिया को चौंका दिया है। वैज्ञानिकों ने एक विशाल सांप की खोज की है। यह अब तक सबसे बड़ा समुद्री सांप माना जा रहा है। इस सांप का अस्तित्व लाखों साल पहले था। माना जा रहा है पृथ्वी पर मानव जीवन की उत्तपत्ति से लाखों से पहले यह जीव समंदर पर राज करता था। विशाल समुद्र में इसके सामने कोई भी जीव टिक नहीं पाता था। शोधकर्ताओं के अनुसार यह शातिर शिकारी की पहचान रखता था। यह सांप अपना पेट भरने के लिए पलभर में शॉर्क जैसी खतरनाक मछली का शिकार कर लेता था। वैज्ञानिकों के अनुसार की इसकी लंबाई 12 मीटर से भी ज्यादा थी।   सांप का नाम पैलियोफिस कोलोसियस है। यह विशाल सांप समुद्र में उथले पानी में घूमता था। बदलते समय और मौसम के कारण यह अब मौजूद नहीं है।
3.4 करोड़ साल पहले थी प्रजाति

शोध में बताया गया है कि इओसीन युग के दौरान महासागरों में रहने वाला पैलियोफिस कोलोसियस सांप उस दौरान समुद्री इकोसिस्टम में पहले पायदान पर था। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह प्रजाति 5.6 करोड़ से 3.4 करोड़ साल पहले रहता था। इसके अस्तित्व को और भी ज्यादा हैरान वाली बात इसकी लंबाई है। जहां आज के ज्यादातर समुद्री सांप 2 से 3 मीटर से ज्यादा लंबे नहीं होते वहीं इसके बारे में वैज्ञानिकों की राय अलग है। उनका कहना है कि पैलियोफिस कोलोसियस का 8 से 12 मीटर तक लंबे होने हैरान करने वाला मामला है। इस विशाल प्रजाति की खोज समुद्री सांपों के बारे में कई मान्यताओं को फिर से जांचने का मौका देती है। वैज्ञानिकों को इस सांप की केवल रीढ़ की हड्डियां मिली हैं, जो असामान्य रूप से बड़ी हैं। 2018 में की गई एक स्टडी में रीढ़ की हड्डियों को किसी भी ज्ञात आधुनिक सांप प्रजाति (समुद्री या स्थलीय) की तुलना में बड़ा बताया। शोधकर्ताओं का कहना है कि जीवाश्म डेटा से पता चलता है कि पुराने महासागरों में जो जीव रहते थे वो पहले की गई कल्पनाओं से ज्यादा बड़े और शक्तिशाली शिकारी थे।

उथले समुद्री वातावरण में निवास

अध्ययन में वैज्ञानिकों को जो सबूत मिले हैं, वे इस जीव के उथले समुद्री वातावरण में रहने की ओर इशारा करते हैं। इसका प्रमुख निवास उत्तरी अफ्रीका का एक बड़ा भाग हुआ करता था। इस क्षेत्र को ट्रांस-सहारा सीवे के नाम से जाना जाता है। यह उस दौर में मौजूद था, जब वैश्विक तापमान आज की तुलना में अधिक था। आज का दक्षिणी अफ्रीकी रेगिस्तानी इलाका कभी तटीय जल से भरा था। वैज्ञानिकों का मानना है कि बड़े सरीसृप यानी रेंगकर चलने वाले जीव गर्मी पर निर्भर रहते थे। शोधकर्ताओं के अनुसार उसकी खोपड़ी अन्य आधुनिक सांपों की तरह बहुत लचीली थी। ऐसे में वह बहुत बड़े शिकार को निगल सकता था। इसमें बड़ी मछलियां, शार्क या डॉयरोसॉरिड नाम के मगरमच्छ जैसे सरीसृप शामिल थे। आधुनिक समय में समुद्री सांप बहुत छोटे और कम प्रभावशाली होते हैं। सबसे लंबी प्रजाति एक पीला समुद्री सांप है जो अधिकतम लगभग 3 मीटर तक है। यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि जमीन पाया जाने वाला अब तक का सबसे लंबा सांप टाइटेनोबोआ भी इसके बराबर ही लंबा था। बता दें कि टाइटेनोबोआ भी अब विलुप्त हो चुका है।