मंगल की सतह पर मिली रंग-बिरंगी छींटेदार चट्टानें जीवन का सबूत

जनप्रवाद ब्यूरो, नई दिल्ली। नासा के वैज्ञानिकों को मंगल की सतह पर रंग बिरंगे छींटेदार चट्टाने मिली हैं। ये हमारे पड़ोसी ग्रह पर प्राचीन जीवन के सबूत माने जा रहे हैं। नासा के वैज्ञानिकों ने इसकी जानकारी साझा की। उनके अनुसार प्राचीन जीवन के ये अब तक के सबसे बड़े सबूत हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार इस ग्रह पर कभी बारिश होती थी। यहां समंदर भी बहता था।
वैज्ञानिकों ने एक बड़ी कामयाबी 

नासा के वैज्ञानिकों ने एक बड़ी कामयाबी हासिल की है। नई खोज के अनुसार जिस मंगल ग्रह को अब तक सूखा और बंजर मानते माना जाता था वहां बारिश और समुद्र तट के सबूत मिले हैं। जिसके बाद से इस ये चर्चा तेज हो गई है कि आने वाले समय में मंगल पर इंसान रह सकते हैं। यह कामयाबी नासा के परसिवरेंस रोवर से मिली है। रोवर ने यहा जेजेरो क्रेटर परत वाले बलुआ पत्थर खोजे हैं। इनमें गोल आकार के दाने पाए गए हैं। धरती पर इस प्रकार के पत्थर आमतौर पर समंदर के किनारे या झील के आसपास पाए जाते हैं। इन पत्थरों को लेकर रिसर्च टीम से जुड़े शोधकर्ता एलेक्स जोन्स का कहना है कि ये पत्थर मंगल ग्रह पर मौजूद पुराने समुद्र तट के सबूत हो सकते हैं। इससे पता चलता है कि मंगल पर कभी पानी हुआ करता था। बता दें कि  परसिवरेंस रोवर मंगल ग्रह पर मौजूद रहकर काम कर रहा है। इसने सफायर कैनयान चट्टान का नमूना इकट्ठा किया था।

प्राचीन झील या समुद्र का किनारा

 

जिस जगह ये नमूने मिले है उसे एक प्राचीन झील या समुद्र का किनारा समझा जा रहा है। इस चट्टान पर जो छींटे और धब्बे हैं वो संभावित रासायनिक प्रतिक्रियाओं का संकेत दे रहे हैं। इन पत्थरों ने शोधकर्ताआअ‍ें की दिलचस्पी बढ़ा दी है। अइम्पीरियल कॉलेज लंदन के अगुआई में काम कर रही एक्सपर्ट्स की कहना है कि इस खोज के कई मायने हो सकते हैं। यह प्रतिक्रकियाएं किसी सूक्षम जीव की गतिविधि का नतीजा हैं। जिसने पृथ्वी के समान ही वहां भी खनिजों की रचना में भूमिका निभाई होगी। वैज्ञानिकों मानना है कि भले ही इस खोज से अभी कुछ कहना मुश्किल है, लेकिन यह खोज जबरदस्त है।

नेचर जर्नल ने छापी विस्तृत रिपोर्ट 

नेचर जर्नल ने इस बारे में विस्तृत रिपोर्ट छापी है। साइंस मिशन महानिदेशालय की प्रशासक निकी फॉक्स का इस बारे में कहना है कि इस तरह के खनिज और ऐसी संरचना वाले तलछट पृथ्वी पर भी पाए जाते हैं। आमतौर पर यह कीचड़ और कार्बनिक पदार्थ की प्रतिक्रिया से तैयार होते हैं। रिसर्च रिपोर्ट के प्रमुख लेखक जोएल हुरोवित्ज का कहना है कि यह एक संभावित जीवन का संकेत है। उपकरणों ने खास तौर से विवियन और ग्रेफाइट खनिजों की पहचान की है। इन नमूनों के विश्लेषण और परीक्षण के बाद ही सटीक अनुमान लगाया जा सकता है। परसिवरेंस के नमूनों को पृथ्वी पर 2030 में वापस लाने के लिए एक रोबोटिक मिशन की योजना बनी हैं।  नासा के कार्यवाहक निदेशक सीन डुफी ने कहा कि मानव मिशन के जरिए इन नमूनों को पृथ्वी पर लाया जा सकता है। परसिवरेंस वहां 2021 से काम कर रहा है। उनके अनुसार विश्लेषण बताता है कि कभी मंगल की सतह पर कई प्राचीन नदियां, समुद्र तट या और झीलें हुआ करती थी। इनमें कभी पानी बहता था। जेजेरो क्रेटर के ब्राइट एंजेल फॉर्मेशन इलाके में संभावित जीवन के बारे में कुछ रासायनिक सबूत मिले हैं। इस जगह की खास बात यह है कि यहां हल्के रंग के चट्टाने हैं। इनमें मिट्टी जैसे काफी छोटे-छोटे कण भी हैं।