जनप्रवाद ब्यूरो, नोएडा। योगी सरकार ने अब तक का सबसे बड़ा निवेश का मेगा प्लान तैयार किया है। पूरे यूपी में 10-20 हजार करोड़ का नहीं बल्कि 120 लाख करोड़ निवेश का लक्ष्य रखा है। इस निवेश से न केवल अलग-अलग क्षेत्रों में नए औद्योगिक हब बनेंगे बल्कि लाखों रोजगार के नए रास्ते खुलेंगे।
दस खरब डॉलर अर्थव्यवस्था
दस खरब डॉलर अर्थव्यवस्था के लिए योगी सरकार ने बड़ी तैयारी शुरू कर दी है। इसके तहत 120 लाख करोड़ निवेश का लक्ष्य रखा है। यानी प्रदेश सराकर ने हर साल 23 लाख करोड़ रुपये के निवेश का कठिन लक्ष्य तय किया गया है। मेगा प्लान के अनुसार बड़े निवेशकों को केंद्र में रखकर परियोजनाएं विकसित की जाएगी। इसके लिए जमीन, बुनियादी ढांचे और नीतिगत सुधारों पर फोकस किया गया है। अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास विभाग ने 105 से 120 लाख करोड़ रुपये निवेश जुटाने का लक्ष्य रखा है। मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में 26 से 30 लाख करोड़ रुपये निवेश की तैयारी है। उद्योगों के लिए करीब दो लाख एकड़ भूमि विकसित करने का लक्ष्य है। सरकार का मानना है कि यह लक्ष्य बड़ा है क्योंकि अभी तक चार भूमि पूजन समारोह में 12 लाख करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाएं धरातल पर उतारी जा चुकी हैं। यानी दस खरब डॉलर अर्थव्यवस्था के लिए अगले चार साल में न्यूनतम 93 लाख करोड़ रुपये का निवेश लाना होगा।
18 से 23 अगस्त तक चला कार्यक्रम
इस कड़ी में यूपी को देश का प्रमुख औद्योगिक और वैश्विक निवेश केंद्र बनाने के अभियान के लिए 18 से 23 अगस्त तक उत्तर प्रदेश और दिल्ली में यूपी-जापान इन्वेस्टमेंट मीट 2026 का आयोजन किया गया था। इस पांच दिवसीय कार्यक्रम के तहत नई दिल्ली, लखनऊ, आगरा, ग्रेटर नोएडा और वाराणसी में विभिन्न सत्र आयोजित किए गए थे। इसमें जापानी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व यामानाशी प्रांत के गवर्नर कोतारो नागासाकी ने किया। इसमें 200 से अधिक जापानी उद्योगपति व प्रतिनिधि शामिल हुए। इस सत्र में लगभग 3,191 करोड़ के शुरूआती प्रोजेक्ट्स से करीब 10,000 युवाओं को रोजगार मिलने की संभावना है। राज्य में 500 एकड़ भूमि पर एक विशेष जापानी सिटी विकसित किए जाने की योजना है। इसमें सेमीकंडक्टर, ग्रीन हाइड्रोजन, आॅटोमोटिव कंपोनेंट्स, डिजिटल बुनियादी ढांचे और कौशल विकास जैसे क्षेत्रों पर विशेष फोकस रहा।
एससीआर के तहत बनाया प्लान
इसके अलावा मेगा प्लान के अनुसार उत्तर प्रदेश स्टेट कैपिटल रीजन यानी यूपी एससीआर के तहत लखनऊ-रायबरेली औद्योगिक गलियारे को देश का बड़ा विनिर्माण केंद्र बनाने की तैयारी है। रायबरेली के बछरावां में 104 वर्ग किलोमीटर में फैला एकीकृत औद्योगिक विकास क्षेत्र और बहुआयामी माल परिवहन केंद्र बनाया जाएगा। इस परियोजना पर 26 हजार करोड़ रुपये खर्च होंगे। इससे 2.5 लाख से अधिक लोगों को सीधे और चार से पांच लाख लोगों को अप्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा। बता दें कि रायबरेली में पहले से ही भारी उद्योग जैसे रेल कोच कारखाना और ताप बिजली घर हैं। नए क्षेत्र में आॅटो और आॅटो कलपुर्जे, रेलवे से जुड़ी इकाइयां, भवन निर्माण सामग्री, सीमेंट और सिरेमिक इकाइयां, रक्षा, खाद्य प्रसंस्करण, लकड़ी और गोदाम जैसी इकाइयां स्थापित की जाएंगी। साथ ही लखनऊ के पास संडीला क्षेत्र से भी औद्योगिक माल ढुलाई के लिए एक और माल केंद्र प्रस्तावित है। इसकी क्षमता 2026 के अंत तक दो लाख टन और 2051 तक 12 लाख टन करने का लक्ष्य रखा गया है। कुल 104 वर्ग किलोमीटर में फैले इस क्षेत्र के लिए जमीन अधिग्रहित की जाएगी। एलडीए के अनुसार यूपी एससीआर के तहत इस योजना का प्रजेंटेशन शासन में हो चुका है। यह परियोजना एससीआर क्षेत्र में उद्योग और रोजगार को बढ़ावा देगी।
26 से 30 लाख करोड़ का निवेश
प्रदेश के अन्य क्षेत्रों की बात करें तो राज्य सरकार ने 2026-27 तक करीब दो लाख एकड़ का भूमि बैंक तैयार करने का लक्ष्य तय किया है। इसके लिए भूमि अधिग्रहण के साथ भूमि पूलिंग, ग्राम समाज की भूमि और विभिन्न विभागों के पास उपलब्ध अतिरिक्त भूमि के इस्तेमाल जैसे विकल्प अपनाए जा जाएंगे। जुलाई 2026 में हुई समीक्षा के अनुसार वित्तीय वर्ष 2025-26 में 15,610 एकड़ भूमि अधिग्रहित की गई और 10,678 एकड़ भूमि विकसित की गई। दस खरब डॉलर के लक्ष्य में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर सर्वाधिक फोकस है। विभागीय सूत्रों के अनुसार अकेले इस सेक्टर में 26 से 30 लाख करोड़ रुपये निवेश का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए औद्योगिक गलियारों, एक्सप्रेसवे के आसपास और लॉजिस्टिक्स क्लस्टर को बढ़ावा दिया जा रहा है। हाल में प्लग एंड प्ले औद्योगिक शेड पर काम तेज किया गया है। इसका उद्देश्य उद्योगों को जमीन के साथ तैयार भवन और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराकर उत्पादन शुरू करने में लगने वाला समय कम करना है। राज्य में 27 एकीकृत विनिर्माण एवं लॉजिस्टिक्स क्लस्टर विकसित किए जा रहे हैं।





