जनप्रवाद ब्यूरो, नोएडा। अमेरिका और कनाडा के बीच व्यापार संबंधों में तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। दोनों देशों के बीच रही व्यापार वार्ता को रोक दिया गया है। वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कनाडा, चीन और ईरान के खिलाफ बड़ा एक्शन प्लान तैयार किया है। इससे न केवल चीन और कनाडा को भारी नुकसान होगा वहीं ईरान तो युद्ध समाप्त करने को मजबूर हो जाएगा।
अमेरिका-कनाडा व्यापार वार्ता स्थगित
अमेरिका और कनाडा के बीच चल रही व्यापार वार्ता को स्थगित कर दिया गया है। इससे दोनों देशों के संबंधों के बीच एक बार फिर कड़वाहट घुल गई है। अमेरिकी मांगों को कनाडा के लिए नुकसानदेह बताते हुए कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने बातचीत रोकने का फैसला किया। इसके अलावा कार्नी ने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप पर व्यापार युद्ध शुरू करने का बड़ा आरोप लगाया है। उनका कहना है कि प्रस्तावित शर्तें कनाडा की दूसरे देशों के साथ व्यापारिक संभावनाओं को सीमित कर सकती थीं। कार्नी ने अमेरिका के साथ व्यापार वार्ता टूटने के बाद कहा कि उन्होंने खराब व्यापार समझौते के कारण बातचीत से पीछे हटने का फैसला किया। उन्होंने अमेरिका के शुल्क का जवाब देने के लिए समान दर से जवाबी शुल्क लगाने की बात कही। कार्नी ने दावा किया कि अमेरिका ने बातचीत के दौरान ऐसी नई शर्तें रखीं, जो आर्थिक रूप से नुकसानदेह और अनुचित थीं। उन्होंने कहा कि इन शर्तों से कनाडा को मिलने वाला कुल मुनाफा कम हो जाता।
कारों, आटो पार्ट्स पर टैक्स
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कनाडा से आने वाली कारों, आॅटो पार्ट्स और स्टील पर 2027 से 50 प्रतिशत शुल्क लगाने का एलान कर दिया है। ट्रंप ने कनाडा पर अमेरिकी कृषि उत्पादों पर ऊंचे शुल्क लगाने और अमेरिका के साथ अनुचित व्यापार करने का आरोप लगाया। उन्होंने कंपनियों को अमेरिका में उत्पादन शुरू करने पर टैरिफ से छूट देने की बात भी कही। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि कनाडा के साथ मौजूदा व्यापार संबंध टिकाऊ नहीं हैं और अब वॉशिंगटन उसे पहले जैसी तरजीह नहीं देगा। अमेरिका की इस कार्रवाई से दोनों देशों के साथ व्यापार तनाव और बढ़ने वाला है। वहीं कनाडा के पीएम ने भी कहा कि हम आज या जल्द ही अमेरिका के खिलाफ जवाबी टैरिफ का एलान करेंगे। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप चीन के भी सस्ते सामान पर नया 7.5% टैरिफ लगाने की तैयारी शुरू कर दी है। जानकारों का मानना है कि यह कदम चीन पर वैश्विक बाजार में कम कीमत वाले सामान की बाढ़ लाने के आरोप के बाद उठाया जा रहा है। प्रस्तावित शुल्क 7.5 फीसदी हो सकता है। बता दें कि प्रस्तावित नया शुल्क चीन पर पहले से लागू टैरिफ के अतिरिक्त होगा। पिछले महीने अमेरिका ने दुनिया की करीब 60 अर्थव्यवस्थाओं से आने वाले सामान पर 10 से 12.5 फीसदी तक के शुल्क की घोषणा की थी। इन देशों पर जबरन मजदूरी से बने उत्पादों पर रोक को प्रभावी ढंग से लागू नहीं करने का आरोप लगाया गया था। चीन समेत कई देशों ने इस कदम का विरोध किया था। फिलहाल ट्रंप प्रशासन ने अभी तक अंतिम फैसला जारी नहीं किया है। बता दें कि अमेरिकी प्रशासन ऐसा स्तर तय करना चाहता है जिससे अमेरिका और चीन के बीच चल रहा एक साल का व्यापारिक समझौता प्रभावित न हो। साथ ही सितंबर के अंत में ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच प्रस्तावित मुलाकात पर भी इसका असर न पड़े। अमेरिकी प्रशासन का मानना है कि चीन में घरेलू मांग धीमी होने के कारण कई कंपनियों ने विदेशी बाजारों का रुख किया है। इससे देश के निर्यात में बढ़ोतरी हुई है। पिछले साल चीन का व्यापार अधिशेष करीब 1.2 ट्रिलियन डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है।
अमेरिका ने तैयार किया मजबूत हथियार
वहीं ईरान के खिलाफ भी अमेरिका ने अब एक मजबूत हथियार निकाल लिया है। इससे ईरान और उसके साथियों पर नकेल कसी जा सकेगी। नए प्लान के अनुसार अब जो भी देश, बैंक या संस्था ईरान के साथ पैसे का लेनदेन करेगी उसे अमेरिकी डॉलर सिस्टम से बाहर किया जा सकता है। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने इस प्लान का ऐलान किया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि जो भी देश ईरान की मदद करेगा वो देश अमेरिकी डॉलर का इस्तेमाल नहीं कर पाएगा। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि ईरान और उसके सहयोगियों के खिलाफ अब कार्रवाई का समय शुरू हो चुका है। बता दें कि अमेरिकी वित्त विभाग ने ईरान की अर्थव्यवस्था से जुड़े पांच अहम क्षेत्रों को नई कार्रवाई के दायरे में शामिल किया है। इनमें डिजिटल संपत्ति, तकनीक, सोना, विमानन और समुद्री परिवहन शामिल है। यानी अगर कोई देश या संस्था इस क्षेत्र में ईरान से लेन-देने करेगी तो उसे अमेरिकी प्रतिबंधों का सामना करना होगा। स्कॉट बेसेंट के अनुसार नई पाबंदियां हर जगह तुरंत लागू नहीं होंगी। अमेरिका ने कुछ कंपनियों और कारोबारियों को अपना रास्ता बदलने के लिए मोहलत देने की बात कही है। बेसेंट ने साफ कर दिया कि यह राहत ज्यादा लंबी नहीं होगी। उनका कहना है कि कार्रवाई बहुत तेजी से आगे बढ़ेगी और अमेरिका इस बार पूरी तरह गंभीर है।





