जनप्रवाद, ब्यूरो, नई दिल्ली। तेज रफ्तार ट्रेनों की कई श्रेणियों को लांच करने के बाद परिवहन के क्षेत्र में मोदी सरकार ने एक और बड़ा कदम उठाया है। इस बार हाईवे से इतर वॉटर मेट्रो के विकास पर सरकार ने ध्यान केंद्रित किया है। इस योजना से देश के 18 शहरों में न केवल ट्रैफिक कम होगा बल्कि सुगम और आनंददायक सफर का अनुभव प्राप्त होगा।
परिवहन के क्षेत्र में क्रांति
जब से मोदी सरकार आई है परिवहन के क्षेत्र में क्रांति लाई है। एक ओर जहां सड़क मार्गों से तेज और सुगम यात्रा के लिए कई नेशनल हाईवे का निर्माण और विस्तार किया गया, वहीं कई सुपर फास्ट ट्रेनें चलाई गई। इनके नामों की बात करें तो वंदे भारत देश की पहली स्वदेशी सेमी हाई-स्पीड ट्रेन चलाई गई। इसकी अधिकतम गति लगभग 180 किमी प्रति घंटा रखी गई। साथ ही आधुनिक सुविधाओं वाली प्रीमियम ट्रेन तेजस भी कई रूटों पर संचालित हो रही है। इसके अलावा दिल्ली झांसी रूट भारत की पहली सेमी हाई-स्पीड ट्रेन गतिमान एक्सप्रेस की शुरुआत की गई। वहीं नमो भारत का संचालन दिल्ली-मेरठ कॉरिडोर रूट पर अपनी सेवाएं दे रही है। लंबी दूरी की आधुनिक नॉन-एसी सुपरफास्ट ट्रेन अमृत भारत लोगों में काफी लोकप्रिय साबित हुई है। नमो भारत रैपिड ट्रेन से छोटे शहरों के लोग यात्रा का लाभ ले रहे हैं। वहीं भारत की पहली बुलेट ट्रेन परियोजना पर तेजी से काम हो रहा है। अब मोदी सरकार ने परिवहन के क्षेत्र में एक और योजना का काम शुरू किया है। यह जलमार्ग परियोजना है।
18 शहरों में वाटर मेट्रो ट्रांसपोर्ट सिस्टम शुरू
केंद्र सरकार देश के 18 शहरों में वाटर मेट्रो ट्रांसपोर्ट सिस्टम शुरू करने की योजना पर काम कर रही है। पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय ने इस बारे में जानकारी दी। मंत्रालय ने नेशनल वाटर मेट्रो पॉलिसी का एक ड्राफ्ट तैयार किया है। इसे चर्चा के लिए दूसरे मंत्रालयों के पास भेजा गया है ताकि जल्द ही इस प्रोजेक्ट को पूरे देश में लागू किया जा सके। इस योजना को दो चरणों में पूरा किया जाएगा। पहले चरण में उत्तर प्रदेश के वाराणसी, अयोध्या और प्रयागराज के साथ-साथ श्रीनगर और पटना में वाटर मेट्रो शुरू करने की तैयारी है। दूसरे चरण में असम के दो शहरों, तेजपुर और डिब्रूगढ़ को इस सुविधा से जोड़ा जाएगा। केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने इस महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट की प्रगति जानने के लिए एक समीक्षा बैठक की।
मेट्रो सिस्टम में लागत काफी कम
अधिकारियों के अनुसार कोच्चि वाटर मेट्रो की सफलता और वहां से मिले अनुभवों के आधार पर अब इसे राष्ट्रीय स्तर पर ले जाया जा रहा है। सरकार उन शहरों में पानी के रास्ते यातायात को बढ़ावा देना चाहती है जहां नदियां या नहरें मौजूद हैं। इस पहल का मकसद जलमार्गों को आधुनिक और टिकाऊ सार्वजनिक परिवहन के रूप में विकसित करना है। केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा कि वाटर मेट्रो सिस्टम में लागत काफी कम आती है। इसमें पहले से मौजूद जलमार्गों का उपयोग होता है, इसलिए बड़े निर्माण कार्यों की जरूरत नहीं पड़ती। यह प्रोजेक्ट कम समय में पूरा हो जाता है और इसमें जमीन की आवश्यकता भी बहुत कम होती है। बिजली और हाइब्रिड ईंधन से चलने वाली नावों के इस्तेमाल से प्रदूषण भी नहीं होगा। इससे शहरों में सड़कों पर लगने वाले जाम से राहत मिलेगी और यात्रियों को एक आरामदायक सफर मिलेगा।
आम जनता को मिलेगी राहत
यह वाटर मेट्रो आम जनता और पर्यटकों, दोनों के काम आएगी। सरकार ने इसके लिए कुछ मानक तय किए हैं। यह सुविधा मुख्य रूप से उन शहरों में दी जाएगी जिनकी आबादी 10 लाख से अधिक है। हालांकि, दूर-दराज के इलाकों या बाढ़ की समस्या वाले क्षेत्रों में इन नियमों में छूट दी जा सकती है। भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण ने इस प्रोजेक्ट की जांच के लिए कोच्चि मेट्रो रेल लिमिटेड की मदद ली है। अब तक 18 शहरों का सर्वे पूरा हो चुका है और 17 शहरों की रिपोर्ट भी मिल गई है। केवल लक्षद्वीप की रिपोर्ट आना अभी बाकी है।





