जनप्रवाद ब्यूरो, भारतीय नौसेना की ताकत में बड़ा इजाफा हुआ है। बीडीएल ने एनएसटीएल को स्वदेशी निर्मित भारी टॉरपीडो सौंप दिया है। यह टॉरपीडो पानी के भीतर चलने वाला अत्याधुनिक हथियार है, जो दुश्मन के जहाजों और पनडुब्बियों को निशाना बनाने में सक्षम है। इसी टॉरपीडो से अमेरिकी सबमरीन ने हिंद महासागर में ईरान के जंगी जहाज को उड़ा दिया था।
आईआरआईएस को टॉरपीडो से निशाना बनाया
अमेरिका, इजरायल और ईरान युद्ध के दौरान अमेरिका की एक पनडुब्बी ने ईरान के घातक युद्धपोत आईआरआईएस को टॉरपीडो से निशाना बनाकर समुद्र में दफन कर दिया था। यह हमला उस समय हुआ जब ईरानी जहाज श्रीलंका के दक्षिणी तट से करीब 40 नॉटिकल मील दूर अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में खुद को सुरक्षित मानकर गश्त कर रहा था। टॉरपीडो का प्रहार इतना सटीक और शक्तिशाली था कि जहाज के परखच्चे उड़ गए और वह देखते ही देखते लहरों के बीच समा गया। अमेरिकी नौसेना की ओहियो-क्लास सबमरीन ने इस पूरे आॅपरेशन को बेहद खामोशी और सीक्रेट तरीके से अंजाम दिया। इस टॉरपीडो ने इतने गुप्त तरीके से काम किया कि ईरानी रडार को इसकी भनक तक नहीं लगी।
भारतीय नौसेना के पास भी टॉरपीडो
अब अमेरिका जैसा ही टॉरपीडो भारतीय नौसेना के पास भी आ गया है। सबसे बड़ी बात यह है इसे अमेरिका से आयात नहीं किया गया बल्कि इसे भारत में ही बनाया गया है। भारत डायनेमिक्स लिमिटेड ने इसे तैयार किया है। यह रक्षा क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। इसे देश का पहला प्रोडक्शन-ग्रेड वायर-गाइडेड हेवी वेट टॉरपीडो माना जा रहा है। इसे भारतीय नौसेना के लिए विकसित किया गया है। इस टॉरपीडो का निर्माण विशाखापत्तनम स्थित रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन की नेवल साइंस एंड टेक्नोलॉजिकल लैबोरेटरी के सहयोग से किया गया है। यह पूरी तरह स्वदेशी होने के साथ यह सिस्टम सीधे युद्ध में प्रयोग किया जा सकता है।
एनएसटीएल को सौंपी प्रणाली
बीडीएल की ओर जारी बयान में कहा गया कि इस प्रणाली को अभ्यास और युद्ध, दोनों तरह के अभियानों में प्रयोग किया जा सकता है। इसे औपचारिक रूप से एनएसटीएल को सौंप दिया गया है। यह आत्मनिर्भर भारत पहल के तहत उन्नत नौसैनिक हथियार प्रणालियों में भारत की आत्मनिर्भरता को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह टॉरपीडो उन्नत होमिंग और प्रोपल्शन प्रणालियों से लैस है। इसमें परिष्कृत खोज, हमला और पुन: हमला करने की क्षमताएं भी हैं, जिससे भारतीय नौसेना की परिचालन तत्परता में काफी वृद्धि हुई है।
टॉरपीडो लंबी दूरी तक मार करने में सक्षम
बता दें कि हेवी वेट टॉरपीडो लंबी दूरी तक मार करने वाले, ज्यादा ताकतवर हथियार होते हैं। इन्हें आमतौर पर पनडुब्बियों से लांच किया जाता है। इसकी सबसे बड़ी खासियत वायर-गाइडेड तकनीक है, जिसे लॉन्च के बाद भी नियंत्रित किया जा सकता है। साथ ही जरूरत के अनुसार इसकी दिशा बदली जा सकती है। इससे नौसेना के अभियानों में लचीलापन बढ़ेगा। भारत डायनेमिक्स लिमिटेड द्वारा विकसित यह टॉरपीडो फाइबर आॅप्टिक वायर-गाइडेंस, एक्टिव और पैसिव एकॉस्टिक होमिंग सिस्टम जैसी आधुनिक तकनीकों से लैस है। यह दुश्मन की आवाज पहचानकर उसे ट्रैक करता है। इसके बाद लक्ष्य खोजने के बाद हमला करता है और जरूरत पड़ने पर दोबारा वार भी कर सकता है। इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन के कारण यह कम आवाज करता है, जिससे यह छिपकर हमला करने में सक्षम है। माना जा रहा है कि इसकी मारक क्षमता करीब 40 किलोमीटर तक है। वहीं इसकी गति लगभग 40 नॉट्स है। यह 400 मीटर से अधिक गहराई में भी काम कर सकता है। अगर कंट्रोल वायर टूट भी जाए तो यह अपने लक्ष्य पर स्वत: हमला करने में सक्षम है। यह दुश्मन की इलेक्ट्रॉनिक चालों से भी बच सकता है। कुल मिलाकर यह आत्मनिर्भर भारत की ऐसी उपलब्धि है जिससे नौसैनिक और एंटी-सबमरीन की वॉरफेयर क्षमता को बड़ी मजबूती मिलेगी।





