भारतीय सेना को मिला नया अस्त्र, ड्रोन हमले होंगे नाकामयाब

जनप्रवाद ब्यूरो, नोएडा। भारतीय सेना को नया और खतरनाक अस्त्र मिल चुका है। इसका नाम भार्गवास्त्र बताया जा रहा है। यह इतना खतरनाक है कि 5,000 मीटर की ऊंचाई तक दुश्मन का सफाया कर देता है। नागपुर में इसका लाइव परीक्षण किया गया। 
आधुनिक युद्धशैली के मायने को बदले


रूस-यूक्रेन और ईरान जंग ने आधुनिक युद्धशैली के मायने को बदल कर रख दिया है। खासकर सस्ते ड्रोन ने हालात को और भी संवेदनशील बना दिया है। हर देश ड्रोन के खतरे से निपटने के प्रभावशाली तरीके तलाश रहा है। भारत के रक्षा वैज्ञानिक भी इस मामले में किसी से पीछे नहीं हैं। इसी बीच भारत ने ऐसा काउंटर-ड्रोन डिफेंस सिस्टम डेवलप कर लिया है, जिससे चीन, पाकिस्तान और तुर्की जैसे देशों के माथे पर पसीना आना तय है। हवाई हमलों और खतरनाक ड्रोन स्वार्म यानी ड्रोन के झुंड के बढ़ते खतरों से निपटने के लिए भारत ने रक्षा क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। सोलर डिफेंस एंड एयरोस्पेस लिमिटेड ने महाराष्ट्र के नागपुर में इंडियन आर्मी के प्रतिनिधिमंडल के सामने अपने पूरी तरह स्वदेशी और मल्टी-लेयर काउंटर-ड्रोन सिस्टम भार्गवास्त्र का सफल ट्रायल हुआ।
भार्गवास्त्र का देश में हुआ निर्माण

बता दे कि भार्गवास्त्र देश में बना, गाड़ी पर लगने वाला, मल्टी-लेयर काउंटर-स्वार्म ड्रोन सिस्टम है। इसे हथियारबंद ड्रोन, लोइटरिंग म्यूनिशन और आॅटोनॉमस ड्रोन झुंडों यानी स्वार्म्स के तेजी से बढ़ते खतरों से किफायती और बहुत असरदार सुरक्षा देने के लिए डिजाइन किया गया है। यह हार्ड-किल तकनीक के जरिए ड्रोन स्वार्म, हथियारबंद ड्रोन और आत्मघाती ड्रोन को हवा में ही नष्ट कर सकता है। यह 10 सेकंड में 64 माइक्रो-रॉकेट्स दागने और 10 किलोमीटर दूर से छोटे ड्रोन का पता लगाने में सक्षम है। यह प्रणाली 5,000 मीटर तक की ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भी प्रभावी ढंग से काम करेगी।
एयरोस्पेस लिमिटेड ने किया विकास

बता दें  कि भार्गवास्त्र का विकास सोलर डिफेंस एंड एयरोस्पेस लिमिटेड और इकोनॉमिक एक्सप्लोसिव्स लिमिटेड ने संयुक्त रूप से किया है। इस माइक्रो मिसाइल बेस्ड सिस्टम के सभी परीक्षण इस साल 2026 के अंत तक पूरे होने की संभावना है। बता दें इसका नामकरण हिंदू पौराणिक कथाओं के शक्तिशाली दिव्य अस्त्र भार्गवास्त्र के नाम पर रखा गया है। इसमें एक ऐसी खासियत है जो अन्य हथियारों से इसे अलग बनाती है। इसकी पहली सुरक्षा परत में बिना गाइडेंस वाले माइक्रो रॉकेट्स का उपयोग किया जा सकता है। इससे इसकी मारक क्षमकता 20 मीटर तक के दायरे तक हो जाती है। यह क्षमता बड़ी संख्या में एक साथ आने वाले ड्रोन स्वार्म को नष्ट करने में बेहद प्रभावी मानी जा रही है। दूसरी परत में अत्यधिक सटीक गाइडेड माइक्रो मिसाइलें शामिल हैं, जो किसी खास टार्गेट या हाई-वैल्यू वाले खतरे को निशाना बनाकर नष्ट कर सकती हैं।
महत्वपूर्ण कमी को दूर करेगा दिव्यास्त्र
यह सिस्टम भारत की मौजूदा वायु रक्षा व्यवस्था में मौजूद एक महत्वपूर्ण कमी को दूर करेगी। वर्तमान में कम लागत वाले ड्रोन को मार गिराने के लिए महंगे सतह से हवा में मार करने वाले मिसाइल सिस्टम का उपयोग आर्थिक रूप से व्यावहारिक नहीं माना जाता है। भार्गवास्त्र कम लागत में ऐसे खतरों को निष्क्रिय करने का विकल्प प्रदान करता है। इससे लंबी दूरी की महंगी मिसाइलों को लड़ाकू विमानों और क्रूज मिसाइल जैसे बड़े खतरों के लिए सुरक्षित रखा जा सकेगा। यह प्रणाली ओपन सोर्स आर्किटेक्चर पर आधारित है और इसमें एआई का भी उपयोग किया गया है। एआई विभिन्न सेंसर से प्राप्त आंकड़ों का विश्लेषण कर तेजी से निर्णय लेने में मदद करता है। इसके अलावा इसका मॉड्यूलर डिजाइन भविष्य में सॉफ्ट-किल तकनीक, जैसे सिग्नल जैमिंग और स्पूफिंग, को भी जोड़ा जा सकता है।