जनप्रवाद ब्यूरो, नोएडा। विष्णुगाड-पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना की निमार्णाधीन टनल में बड़ा हादसा हो गया। यहां अचानक भारी मात्रा में मलबा और पानी आने से काम कर रहे मजदूर अंदर ही फंस गए थे। इसमें करीब नौ मजदूरों की जान चली गई वहीं कई मजदूरों की तलाश अब भी जारी है। इस हादसे ने एक बार फिर सिलक्यारा हादसे की याद दी है। कुछ दिनों पहले आई भारतीय भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण की रिपार्ट ने जिसकी चेतावनी दी थी आखिरकार घटनाएं सच साबित होनी लगी हैं। बता दें कि रिपोर्ट में चेतावनी दी गई थी कि देश के 19 राज्यों के 181 जिलों की जमीन खिसक रही है। इससे 7500 जगह पर भूस्खलन का खतरा बढ़ गया है। इस रिपोर्ट को हमारे चैनल ने प्रमुखता से दिखाया था। अब चमोली जिले में विष्णुगाड -पीपलकोटी जलविद्युत परियोजना की निमार्णाधीन सुरंग में अचानक पानी और मलबा घुसने से श्रमिकों के फंसने की घटना ने उत्तरकाशी के सिल्क्यारा सुरंग हादसे की भयावह यादें ताजा कर दीं। बता दें कि इस घटना में श्रमिक 17 दिनों तक सुरंग के भीतर ही फंसे रहे थे। पूरे मामले की बात करें तो टीएचडीटी कंपनी की ओर से टनल के निर्माण का काम चल रहा है। इस टनल में अचानक मलबा और पानी भर गया। इसके कारण टनल के अंदर काम कर रहे करीब 20 मजदूर फंस गए। घटना की सूचना मिलते ही तत्काल राहत और बचाव कार्य शुरू किए गए। मजदूरों को खोजने के लिए और उनको सुरक्षित निकालने के लिए एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, जिला प्रशासन, पुलिस, आईटीबीपी और सेना की टीम में लगी रही। इसमें करीब नौ मजदूरों की जान चली गई। घायलों को इलाज के लिए गोपेश्वर अस्पताल भेजा गया है। वहीं कई मजदूरों की तलाश अब भी जारी है। इस घटना के बाद लोग सिलक्यारा टनल हादसे की चर्चा करते दिखे। इस घटना ने एक बार फिर पहाड़ों में सुरंग निर्माण के दौरान सुरक्षा इंतजामों और आपदा प्रबंधन की तैयारियों को पुख्ता करने पर बल दिया है। राहत की बात यह रही कि इस बार भी सरकार ने सक्रियता दिखाते हुए तेजी से राहत बचाव अभियान चलाया। इससे ज्यादातर श्रमिकों को समय रहते बाहर निकाल लिया गया। इस घटना ने हिमालयी क्षेत्रों में बड़े निर्माण कार्यों के दौरान जोखिम आकलन और सुरक्षा प्रबंधों की नियमित समीक्षा की भी सीख दी है।
शरद कुमार घटना पर जताया दु:ख
प्रोजेक्ट निदेशक शरद कुमार ने घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि यह एक अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण हादसा है। उन्होंने बताया कि हमारी पहली प्राथमिकता सभी फंसे हुए लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना है। इसके लिए सभी संसाधनों को पूरी तरह से लगाया गया है। उन्होंने कहा कि प्रभावित परिवारों को हर संभव सहायता प्रदान की जाएगी और घटना की विस्तृत जांच कराई जाएगी। इस हादसे में झारखंड और छत्तीसगढ़ के कई मजदूर मारे गए हैं। ऐसे में सीएम पुष्कर सिंह धामी ने हादसे को लेकर झारखंड और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री से दूरभाष पर वार्ता कर श्रमिकों की स्थिति से अवगत कराया। उन्होंने प्रभावित श्रमिकों को हरसंभव सहायता का भरोसा दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि रेस्क्यू किए गए श्रमिकों के उपचार में किसी प्रकार की कोई कमी नहीं रखी जा रही है। उन्हें तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई गई है। आवश्यकता के अनुरूप विशेषज्ञ उपचार, दवाइयों, आवास, भोजन और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं भी सुनिश्चित की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि यदि किसी श्रमिक को उच्च चिकित्सा संस्थान में रेफर करने की आवश्यकता होगी तो उसके लिए भी समुचित व्यवस्था की जाएगी।
2010 में चमोली जिले में हुआ था हादसा
उत्तराखंड में हुए प्रमुख हादसों की बात करें तो 2010 में चमोली जिले की ऋषिगंगा जल विद्युत परियोजना क्षेत्र में भूस्खलन से तीन मजदूरों की जान लगी गई थी। इसके बाद 2011 में ऋषिगंगा जल विद्युत परियोजना में ट्रायल रन के दौरान चट्टान गिरने से एक व्यक्ति की मौत हो गई थी। साल 2021 में चमोली जिले की तपोवन-विष्णुगाड़ जल विद्युत परियोजना के उपर ग्लेश्यिर फटने से 100 से अधिक श्रमिक घायल हो गए थे। 2023 - उत्तरकाशी के सिल्क्यारा में टनल धंसने से 41 मजदूर 17 दिन तक फंसे रहे थे। यह सिलसिला यहीं नहीं रुका। 2025 में तपोवन-विष्णुगाड़ जल विद्युत परियोजना में भूस्खलन से आठ मजदूर घायल हो गए थे। इसके बाद 2025 में ही पीपलकोटि-विष्णुगाड़ जल विद्युत परियोजना में लोको ट्राली हादसे में 15 मजदूर घायल हो गए थे। अब विष्णुगाड-पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना की निमार्णाधीन टनल में बड़ा हादसा हो गया।





