कैलाश चंद
ग्रेटर नोएडा। दिल्ली-एनसीआर के मानचित्र पर ग्रेटर नोएडा आज केवल एक शहर नहीं, बल्कि तेजी से उभरता हुआ आधुनिक शहर बन चुका है। उद्योग, शिक्षा, रियल एस्टेट और अधोसंरचना के मेल ने इसे भविष्य का शहर बना दिया है। वर्ष 2025 ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के लिए निर्णायक साबित हुआ। प्राधिकरण ने कई बड़े प्रोजेक्ट जमीन पर उतारे। वहीं 2026 वह साल होगा, जब इन उपलब्धियों की असली परीक्षा होगी।
जमीन पर उतरीं योजनाएं
2025 में ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने शहर की अधोसंरचना को नई गति दी। चौड़ी सड़कें, फ्लाईओवर, अंडरपास और सेक्टर कनेक्टिविटी को मजबूत करने पर खास जोर रहा। नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे और यमुना एक्सप्रेसवे से जुड़ी आंतरिक सड़कों के चौड़ीकरण ने ट्रैफिक का दबाव काफी हद तक कम किया। स्मार्ट सिग्नल, सीसीटीवी और इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम ने शहर को तकनीक से जोड़ दिया। यह बदलाव ग्रेटर नोएडा को एक आधुनिक शहरी पहचान देने की दिशा में बड़ा कदम साबित हुआ।
भरोसे की वापसी
2025 में ग्रेटर नोएडा एक बार फिर निवेशकों के भरोसे का केंद्र बना। इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, मोबाइल उत्पादन, डाटा सेंटर, लॉजिस्टिक्स और आॅटोमोबाइल सेक्टर में बड़े निवेश आए। प्राधिकरण की सिंगल विंडो व्यवस्था और पारदर्शी भूखंड आवंटन नीति ने उद्योग जगत को स्पष्ट संदेश दिया कि यह शहर निवेश के लिए तैयार है। नतीजतन, हजारों नए रोजगार सृजित हुए और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली।
रुकी परियोजनाओं को नई सांस
ग्रेटर नोएडा की पहचान लंबे समय तक अटकी आवासीय परियोजनाओं से जुड़ी रही। 2025 में प्राधिकरण ने इस छवि को बदलने की ठोस कोशिश की। बिल्डरों के साथ संवाद, बकाया समाधान और नियमों में लचीलापन लाकर कई परियोजनाओं को फिर से शुरू कराया गया। किफायती आवास और ग्रुप हाउसिंग पर फोकस ने मध्यम वर्ग को राहत दी। घर खरीदारों के लिए यह साल उम्मीदों की वापसी लेकर आया।
शिक्षा और नॉलेज हब की ओर
2025 में ग्रेटर नोएडा ने शिक्षा के क्षेत्र में भी बड़ा कदम बढ़ाया। नए विश्वविद्यालय, कॉलेज विस्तार, स्किल डेवलपमेंट सेंटर और रिसर्च संस्थानों के लिए भूमि आवंटन किया गया। बता दें कि प्राधिकरण की सोच साफ थी कि ग्रेटर नोएडा को केवल औद्योगिक शहर नहीं, बल्कि नॉलेज सिटी के रूप में विकसित करना है। इससे युवाओं को पढ़ाई और नौकरी दोनों के अवसर एक ही शहर में मिल सकें।
रहने योग्य शहर की पहचान
स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण 2025 की योजनाओं का अहम हिस्सा रहे। डोर-टू-डोर कचरा संग्रह, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और पार्कों के सौंदर्यीकरण ने शहर की तस्वीर बदली। ग्रीन बेल्ट और वृक्षारोपण अभियानों ने यह संकेत दिया कि विकास के साथ पर्यावरण संतुलन भी प्राथमिकता है।
डिजिटल ग्रेटर नोएडा
आॅनलाइन सेवाएं, ई-आॅफिस सिस्टम और शिकायत निवारण पोर्टल ने प्रशासन और नागरिकों के बीच की दूरी कम की। स्मार्ट स्ट्रीट लाइट और डिजिटल मॉनिटरिंग ने शहर को स्मार्ट सिटी की दिशा में आगे बढ़ाया।
बढ़ती आबादी, बढ़ती जरूरतें
2026 में ग्रेटर नोएडा के सामने सबसे बड़ी चुनौती तेजी से बढ़ती आबादी होगी। उद्योग और आवासीय विकास के साथ शहर पर पानी, बिजली, स्वास्थ्य और शिक्षा सेवाओं का दबाव बढ़ेगा। निजी वाहनों की बढ़ती संख्या 2026 में बड़ी समस्या बन सकती है। मेट्रो विस्तार, बस सेवाओं का सुदृढ़ीकरण और साइकिल ट्रैक जैसे विकल्पों को मजबूती देना जरूरी होगा।
वित्तीय संतुलन की चुनौती
विकास की रफ्तार बनाए रखने के लिए प्राधिकरण को वित्तीय अनुशासन पर खास ध्यान देना होगा। पुराने दायित्वों और नए प्रोजेक्ट्स के बीच संतुलन बनाना आसान नहीं होगा।
पर्यावरण बनाम विकास
तेज शहरीकरण के बीच पर्यावरण संरक्षण 2026 की सबसे संवेदनशील चुनौती होगी। जल संरक्षण, वायु गुणवत्ता और हरित क्षेत्र बचाए रखना प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए।
अधूरी योजनाओं पर फोकस
अब भी कुछ परियोजनाएं अधूरी हैं। 2026 में इनका समाधान प्राधिकरण की विश्वसनीयता तय करेगा। प्राधिकरण द्वारा कई नई स्कीम भी लांच होने वाली हैं। जिनमें आवासीय, इंस्टीट्यूशनल के अलावा अन्य कई स्कीम 2026 के शुरुआत में आ सकती हैं। इन योजनाओं के आने के बाद समय से वहां इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलप करना भी प्राधिकरण के लिए नई चुनौती होगी।





