जनप्रवाद ब्यूरो, नई दिल्ली। मोदी सरकार को बीते वर्षों की तरह इस साल भी अनेक चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। कहा जाए तो साल 2026 में नरेंद्र मोदी को अनेक अग्नि परीक्षाओं से गुजरना पड़ेगा। आने वाला साल आर्थिक, रक्षा के साथ राजनीतिक दृष्टि से भी भाजपा व पीएम मोदी के लिये बेहद अहम है। 2026 में देश के 4 राज्यों- असम, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और केरल तथा 1 केंद्र शासित प्रदेश- पुडुचेरी में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं।
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आर्थिक चुनौतियां :
2026-27 में सरकार को प्रत्यक्ष कर आधार बढ़ाने, निजी क्षेत्र के निवेश को बढ़ावा देने और आर्थिक वृद्धि को तेज करना बड़ी चुनौती होगी। वहीं रोजगार के नए अवसर पैदा करने के उपाय करने होंगे। मजबूत रेवेन्यू ग्रोथ के साथ-साथ टैक्स व्यवस्था एवं टैक्स दरों में संतुलन बिठाना होगा। हालांकि, सरकार ने अमेरिकी टैरिफ की काट निकाल ली है, लेकिन जिस तरह से सऊदी अरब और यूएई के बीच युद्ध जैसे हालात बन गए। इस तरह के दुनिया में होने वाले अचानक परिवर्तनों के प्रति सजग रहना होगा। बजट 2026-27 में सरकार पर यह चुनौती रहेगी कि वित्तीय घाटे को नियंत्रित किया जाए, साथ ही विकास-उन्मुख खर्च और सामाजिक कल्याण कार्यक्रमों के बीच संतुलन बनाए रखा जाए।
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ब्रिक्स का साल, बड़ा संदेश
2026 में भारत में ब्रिक्स देशों का सम्मेलन है। भारत में अब तक हुए तमाम कूटनीतिक इवेंट में यह एक सबसे बड़े आयोजन में एक होगा। भारत सरकार इसे जी20 की तर्ज पर ही भव्य और व्यापक बनाने की कोशिश में है जिसके ग्लोबल समुदाय को एक संदेश दे सके।
पड़ोसियों के साथ रिश्ते को बेहतर करने की चुनौती
बांग्लादेश और नेपाल, आने वाले साल की शुरुआत में इन दोनों ही पड़ोसी देशों के चुनाव भारत के लिए भी खासे अहम है। भारत चाहेगा कि पड़ोस में सत्ता हस्तांतरण शांतिपूर्ण हो। इसके अलावा दूसरे पड़ोसी देशों के साथ संबंध भी अगले साल भारत के लिए अहम होगा। जिस तरह बांग्लादेश में हालात खराब हैं उससे निपटना मोदी सरकार की अग्नि परीक्षा होगी।
ग्लोबल संतुलन का साल
ग्लोबल ऑर्डर में नैरेटिव वॉर की अहमियत को भारत ने समझा। कूटनीतिक मोर्चे पर यह नई चुनौती सामने आई है। 2026 में भारत की चुनौती होगी कि इस नई चुनौती का सामना करे और नैरेटिव वॉर में भी वह बढ़त ले। जानकारों के अनुसार अब यह आधुनिक कूटनीति का अहम हिस्सा बन गया है। पश्चिम एशिया हो या फिर यूक्रेन युद्ध, भारत ने मौजूदा साल में भी लगातार डिप्लोमेसी और डायलॉग के साथ संघर्ष के समाधान की बात की है। भारत ने मौजूदा साल में पुतिन की भारत यात्रा के दौरान रूस के साथ ऐतिहासिक रिश्तों को दोहराया है तो ईयू और यूरोप के देशों के साथ आर्थिक और व्यापारिक रिश्तों में नया आयाम तलाशने की कोशिशें की है।
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भारत-अमेरिका संबंध
मौजूदा साल में भारत-यूएस संबंधों ने शायद अपने इतिहास का सबसे अनिश्चित दौर और बुरा दौर देखा। आने वाले साल में भारत को ट्रेड डील की माथापच्ची और राष्ट्रपति ट्रंप के अनिश्चित बयानों के लिए तैयार रहना होगा। क्वॉड सम्मेलन का टलना चिंता की बात है। वीजा के मसले पर भी दानों के बीच उभरे मतभेद को खत्म करना बड़ी चुनौती है।
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राजनैतिक
नए साल में कई प्रदेशों में चुनाव होंगे। ऐसे में भाजपा के सामने केवल प्रचार का ही नहीं, बल्कि संगठनात्मक मजबूती और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में सक्रिय भागीदारी की भी चुनौती होगी। असम में पार्टी की पूर्ण बहुमत की सरकार है, जबकि पुडुचेरी में गठबंधन सरकार सत्तारूढ़ है। इन दोनों स्थानों पर सत्ता को बनाए रखना भाजपा के लिए एक बड़ी चुनौती होगी। वहीं केरल, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल ऐसे राज्य हैं जहां भाजपा अपने संगठन का विस्तार कर राजनीतिक बढ़त बनाने की कोशिश कर रही है। विशेष रूप से पश्चिम बंगाल भाजपा की रणनीति का प्रमुख केंद्र बनता दिखाई दे रहा है। यहां राष्ट्रीय मुद्दों के साथ-साथ विशेष गहन पुनरीक्षण जैसी लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के माध्यम से निष्पक्ष मतदान और जागरूक मतदाता पर जोर देना पार्टी की चुनावी रणनीति का अहम हिस्सा हो सकता है।





