हेमेन्द्र सिंह
उत्तर भारत के विकास मानचित्र में वर्ष 2025 एक निर्णायक मोड़ के रूप में दर्ज किया जा रहा है। इस बदलाव का केंद्र है नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, जेवर, और इसकी धुरी पर घूमता यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण। कभी अपेक्षाकृत शांत और कृषि-प्रधान क्षेत्र रहा यह इलाका आज उत्तर प्रदेश के सबसे तेजी से उभरते आर्थिक और औद्योगिक हब के रूप में पहचान बना रहा है।
विकास की धड़कन जेवर एयरपोर्ट
जेवर एयरपोर्ट केवल एक हवाई अड्डा नहीं, बल्कि एक संपूर्ण एयरोसिटी इकोसिस्टम है। 2025 में इसके पहले चरण के संचालन की तैयारियों ने यमुना प्राधिकरण क्षेत्र में अभूतपूर्व हलचल पैदा की। रनवे, टर्मिनल, एयर ट्रैफिक कंट्रोल, कार्गो हब और मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी ने इस परियोजना को देश की सबसे महत्वाकांक्षी बुनियादी ढांचा योजनाओं में शामिल कर दिया है।
यमुना प्राधिकरण ने अपनी मास्टर प्लानिंग को एयरपोर्ट-केंद्रित रखते हुए औद्योगिक, आवासीय, वाणिज्यिक और लॉजिस्टिक्स सेक्टर में संतुलित विकास का खाका तैयार किया।
विकास का विस्तार और नई पहचान
औद्योगिक निवेश में उछाल
2025 में ईडा क्षेत्र में इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर, डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग, मेडिकल डिवाइसेज और (एफएमसीजी) कंपनियों का निवेश तेजी से बढ़ा। एयरपोर्ट के पास प्रस्तावित लॉजिस्टिक्स पार्क और फ्री ट्रेड वेयरहाउस जोन ने विदेशी निवेशकों का ध्यान आकर्षित किया।
फिल्म सिटी और क्रिएटिव इकोनॉमी
जेवर एयरपोर्ट से सटे क्षेत्र में बन रही इंटरनेशनल फिल्म सिटी 2025 में यमुना प्राधिकरण की ब्रांडिंग का बड़ा हथियार बनी। इससे न केवल रोजगार सृजन हुआ, बल्कि पर्यटन और मीडिया उद्योग को भी गति मिली।
रियल एस्टेट और हाउसिंग सेक्टर
2025 में ईडा क्षेत्र का रियल एस्टेट नोएडा-ग्रेटर नोएडा से आगे निकलता दिखाई दिया। प्लॉट स्कीम्स, ग्रुप हाउसिंग, ईडब्ल्यूएस और मिडिल इनकम हाउसिंग योजनाओं ने मध्यम वर्ग को आकर्षित किया।
कनेक्टिविटी और इंफ्रास्ट्रक्चर
यमुना एक्सप्रेसवे, ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे, प्रस्तावित गंगा एक्सप्रेसवे और रेलवे कनेक्टिविटी ने इस क्षेत्र को दिल्ली-एनसीआर नहीं, बल्कि पूरे उत्तर भारत से जोड़ा। आगे भी कई परियोजनाएं प्रस्तावित हैं। हालांकि, इनके कंप्लीट होने में कितना समय लगेगा ये तो समय ही बताएगा।
सामाजिक और आर्थिक प्रभाव
2025 तक यमुना प्राधिकरण क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर, स्थानीय व्यापार का विस्तार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था का शहरीकरण स्पष्ट रूप से दिखने लगा। जेवर, दनकौर, बुलंदशहर और अलीगढ़ के आस-पास के गांवों में भूमि उपयोग का स्वरूप तेजी से बदला। हालांकि, इस विकास के साथ स्थानीय आबादी की अपेक्षाएं भी बढ़ीं। बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं और स्थायी रोजगार की मांग प्रमुख रही। साथ ही भू-माफिया भी सक्रिय हुए और उन्होंने भोले-भाले लोगों को प्लॉट देने के नाम पर अपना खेल भी शुरू किया। हालांकि प्राधिकरण के अधिकारियों की इस पर नजर है और ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त कदम भी उठाए जा रहे हैं।
चुनौतियां भी कम नहीं
जहां 2025 ने संभावनाओं के द्वार खोले, वहीं 2026 कई कठिन प्रश्न भी सामने लाता है। इनमें जेवर एयरपोर्ट के संचालन के साथ ही क्षेत्र के समुचित विकास पर विशेष ध्यान देने की जरूरत होगी। पुराने प्रोजेक्टों पर गंभीरता से काम करना होगा जिससे प्राधिकरण की परियोजनाओं में शामिल निवेशक अपने को ठगा महसूस न कर पाएं।
भूमि अधिग्रहण और सामाजिक संतुलन
जेवर एयरपोर्ट और उससे जुड़ी परियोजनाओं के विस्तार के लिए भूमि की आवश्यकता बनी रहेगी। 2026 में सबसे बड़ी चुनौती होगी। सबसे पहले किसानों के हितों की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाने होंगे। साथ ही पारदर्शी मुआवजा नीति अमल में लानी होगी। साथ ही किसानों के किए गए समझौते के तहत पुनर्वास और पुनर्स्थापन पर पारदर्शिता के साथ काम करने की जरूरत होगी।
पर्यावरणीय दबाव
तेज शहरीकरण के कारण भूजल स्तर में गिरावट आएगी। इसको ध्यान में रखते हुए प्राधिकरण को भविष्य को निहारते हुए ठोस कदम उठाने होंगे। इसके अलावा जब कृषि योग्य भूमि पर कंक्रीट का निर्माण होगा तो हरित क्षेत्र में कमी आएगी। इससे प्रदूषण का खतरा और भी बढ़ेगा। वर्ममान में पूरा दिली एनसीआर प्रदूषित गैस चैंबर बना हुआ है। लोगों का सांस लेना दूभर हो रहा है। 2026 में ईडा के सामने सस्टेनेबल डेवलपमेंट को केवल नीतियों तक सीमित न रखकर जमीन पर लागू करने की परीक्षा होगी।
इंफ्रास्ट्रक्चर बनाम जनसंख्या दबाव
एयरपोर्ट के शुरू होते ही जनसंख्या प्रवाह तेज होगा। इससे एकाएक यातायात दबाव बढ़ेगा। इसके लिए प्राधिकरण को प्राथमिकता के आधार पर ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम बेहतर करना होगा। इसके साथ ही जल, बिजली और सीवरेज की आपूर्ति के लिए पर्याप्त कदम उठाने होंगे।
रोजगार और स्किल गैप
विभिन्न योजनाओं और परियोजनाओं के तहत प्राधिकरण में निवेश तो आ रहा है, लेकिन स्थानीय युवाओं को योग्य बनाना 2026 की बड़ी जिम्मेदारी होगी। स्किल डेवलपमेंट सेंटर, आईटीआई और इंडस्ट्री-अकैडमिक सहयोग को मजबूत करना आवश्यक होगा।
प्रशासनिक पारदर्शिता
तेज विकास के साथ भ्रष्टाचार, अवैध कॉलोनियों और अनियोजित निर्माण का खतरा बढ़ता है। 2026 में यमुना प्राधिकरण के लिए ई-गवर्नेंस और सख्त नियमन अनिवार्य होगा।
भविष्य की दिशा
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट ने यमुना प्राधिकरण को वैश्विक नक्शे पर स्थान दे दिया है। 2025 ने यह साबित कर दिया कि सही नीति, राजनीतिक इच्छाशक्ति और निजी निवेश मिलकर किसी क्षेत्र की तस्वीर बदल सकते हैं। 2026 यह तय करेगा कि क्या यह विकास समावेशी होगा?, क्या यह पर्यावरण-संतुलित रहेगा? और क्या यह स्थानीय लोगों के जीवन को बेहतर बनाएगा? यदि यमुना प्राधिकरण इन सवालों का संतुलित उत्तर दे सका तो जेवर एयरपोर्ट के आसपास विकसित होता यह क्षेत्र केवल उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि पूरे भारत के लिए एक मॉडल डेवलपमेंट जोन बन सकता है।





