जनप्रवाद ब्यूरो, नई दिल्ली। साल 2025 आर्थिक सुधारों का साल रहा। साल की शुरुआत में वित्त मंत्री ने बजट 2025 में इनकम टैक्स रेट में बड़ी कटौती का ऐलान किया। इसके अलावा जीएसटी के दो स्लैब बनाकर देशवासियों को बड़ी राहत दी। जिसका असर आम लोगों की जेब पर पड़ा।
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इनकम टैक्स और बजट सुधार
2025-26 का वित्तीय वर्ष भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए ऐतिहासिक साबित हुआ। साल 2025 भारत सरकार ने दशकों पुराने कानूनों को एक आधुनिक और आसान सिस्टम से बदल दिया। इसमें इनकम टैक्स और बजट सुधार शामिल थे, जिसमें 2025 के नए इनकम टैक्स बिल ने 60 साल पुराने कानून की जगह ली और टैक्स फाइलिंग को आसान बनाया। 2025 के इनकम टैक्स रिफॉर्म के महत्व पर जोर दिया गया। जिसके तहत 12 लाख रुपए तक (सैलरीड लोगों के लिए 12.75 लाख रुपए तक) की कमाई करने वालों पर जीरो टैक्स का प्रावधान किया गया। सरकार ने इनकम टैक्स एक्ट, 1961 को नए इनकम टैक्स बिल, 2025 से बदल दिया। असेसमेंट ईयर शब्द हटा दिया गया है और अब सिर्फ टैक्स ईयर शब्द का इस्तेमाल किया। नीति सुधारों, वैश्विक व्यापार और घरेलू निवेश के सम्मिलित प्रभाव ने देश को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी, 2025 को बजट पेश करते हुए कुल प्राप्तियों को 34.96 लाख करोड़ रुपये और व्यय को 50.65 लाख करोड़ रुपये बताया था। राजकोषीय घाटा जीडीपी का 4.4% बताया। पूंजीगत व्यय 11.21 लाख करोड़ रुपये (3.1%) रखा गया, जो बुनियादी ढांचे और रोजगार सृजन के लिए महत्वपूर्ण था।
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जीएसटी 2.0
79वें स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को संबोधित करते हुए नए जीएसटी सुधार लाने का ऐलान किया। वित्त मंत्रालय के अनुसार, जीएसटी 2.0 का असर अब दिखने लगा है। लोगों की खरीदारी बढ़ी है, खासकर गाड़ियों जैसे क्षेत्रों में बिक्री ज्यादा हुई है और लोगों का भरोसा भी बढ़ा है। इससे देश की अर्थव्यवस्था मजबूत हो रही है। नवंबर महीने में यात्री वाहनों की बिक्री में अच्छी बढ़त देखी गई। त्योहारों के बाद की मांग, जीएसटी दरों में कटौती और शादी के सीजन की वजह से गाड़ियों की बिक्री बढ़ी। रिपोर्ट के अनुसार, नवंबर में खुदरा बिक्री पिछले साल की तुलना में 22 प्रतिशत बढ़ी। वहीं, थोक बिक्री में पिछले वर्ष की तुलना में 19 प्रतिशत की वृद्धि हुई और यह 4.1 लाख यूनिट तक पहुंच गई। इसके अलावा, जीएसटी दरों में बदलाव से राज्यों की कमाई भी बढ़ी है। सितंबर से नवंबर के बीच राज्यों को मिलने वाला जीएसटी राजस्व पिछले साल की तुलना में 5 प्रतिशत ज्यादा रहा। दिसंबर माह में समाप्त हुए शीतकालीन सत्र के दौरान वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने राज्यसभा में कहा कि चालू वित्त वर्ष (2025-26) के सितंबर से नवंबर के दौरान जीएसटी संग्रह 2024-25 की इसी अवधि में 2,46,197 करोड़ रुपए से बढ़कर 2,59,202 करोड़ रुपए हो गया। आने वाले समय में जीएसटी से होने वाली कमाई भी ज्यादा होगी। जीएसटी सुधारों के बाद लोगों का भरोसा बढ़ा है और बैंक से लिए जाने वाले कर्ज में भी बढ़ोतरी हुई।
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नए लेबर कानून
21 नवंबर, 2025 को चार नए श्रम कोड लागू किए गए। इसमें वेतन, सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा में सुधार किया गया। श्रम मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने इसे हर मजदूर के लिए गरिमा की गारंटी बताया। पुराने लेबर कोड के अनुसार, एक कर्मचारी 5 साल की सर्विस के बाद ग्रेच्युटी का हकदार होता था, लेकिन अब 29 पुराने लेबर कानूनों की जगह 4 आसान कोड आ गए हैं। कर्मचारियों को अब सिर्फ एक साल की सर्विस के बाद ग्रेच्युटी मिलेगी, और 40 साल से ज्यादा उम्र के कर्मचारियों के लिए सालाना मुफ्त हेल्थ चेकअप जरूरी होगा।
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मौद्रिक नीतियों और आरबीआई के कदम
भारतीय रिजर्व बैंक ने वर्ष के दौरान रेपो दर में लगातार कटौती की। फरवरी 2025 में दर 6.50% से घटाकर 6.25% और अप्रैल में 6% की गई। अगस्त में एमपीसी दरें 5.5% पर स्थिर रहीं। दिसंबर में 5.25% तक कटौती हुई। यह कदम उधार, निवेश और खपत को प्रोत्साहित करने के लिए उठाया गया। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति अक्टूबर 2025 में 0.3% रही, जो 2011-12 आधार श्रृंखला में सबसे कम थी। खाद्य और पेय श्रेणी में लगातार डिफ्लेशन देखा गया, विशेषकर प्याज, टमाटर और आलू की कीमतों में गिरावट ने थाली की लागत घटाई।
वैश्विक व्यापार और अमेरिकी टैरिफ युद्ध
साल 2025 के सबसे महत्वपूर्ण घटनाक्रमों में ट्रंप सरकार का टैरिफ प्लान रहा। अप्रैल 2025 में अमेरिका ने भारत पर 26% आयात शुल्क लगाया, बाद में 25% पर स्थिर किया। अगस्त में कुल 50% तक बढ़ गया। फार्मास्यूटिकल्स, इलेक्ट्रॉनिक्स और ऊर्जा को छूट दी गई। इसके बावजूद भारत के निर्यात में 15.52% की वृद्धि, यानी नवंबर 2025 में 73.99 बिलियन डॉलर दर्ज हुई। ट्रंप के टैरिफ प्लान से निपटने के लिए भारत सरकार ने कई कदम उठाए। भारत ने कई देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते किए। इसके परिणाम स्वरूप 2025-26 का वर्ष भारत के लिए नीतिगत सुधार, वैश्विक प्रतिस्पर्धा, स्टार्टअप्स और निवेश में अभूतपूर्व वृद्धि का साल साबित हुआ। वैश्विक व्यापार तनाव और आउटफ्लो जैसी चुनौतियां थीं, स्थिर नीतियां, मजबूत घरेलू खपत, निर्यात प्रतिस्पर्धा और नवाचार ने अर्थव्यवस्था को संतुलित और प्रगतिशील बनाए रखा। इस साल के अनुभव ने स्पष्ट किया कि भारत विश्व अर्थव्यवस्था में अपनी जगह मजबूत कर रहा है और आने वाले वर्षों में 30 ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में दृढ़ता से अग्रसर है।
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भारत बना चौथी बड़ी अर्थव्यवस्था
वर्ष 2025 में 4.18 ट्रिलियन डॉलर की जीडीपी के साथ भारत जापान को पीछे छोड़ दुनिया की चौथी सबसे बड़ी इकोनॉमी बन गया। अगले ढाई से तीन सालों में वह जर्मनी को पीछे छोड़ देगा। सरकार की तरफ से जारी एक आधिकारिक बयान में यह जानकारी दी गई है। सरकार ने विशेषज्ञों के हवाले से यह भी अनुमान जताया है कि भारत की जीडीपी का आकार 2030 तक 7.3 ट्रिलियन डॉलर हो जाएगा। चालू वित्त वर्ष यानी 2025-26 की दूसरी तिमाही में विकास दर छह तिमाहियों में सबसे ज्यादा रही है और यह दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था भी है। अमेरिका दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और चीन दूसरे स्थान पर है। बता दें कि साल भर में जेपी मॉर्गन भारत सम्मेलन और 10वीं ग्लोबल इकोनॉमिक समिट जैसे आयोजन हुए, जिन्होंने निवेशकों, नीति निर्माताओं और व्यापारियों को भारत की 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था की योजना से अवगत कराया गया।
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स्टार्टअप्स और उद्योग में ऐतिहासिक वृद्धि
भारत अब दो लाख से अधिक मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स का घर बन चुका है। 2025 में 44,000 नए स्टार्टअप्स जुड़े। जो सबसे उच्च वार्षिक वृद्धि है। टेस्ला ने जुलाई 2025 में मुंबई में पहली शोरूम खोली। इसके अलावा 20 अंतरराष्ट्रीय ब्रांड भारत में उतरे, जिसमें फैशन, सौंदर्य और खेल उत्पाद शामिल है।
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बैंकिंग और वित्तीय नियम
आरबीआई के नए नियमों के अनुसार, 1 नवंबर, 2025 से बैंक एक बैंक अकाउंट में पहले के सिर्फ एक नॉमिनी के मुकाबले चार नॉमिनी जोड़ने की अनुमति दी। इसके अलावा, क्रेडिट कार्ड फीस स्ट्रक्चर में भी बदलाव किए गए। सेबी ने म्यूचुअल फंड में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए कड़े नियम लागू किए हैं।
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रेलवे और आधार लिंकिंग
यात्रियों को अक्सर ट्रेन टिकट बुक करने में दिक्कतें आती थीं। कभी-कभी तो वे टिकट बुक ही नहीं कर पाते थे, जिससे उन्हें दोगुनी कीमत चुकानी पड़ती थी। धोखाधड़ी रोकने और दलाली पर लगाम लगाने के लिए एक बड़ा फैसला लिया गया। जनरल टिकटों की आॅनलाइन बुकिंग के पहले 15 मिनट
अब सिर्फ आधार-वेरिफाइड यूजर्स के लिए रिजर्व रहेंगे।
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जी-राम-जी बिल
भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिहाज से 21 दिसंबर, 2025 का दिन एक बड़े टर्निंग पॉइंट के रूप में दर्ज हो गया। राष्ट्रपति की मंजूरी के साथ ही विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम, 2025 यानी वी बी-जी राम जी अब देश का कानून बन चुका है। यह केवल एक योजना का नाम बदलना नहीं है, बल्कि यह देश की सबसे बड़ी कल्याणकारी योजना-महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम का बुनियादी ढांचा बदलने जैसा है। 20 साल पुराने मांग आधारित अधिकार को अब बजट-सीमित अवसंरचना मिशन में तब्दील कर दिया गया है। विकसित भारत जी राम जी बिल का मूल उद्देश्य ग्रामीण भारत को सशक्त बनाना है। यह योजना न केवल रोजगार के अवसर बढ़ाएगी, बल्कि ग्रामीण बुनियादी ढांचे को भी सुदृढ़ करेगी। इस विधेयक के तहत रोजगार के दिनों की संख्या 100 से बढ़ाकर 125 दिन कर दी गई है, जिससे गांवों में रहने वाले लोगों को अधिक काम और आय प्राप्त होगी।
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शांति बिल
शीतकालीन सत्र में केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए शांति बिल को मंजूरी दे दी है। इस विधेयक के आने से अब प्राइवेट कंपनियां भी परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में कदम रख सकेंगी। यह भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि देश 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता हासिल करने का लक्ष्य लेकर चल रहा है। अधिकारियों ने बताया शांति बिल, जिसका पूरा नाम है ‘सस्टेनेबल हार्नेसिंग एंड एडवांसमेंट ऑफ न्यूक्लियर एनर्जी फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया’, परमाणु ऊर्जा संयंत्र चलाने वालों को जरूरी सुरक्षा देगा।
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2026 में 7.4 प्रतिशत रह सकती है जीडीपी ग्रोथ
चालू वित्त वर्ष 2025-26 में भारत की आर्थिक वृद्धि में तेजी आने की उम्मीद है और देश की जीडीपी ग्रोथ 7.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जो कि पिछले वित्त वर्ष 2024-25 की अनुमानित 6.5 प्रतिशत ग्रोथ से ज्यादा है। आईसीआरए लिमिटेड की रिपोर्ट के मुताबिक, चालू वित्त वर्ष के पहले छह महीनों में आर्थिक विकास मजबूत बना रह सकता है। इस दौरान जीडीपी ग्रोथ करीब 8 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। साल के दूसरे हिस्से में विकास की रफ्तार थोड़ी धीमी हो सकती है और यह 7 प्रतिशत से नीचे आ सकती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि बाहरी चुनौतियां, खासकर कमजोर निर्यात, आगे चलकर अर्थव्यवस्था पर असर डाल सकती हैं, जब तक कि अमेरिका के साथ व्यापार समझौता नहीं हो जाता है। आईसीआरए के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही में आर्थिक गतिविधियां अच्छी रहीं। त्योहारी सीजन में मांग बढ़ने और जीएसटी दरों में कटौती से लोगों की खरीदारी बढ़ी है। रिपोर्ट में बताया गया है कि आने वाले महीनों में खनन, निर्माण और बिजली की मांग बढ़ सकती है। बारिश की वजह से इन क्षेत्रों में पहले कुछ दिक्कतें आई थीं, लेकिन अब हालात सुधरने की उम्मीद है। वहीं, निर्यात में गिरावट साल के दूसरे हिस्से में और बढ़ सकती है, जिससे आर्थिक विकास पर दबाव पड़ सकता है। आयकर में राहत, जीएसटी दरों में बदलाव, रेपो रेट में कुल 1.25 प्रतिशत (125 बेसिस पॉइंट) की कटौती और बाजार में नकदी बढ़ाने जैसे कदमों से मांग को सहारा मिला। महंगाई कम रहने से परिवारों पर खर्च का दबाव घटा और अच्छी मानसून बारिश से खेती को फायदा हुआ। चेतावनी दी कि बाहरी मोर्चे पर चिंताएं अभी बनी हुई हैं और अगर अमेरिका के साथ व्यापार समझौता जल्द नहीं होता है, तो इसका असर आने वाले समय में विकास पर पड़ सकता है।





