जन प्रवाद ब्यूरो, नई दिल्ली। चंद्रयान-4 को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। इसरो ने चांद के साउथ पोल पर एक समतल मैदान खोज लिया है। यहां विक्रम की शानदार लैंडिंग होगी। चांद पर उतरने के बाद प्रज्ञान यहां से इस ग्रह के सारे सैंपल आसानी से एकत्रित करेगा।
इसरो ने चंद्रमा की सतह पर की जगह की पहचान,
चन्द्रमा का हर रहस्य अब दुनिया के सामने होगा। इसरो ने इसके लिए बड़ा रोडमैप तैयार कर लिया है। चंद्रयान-4 मिशन के लिए इसरो ने चंद्रमा की सतह पर उस जगह की पहचान कर ली है, जहां विक्रम लैंडर सुरक्षित उतर सकता है। यह संभावित इलाका चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुवीय मॉन्स माउटन पर्वत के पास स्थित है। बता दें कि चंद्रयान-4 मिशन में अभी करीब दो साल का समय है। यह भारत का अबतक का सबसे जटिल चंद्रमा मिशन माना जा रहा है। इस बार इसरो ने लैंडर की ऐसी डिजाइनिंग की है कि यह चंद्रमा की सतह से सैंपल लेकर सुरक्षित धरती पर वापस लौट सकेगा। इस अहम अध्ययन को इसरो के स्पेस एप्लीकेशंस सेंटर के वैज्ञानिकों ने अंजाम दिया है। चंद्रयान-2 आॅर्बिटर पर लगे हाई रेजोल्यूशन कैमरा से ली गई बेहद साफ और बारीक तस्वीरों के आधार पर लैंडिंग साइल का विश्लेषण किया गया। वैज्ञानिकों ने करीब एक वर्ग किलोमीटर के इलाके को लैंडिंग के लिए सबसे उपयुक्त पाया है। इसरो चेयरमैन वी नारायणन चंद्रयान-4 के लिए 2028 का लक्ष्य लेकर चल रहे हैं। यानी सब कुछ ठीक ठाक रहा तो 2028 में चन्द्रयान-3 के बाद चन्द्रयान-4 चांद पर उतरकर अध्ययन की शुरुआत कर देगा।
लैंडिंग साइट की पहचान
बता दें कि लैंडिंग साइट की पहचान इस तरह के मिशन के लिए सबसे कठिन और चुनौतीपूर्ण टास्क होता है। इसरो के वैज्ञानिकों ने इसके लिए बहुत ही कड़े मानदंड बना रखे थे। इनमें देखा गया कि लैंडिंग वाली जगह की ढलान 10 डिग्री से कम होनी चाहिए, वहां बड़े चट्टान न के बराबर होने चाहिए। वैज्ञानिकों ने पाया कि लैंडिंग साइट पर 11 से 12 दिनों तक सूरज की रोशनी लगातार मिलती रहेगी। यहां से पृथ्वी से सीधा रेडियो संवाद सुनिश्चित करने में आासनी होगी। चंद्रयान-4 मिशन भारत का सबसे कठिन चंद्रमा मिशन माना जा रहा है। इसमें प्रोपल्शन मॉड्यूल, डिसेंडर, एसेंडर, ट्रांसफर मॉड्यूल और री-एंट्री मॉड्यूल शामिल होंगे। योजना के अनुसार चंद्रमा की सतह पर विक्रम लैंडर उतरेगा और प्रज्ञान रोवर की तरह ही रोबोटिक सिस्टम से सैंपल जुटाए जाएंगे। फिर इस सैंपल को एसेंडर मॉड्यूल के माध्यम से चंद्रमा की कक्षा में लाया जाएगा।
लैंडिंग सेलेक्शन कमेटी के पाले में है गेंद
इसके बाद उसे री-एंट्री मॉड्यूल से वापस पृथ्वी तक लाया जाएगा। अब गेंद लैंडिंग सेलेक्शन कमेटी के पाले में है, जिसकी मंजूरी के बाद चंद्रमा का यह क्षेत्र भारत के पहले लूनर सैंपल रिटर्न मिशन का तय ठिकाना बन जाएगा। चंद्रयान-4 मिशन की सफलता भारत को दुनिया के उन चुनिंदा ताकतों में शामिल कर सकता है, जो चांद से सैंपल लेकर पृथ्वी पर लौटने में कामयाब रहे हैं। इनमें अमेरिका, रूस और चीन शामिल हैं। इसरो का कहना है कि यह अध्ययन दिखाता है कि हाई-रेजोल्यूशन इमेजिंग किस तरह बेहद सटीक लैंडिंग फैसलों में मदद कर सकती है। यह न सिर्फ भारत की अंतरिक्ष क्षमता को नई ऊंचाई देगा, बल्कि चांद के दक्षिणी ध्रुव में मौजूद पानी और खनिज संसाधनों की समझ को भी और गहरा करेगा।





