तरंग शक्ति सैन्य अभ्यास में दुनिया ने देखी वायुसेना की ताकत, एफ-35 हुआ शामिल

जनप्रवाद ब्यूरो, नोएडा। भारतीय वायुसेना ने तरंग शक्ति सैन्य अभ्यास के जरिए दुनिया को अपनी ताकत दिखाई। इस दौरान आसमान में एक साथ कई देशों के विमान उड़ान भरते नजर आए। इस अभ्यास में एफ-35 के अलावा जर्मनी के खास  विमानों के साथ भारतीय विमानों ने शानदार नजारा दिखाया। 
तरंग शक्ति 2026 का वीडियो साझा 

भारतीय वायुसेना ने तरंग शक्ति 2026 का वीडियो साझा किया है, जिसमें अभ्यास में शामिल अलग-अलग देशों के विमान एक साझा फॉर्मेशन में उड़ते दिखाई दे रहे हैं। जोधपुर में हो रहे इस अभ्यास में भारत के साथ सात विदेशी देश शामिल हैं और एफ-35, राफेल, एफ-16 और ए400एम जैसे विमान हिस्सा ले रहे हैं। इसका मुख्य उद्देश्य संयुक्त हवाई अभियानों के जरिए आपसी तालमेल, अनुभव साझा करने और एक-दूसरे की संचालन प्रक्रियाओं को समझने का अवसर देना है। इस बार अमेरिकी एफ-35 लड़ाकू विमानों की भागीदारी खास आकर्षण है। बता दें कि छह एफ-35 विमानों के साथ अमेरिकी वायुसेना अभ्यास में हिस्सा ले रही है। भारतीय वायुसेना के साथ एफ-35 की किसी अभ्यास में यह पहली भागीदारी है। यही कारण है कि एफ-35ए की भारत में इस अभ्यास के दौरान भागीदारी विशेष रूप से उल्लेखनीय है। यह विमान पहले भारत में एयरो शो के दौरान दिखाई दे चुका है, लेकिन तरंग शक्ति में इसकी सैन्य अभ्यास के रूप में पहली भागीदारी हुई है।

12 अक्तूबर तक चलेगा अभ्यास 

बता दें कि यह अभ्यास 12 अक्तूबर तक चलेगा। इसका विषय पावर इन पार्टनरशिप यानी साझेदारी में शक्ति है रखा गया है। भारत के साथ आॅस्ट्रेलिया, अमेरिका, संयुक्त अरब अमीरात, फ्रांस, जर्मनी, श्रीलंका और बांग्लादेश की वायुसेनाएं इसमें शामिल हैं। कई दूसरे मित्र देश पर्यवेक्षक के तौर पर भी जुड़े हैं। यहां विभिन्न अभ्यास केवल विमानों की उड़ानों तक सीमित नहीं है। इसमें वायु दलों, अभियान योजनाकारों और जमीन पर काम करने वाले कर्मियों के बीच पेशेवर संवाद भी हो रहा है। इसके अलावा संगोष्ठी, औद्योगिक भ्रमण, विरासत स्थलों का दौरा, योग और अन्य गतिविधियों के जरिए भाग लेने वाले देशों के कर्मियों को एक-दूसरे को करीब से समझने का अवसर मिल रहा है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार अभ्यास में एयरक्रू के साथ मिशन प्लानर और आॅपरेशनल सपोर्ट से जुड़े कर्मचारी भी एक-दूसरे के साथ काम कर रहे हैं। उन्हें दूसरे देशों की कार्यप्रणाली समझने और अपने अनुभव साझा करने का मौका मिल रहा है।
परिवहन-हवा में ईंधन भरने वाले विमान शामिल 

तरंग शक्ति में इस बार लड़ाकू विमानों के साथ परिवहन और हवा में ईंधन भरने वाले विमान भी शामिल हैं।  जर्मनी भी अपने ए 400 एम सैन्य परिवहन विमान लेकर तरंग शक्ति में शामिल हुआ है। जर्मन वायुसेना के कैप्टन मॉरिस बर्न्स ने बताया कि इस बार बड़े लड़ाकू विमान अभियानों में भी शामिल किया जा रहा है। इसे लार्ज फोर्स एंगेजमेंट कहा जाता है। यानी यह सिर्फ सामान या सैनिकों को ले जाने वाला विमान बनकर अलग नहीं उड़ रहा, बल्कि बड़े लड़ाकू विमान अभ्यास का हिस्सा भी है। बर्न्स ने ए 400 एम को जर्मन वायुसेना के राष्ट्रीय बेड़े की रीढ़ बताया है। उनके मुताबिक यह भारी मालवाहक विमान है और सामरिक तथा लॉजिस्टिक दोनों तरह के मिशन कर सकता है। रक्षा जानकारों का मानना है कि अभ्यास का दायरा सिर्फ उड़ान तक सीमित नहीं है। इसमें संयुक्त प्रशिक्षण के साथ-साथ हवाई सुरक्षा और संचालन की प्रक्रियाओं को समझना भी इसका हिस्सा है। अभ्यास में पेशेवर बातचीत के अलावा सेमिनार, औद्योगिक दौरा, सेखों मैराथन, विरासत स्थलों का दौरा और योग सत्र जैसी गतिविधियां भी रखी गई हैं। तरंग शक्ति का पहला संस्करण 2024 में हुआ था। 2026 का यह संस्करण उसी सिलसिले को आगे बढ़ा रहा है।