इन किरदारों के लिए याद किए जाएंगे नाना पाटेकर, पीएम मोदी समेत कई नेताओं ने जताया दु:ख

जनप्रवाद ब्यूरो, नोएडा। दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर ने 75 की उम्र में दुनिया को अलविदा कह दिया। डॉक्टरों के अनुसार उनका निधन कार्डियक अरेस्ट के कारण हुआ। उनके निधन पर बॉलीवुड से लेकर राजनीति और अलग-अलग क्षेत्रों की कई हस्तियों ने दुख जताया। पीएम मोदी, सीएम योगी समेत कई हस्तियों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। 
मणिपाल अस्पताल में ली अंतिम सांस


गोवा के मणिपाल अस्पताल में अभिनेता नाना पाटेकर को सुबह 5 बजकर 20 मिनट पर मेडिकल टीम ने मृत घोषित किया। बता दें कि सीने में गंभीर दर्द की शिकायत पर मेडिकल टीम को उनके फ्लैट पर भेजा गया था, जहां वे बेहोशी की हालत में मिले। लगातार 45 मिनट तक सीपीआर देने के बावजूद उनकी हालत नहीं संभली और उन्हें अस्पताल ले जाया गया। मामले में मेडिको-लीगल केस यानी एमएलसी दर्ज किया गया है। अब नाना पाटेकर का पोस्टमार्टम कराया जाएगा।  बता दें कि दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का जन्म 1 जनवरी 1951 को एक मराठी परिवार में हुआ था। उनके पिता दिनकर पाटेकर टेक्सटाइल पेंटर थे वहीं मां संजनाबाई पाटेकर एक गृहिणी थीं। नाना पाटेकर ने अपने बचपन में आर्थिक तंगी भी देखी, लेकिन अपनी मेहनत और टैलेंट के दम पर उन्होंने बॉलीवुड में अपनी अलग पहचान बनाई। उनका असली नाम विश्वनाथ पाटेकर है। बचपन में उनकी छोटी बहन उन्हें प्यार से नाना कहकर बुलाती थी, और बाद में यही नाम उनकी पहचान बन गया। उनका फिल्मी सफर काफी दिलचस्प रहा। शुरूआती दौर में उन्होंने मराठी फिल्मों में छोटे-मोटे रोल किए। इन भूमिकाओं ने उन्हें स्टार तो नहीं बनाया लेकिन उनके अभिनय की गंभीरता और अलग शैली ने फिल्मकारों का ध्यान खींचना शुरू कर दिया। उन्होंने हिंदी सिनेमा में अभिनय की शुरूआत 1978 में आई फिल्म गमन से की। 
परिंदा, क्रांतिवीर अग्निसाक्षी में किया शानदार काम

इसके बाद नाना पाटेकर ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। वे एक के बाद एक फिल्में करते चले गए। उन्होंने परिंदा, क्रांतिवीर अग्निसाक्षी और वेलकम जैसी फिल्मों में शानदार अभियन किया। नाना पाटेकर उन अभिनेताओं में रहे, जिन्होंने गंभीर, दमदार और अलग तरह के किरदारों से अपनी पहचान बनाई। फिल्म तिरंगा, अब तक छप्पन, अपहरण जैसी फिल्मों में उनके अभिनय को खास तौर पर याद किया जाता रहेगा।  नाना पाटेकर के करियर का बड़ा मोड़ 1989 में आई फिल्म  परिंदा साबित हुई। फिल्म में उन्होंने गैंगस्टर का किरदार निभाया और अपने अभिनय से दर्शकों और समीक्षकों को प्रभावित किया। इस भूमिका के लिए उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और फिल्मफेयर पुरस्कार में सर्वश्रेष्ठ सह-अभिनेता का सम्मान मिला। इसके बाद नाना पाटेकर 1990 के दशक में हिंदी सिनेमा के सबसे चर्चित और भरोसेमंद अभिनेताओं में शामिल हो गए। 1994 में आई क्रांतिवीर नाना पाटेकर के करियर की सबसे महत्वपूर्ण फिल्मों में रही। फिल्म में उनके अभिनय के लिए उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का सम्मान मिला। फिल्म बॉक्स आॅफिस पर भी बड़ी सफलता रही और उस साल की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्मों में शामिल हुई। दमदार अभिनय के लिए उन्हें तीन राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और पद्मश्री समेत कई बड़े सम्मान मिले।  साल 1991 में आई अपनी फिल्म प्रहार द फाइनल अटैक का निर्देशन करने और उसमें फौजी का किरदार निभाने के लिए नाना पाटेकर ने भारतीय सेना के साथ कड़ा सैन्य प्रशिक्षण लिया था। वे असल जिंदगी में भी सेना और जवानों का बहुत सम्मान करते हैं।
फिल्मी समय से ब्रेक के दौरान करते थे खेती


फिल्मी समय से ब्रेक के दौरान वे खेती, समाजसेवा और किसानों के लिए काम करने में अपना वक्त देते थे। वे सामाजिक काम में भी सक्रिय रहे। 2015 में उन्होंने मराठी एक्टर मकरंद अनासपुरे के साथ मिलकर नाम फाउंडेशन की शुरूआत की। यह संस्था सूखा प्रभावित किसानों से जुड़े मुद्दों पर काम करती है। पारिवारिक जीवन की बात करें तो  1978 में उन्होंने थिएटर कलाकार नीलकांती पाटेकर से शादी की थी। उस समय उनकी शादी का कुल खर्च सिर्फ 750 रुपये आया था। स्क्रीन पर भले ही वे तेज लहजे और दमदार डायलॉग के लिए जाने जाते थे लेकिन असल जिंदगी में नाना पाटेकर अपने परिवार को लाइमलाइट से दूर रखते थे। शादी के बाद नाना पाटेकर और नीलकंती दो बेटों के माता-पिता बने। बड़े बेटे दुवार्सा का 2 साल की उम्र में बीमारी के कारण निधन हो गया था। छोटे बेटे मल्हार पाटेकर हैं। मल्हार असिस्टेंट डायरेक्टर के तौर पर काम कर चुके हैं और एक्टिंग में भी दिलचस्पी रखते हैं। मल्हार अपने पिता की तरह ही मीडिया और सोशल मीडिया पर भी काफी कम दिखाई देते हैं। ऐसे में कहा जा सकता है कि नाना पाटेकर की फैमिली स्टारडम की चकाचौंध से दूर रहकर साधारण और निजी जिंदगी जीने का उदाहरण है।
पीएम मोदी ने निधन पर पर जताया दुख 

पीएम मोदी ने नाना पाटेकर के निधन पर दुख जताया। उन्होंने कहा कि बहुत कम कलाकारों में नाना पाटेकर जैसी गहराई, अपनी अलग पहचान और खास मौजूदगी थी। उन्होंने हर किरदार में शानदार विविधता और रचनात्मकता दिखाई और ऐसे किरदार दिए, जिन्हें आने वाली पीढ़ियां भी याद रखेंगी। इसी तरह पश्चिम बंगाल सीएम शुभेंदु अधिकारी ने भी नाना पाटेकर के निधन पर दुख जताया। उन्होंने कहा कि दिग्गज अभिनेता के निधन की खबर से वह बेहद दुखी और स्तब्ध हैं। अधिकारी ने कहा कि भारतीय सिनेमा ने एक बेहतरीन और बेमिसाल कलाकार खो दिया। सीएम योगी ने नाना पाटेकर के निधन को कला जगत के लिए अपूरणीय क्षति बताया। उन्होंने कहा कि नाना पाटेकर ने अपने विलक्षण अभिनय से भारतीय सिनेमा को समृद्ध किया। साथ ही सामाजिक सरोकारों के जरिए समाज के प्रति अपनी प्रतिबद्धता भी दिखाई।