भारत में होगा ‘हैमर’ का निर्माण, ऑपरेशन सिंदूर में बनी थी काल

जनप्रवाद ब्यूरो, नई दिल्ली। ऑपरेशन सिंदूर में आतंकियों का काल बनी हैमर मिसाइल का अब भारत में ही निर्माण किया जाएगा। 114 राफेल विमानों के बाद भारत और फ्रांस के बीच यह बड़ा रक्षा सौदा है। भारत ने राफेल में इस्तेमाल होने वाली हैमर मिसाइल के लिए डील की है।

छठी भारत-फ्रांस वार्षिक रक्षा वार्ता

17 फरवरी को फ्रांस की रक्षा मंत्री कैथरीन वॉट्रिन भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात करेंगी। दोनों नेता बेंगलुरु में होने वाली छठी भारत-फ्रांस वार्षिक रक्षा वार्ता में शामिल होंगे। इस बैठक में पुराने रक्षा समझौते को 10 साल और बढ़ाया जा सकता है। साथ ही भारत में हैमर मिसाइल के निर्माण को लेकर अहम समझौते पर हस्ताक्षर होंगे। इससे दोनों देशों की सेनाओं के बीच ट्रेनिंग, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और संयुक्त सैन्य अभ्यास बढ़ेंगे। भारत-फ्रांस के बीच छठा वार्षिक रक्षा संवाद फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की भारत यात्रा के दौरान आयोजित किया जा रहा है। फ्रांस की रक्षा कंपनी साफ्रान और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड बीईएल इस मिसाइल के निर्माण के लिए हाथ मिलाएंगी। सूत्रों के अनुसार इस समझौते में प्रौद्योगिकी हस्तांतरण भी शामिल होगा।
लक्ष्य होगा पूरी तरह ध्वस्त

बता दें कि हैमर शब्द का मतलब हथौड़ा' होता है। जिस तरह हथौड़े का वार किसी सतह को समतल कर देता है, उसी तरह यह हथियार अपने लक्ष्य को पूरी तरह ध्वस्त करने की क्षमता रखता है। रफाल विमान में लगने वाली यह मिसाइल पहले फ्रांस से आयात की जाती थी, लेकिन नए समझौते के बाद इसका निर्माण भारत में होगा। यह एक स्मार्ट प्रिसिजन गाइडेड बम है, जो हवा से जमीन पर सटीक हमला करता है। इसकी मारक क्षमता लगभग 60 से 70 किलोमीटर तक है। वहीं पहाड़ी इलाकों और मजबूत बंकरों पर भी यह असरदार साबित हुई है। भारत में निर्माण होने से वायुसेना को तेजी से आपूर्ति मिलेगी। इसके अलावा विदेशी निर्भरता भी कम होगी।
दुश्मन के बंकरों, ठिकानों पर हमला


हैमर मिसाइल दुश्मन के बंकरों, ठिकानों और बख्तरबंद वाहनों को 70 किलोमीटर दूर से भी पूरी सटीकता से तबाह कर सकती है। इसका वजन लगभग 330 किलोग्राम है। यह स्थिर और गतिशील, दोनों तरह के लक्ष्यों को भेद सकती है। इसमें आधुनिक नेविगेशन सिस्टम लगा है, जो निशाना चूकने की संभावना को बेहद कम करता है। 125 किलोग्राम से लेकर 1000 किलोग्राम तक के विभिन्न वॉरहेड विकल्प उपलब्ध हैं। इसका प्रयोग किसी भी मौसम में किया जा सकता है। राफेल विमान से एक साथ छह अलग-अलग ठिकानों को निशाना बना सकती है।
भारत और फ्रांस के बीच रक्षा सहयोग मजबूत


बता दें कि भारत और फ्रांस के बीच रक्षा सहयोग लगातार मजबूत हो रहा है।  इसी क्रम में भारत और फ्रांस के रक्षा मंत्री कर्नाटक के वेमगल में टाटा एयरबस की एच 125 लाइट यूटिलिटी हेलिकॉप्टर की फाइनल असेंबली लाइन के आभासी उद्घाटन पर भी मौजूद रहेंगे। यह उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों संयुक्त रूप से करेंगे। वार्षिक रक्षा संवाद के दौरान दोनों देश द्विपक्षीय रक्षा सहयोग की समीक्षा करेंगे और औद्योगिक साझेदारी का विस्तार करेंगे। भारतीय सेना और फ्रांसीसी सेना के प्रतिष्ठानों में अधिकारियों की पारस्परिक तैनाती संबंधी घोषणा भी की जा सकती है। दोनों देशों के संबंधों में रक्षा सहयोग एक महत्वपूर्ण आधार रहा है। साल 2024-25 से ही यह दीर्घकालिक संबंध और मजबूत हुए हैं। प्रधानमंत्री मोदी जुलाई 2023 में फ्रांस के बैस्टिल दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए थे। वहीं जनवरी 2024 में फ्रांसीसी राष्ट्रपति बतौर मुख्य अतिथि गणतंत्र दिवस समारोह में शामिल हुए थे। हाल ही में भारत-यूरोपीय संघ सुरक्षा और रक्षा साझेदारी ने यूरोपीय देशों के साथ सामूहिक सहयोग को नई दिशा दी है।