गुवाहाटी, एजेंसी। असम राज्य इकाई के पूर्व अध्यक्ष भूपेन कुमार बोरा ने इस्तीफा देने के कुछ घंटों बाद ही फैसला वापस ले लिया। एआईसीसी प्रभारी जितेंद्र सिंह के मुताबिक हाईकमान की दखल के बाद यह बदलाव हुआ। बता दें कि बोरा ने अपना इस्तीफा कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को भेजा है। कांग्रेस अध्यक्ष को भेजे अपने त्यागपत्र में उन्होंने दावा किया कि पार्टी नेतृत्व द्वारा उन्हें उपेक्षित किया जा रहा है और राज्य इकाई में उन्हें उनका हक नहीं दिया जा रहा है। बोरा 2021 से 2025 तक असम कांग्रेस इकाई के अध्यक्ष थे और पिछले साल उनकी जगह गौरव गोगोई को असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी की कमान सौंप दी गई। वह असम में दो बार विधायक रह चुके हैं।
भाजपा के दरवाजे खुले
असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने सोमवार को कहा कि कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष भूपेन बोरा के पार्टी से इस्तीफा देने के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के दरवाजे उनके लिए खुले हैं। शर्मा ने यह भी कहा कि अगर बोरा भाजपा में शामिल होते हैं तो वह उन्हें किसी सुरक्षित सीट से चुनाव जितवाने की कोशिश करेंगे। बोरा ने आज सुबह कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को अपना इस्तीफा भेजा, जिससे असम विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी को बड़ा झटका लगा है। कांग्रेस अध्यक्ष को भेजे अपने त्यागपत्र में उन्होंने दावा किया कि पार्टी नेतृत्व द्वारा उन्हें उपेक्षित किया जा रहा है और राज्य इकाई में उन्हें उनका हक नहीं दिया जा रहा है।
सीएम ने बताया कांग्रेस का आखिरी हिंदू नेता
बोरा 2021 से 2025 तक असम कांग्रेस इकाई के अध्यक्ष थे और पिछले साल उनकी जगह गौरव गोगोई को असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी की कमान सौंप दी गई। वह असम में दो बार विधायक रह चुके हैं। शर्मा ने कहा कि बोरा कांग्रेस में ऐसे आखिरी हिंदू नेता हैं जिनकी पारिवारिक पृष्ठभूमि राजनीति की नहीं है। शर्मा ने विधानसभा के बाहर पत्रकारों से कहा, उनके इस्तीफे से यह प्रतीकात्मक संदेश मिलता है कि कांग्रेस में किसी सामान्य परिवार का व्यक्ति तरक्की नहीं कर सकता। कांग्रेस आम परिवारों के लोगों को मान्यता नहीं देती। मैं एक साधारण मध्यमवर्गीय परिवार से हूं लेकिन भाजपा ने मुझे मुख्यमंत्री बनाया है। हम कुलीन वर्ग की राजनीति के खिलाफ खड़े हैं। शर्मा ने कहा कि वह कल शाम बोरा के आवास पर जाएंगे और उनकी भविष्य की योजनाओं पर बातचीत करेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा, बोरा ने अभी तक मुझसे या भाजपा से संपर्क नहीं किया है और फिलहाल हमारा उनसे प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कोई संपर्क नहीं है।
उन्होंने कहा, अगर वह भाजपा में शामिल होना चाहते हैं तो हम उनका स्वागत करेंगे लेकिन अगर वह ऐसा नहीं चाहते, तो हम उन्हें शुभकामनाएं देंगे।
बोरा ने बताया व्यक्तिगत फैसला
बोरा ने गुवाहाटी में संवाददाताओं से कहा, मैंने आज सुबह आठ बजे कांग्रेस आलाकमान को अपना इस्तीफा भेज दिया और विस्तार से बताया कि मुझे यह कदम उठाने के लिए क्यों मजबूर होना पड़ा। यह कोई व्यक्तिगत निर्णय नहीं है। मैंने पार्टी को 32 साल दिए हैं। मैं 1994 में पार्टी में शामिल हुआ था। यह कदम केवल व्यक्तिगत नहीं है, यह पार्टी के भविष्य की चिंता से प्रेरित है। इसलिए मैंने कांग्रेस आलाकमान को सब कुछ विस्तार से बताया।ह्व उन्होंने ऐसे समय पर इस्तीफा दिया है जब कांग्रेस कुछ विपक्षी दलों के साथ गठबंधन की कोशिश कर रही है। असम में अगला विधानसभा चुनाव इस वर्ष मार्च-अप्रैल में होने की संभावना है। विधानसभा चुनाव से पहले किसी अन्य दल में शामिल होने के सवाल पर बोरा ने कहा कि उन्हें अब तक किसी भी पार्टी की ओर से कोई प्रस्ताव नहीं मिला है। उन्होंने कहा, किसी भी राजनीतिक दल की ओर से कोई औपचारिक प्रस्ताव नहीं मिला है, लेकिन यह बात भी है कि मैंने राजनीति को अलविदा कहने के लिए इस्तीफा देने का निर्णय नहीं लिया है। बोरा ने बताया कि रैजोर दल के अध्यक्ष अखिल गोगोई से कल उनकी मुलाकात हुई थी। उन्होंने कहा वह कल मुझसे मिले और हमने व्यक्तिगत स्तर पर कई मुद्दों पर चर्चा की।





