जनप्रवाद ब्यूरो, नई दिल्ली। सर गंगा राम अस्पताल के चिकित्सकों ने लेजर कटर की मदद से एक उन्नत एंडोस्कोपिक प्रक्रिया का उपयोग करते हुए एक व्यक्ति की भोजन नली में गहराई तक फंसे हुए नकली दांत को सफलतापूर्वक निकाल दिया है, जिससे मरीज को एक बड़ी सर्जरी से बचने में मदद मिली है। अधिकारियों ने शुक्रवार को बताया।
चिकित्सकों ने बताया कि मरीज जब अस्पताल लाया गया था तब उसे सांस लेने में तकलीफ, गले में दर्द और निगलने में कठिनाई की समस्या थी। उन्होंने बताया कि उसने गलती से अपना नकली दांत निगल लिया था जो खाने की नली और श्वसन नली के मिलने की जगह के ठीक नीचे ऊपरी 'इसोफैगस' (ग्रासनली) में फंस गया था। उन्होंने बताया कि उसे सीने में भी काफी तकलीफ हो रही थी। इमेजिंग अध्ययनों से पुष्टि हुई कि नकली दांत भोजन नली के एक नाजुक बिंदु पर मजबूती से फंसा हुआ था, जहां इससे ग्रासनली की परत के फटने का उच्च जोखिम था।
इस मामले को बेहद चुनौतीपूर्ण बताते हुए इंस्टीट्यूट आफ लिवर, गैस्ट्रोएंटरोलॉजी एंड पैन्क्रियाटिकबिलियरी साइंसेज (आईएलजीपीएस) के अध्यक्ष अनिल अरोरा ने कहा कि इस मामले में पारंपरिक निष्कासन विधियों से चोट लगने का काफी जोखिम था।
अस्पताल के एक चिकित्सक ने बताया, "सटीक एंडोस्कोपिक मार्गदर्शन के तहत चिकित्सकों ने लेजर बीम का उपयोग करके ग्रासनली के अंदर फंसे हुए नकली दांत को छोटे-छोटे टुकड़ों में सावधानीपूर्वक तोड़ दिया ताकि उसे ग्रासनली के अंदरूनी भाग से अलग किया जा सके।"
उन्होंने बताया कि इसके बाद ऊपरी ग्रासनली में एक सुरक्षात्मक ट्यूब डाली गई ताकि आसपास के ऊतकों को टूटे हुए दांत के नुकीले किनारों से बचाया जा सके और प्रत्येक टुकड़े को सुरक्षित रूप से निकाला जा सके।
गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग के सलाहकार श्रीहरि अनिखिंदी ने कहा कि लेजर-सहायता प्राप्त तकनीक से बिना ओपन सर्जरी के बाहरी वस्तु को निकालना संभव हो गया है। डाक्टरों ने बताया कि इस प्रक्रिया के बाद मरीज अब पूरी तरह ठीक है।





